Territorial Army Story: समर्पण और आत्मविश्वास से महिलाएं हर उस क्षेत्र में सफलता पा सकती हैं, जिसे कभी पुरुषों का गढ़ माना जाता था. ऐसे ही कैप्टन शिल्पी गर्गमुख (Captain Shilpy Gargmukh) भारतीय सशस्त्र बलों में महिला सशक्तिकरण की एक मजबूत पहचान बन चुकी हैं. वर्ष 2016 में वह टेरिटोरियल आर्मी (TA) में शामिल होने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं. यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष और मेहनत का परिणाम है, बल्कि भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी प्रतीक हैं.
पढ़ाई के साथ-साथ कैप्टन शिल्पी गर्गमुख स्पोर्ट्स और कल्चरल एक्टिवीटिज में भी सक्रिय रहीं. उन्होंने दो बार नेशनल लेवल पर बास्केटबॉल में अपने स्कूल का प्रतिनिधित्व किया और शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण भी लिया. उनके परिवार ने हमेशा अनुशासन और देश सेवा की भावना को बढ़ावा दिया, जिसने उनके भीतर वर्दी के प्रति सम्मान और देश के लिए योगदान देने का जज़्बा जगाया.
नवोदय विद्यालय से स्कूली शिक्षा और BIT से केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री
बिहार के कटिहार जिले से आने वाली शिल्पी बचपन से ही पढ़ाई और अनुशासन में अव्वल रहीं. नवोदय विद्यालय में कक्षा 10वीं में टॉप रैंक हासिल करने के बाद उन्होंने दिल्ली पब्लिक स्कूल, बोकारो से इंटरमीडिएट में बेहतरीन परफॉर्म किया. आगे चलकर उन्होंने बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT) सिंदरी, धनबाद से केमिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की.
कॉरपोरेट करियर से सेना तक का सफर
इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), हैदराबाद में काम शुरू किया. हालांकि अपने रुचि के अनुसार काम न मिलने पर उन्होंने सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की परीक्षाओं की तैयारी की. कई असफल प्रयासों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अंततः ONGC में चयनित हुईं. वर्तमान में वह गुजरात के अंकलेश्वर में ONGC की यूनिट में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं, साथ ही टेरिटोरियल आर्मी की जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभा रही हैं.
टेरिटोरियल आर्मी में ऐतिहासिक प्रवेश
वर्ष 2016 में सरकार द्वारा महिलाओं को TA में शामिल करने की पहल ने उनके लिए नया अवसर खोला. उन्होंने लिखित परीक्षा, इंटरव्यू और मेडिकल परीक्षण जैसी कठिन चयन प्रक्रिया पार की. 5 अक्टूबर 2016 को उन्हें लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन मिला. यह पल ऐतिहासिक था, जिसने आने वाली कई महिलाओं के लिए रास्ता बनाया. TA में प्रशिक्षण के दौरान बेसिक ट्रेनिंग, वार्षिक कैंप और इंडियन मिलिट्री एकेडमी में पोस्ट-कमीशनिंग प्रोग्राम शामिल होता है. अपनी प्रतिबद्धता और नेतृत्व क्षमता के बल पर वह कैप्टन के पद तक पहुंचीं.
कैप्टन शिल्पी गर्गमुख की कहानी साहस, धैर्य और देशभक्ति का उदाहरण है. वह कहती हैं कि अपने सपनों का पीछा करें, रास्ता कठिन हो सकता है, लेकिन मंज़िल सार्थक होगी.