UPSC IAS Success Story: दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास के साथ की गई मेहनत इंसान को हर ऊंचाई तक पहुंचा सकती है. उत्तराखंड की नमामि बंसल (IAS Namami Bansal) ने इसे अपनी सफलता से साबित किया है. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 17वीं रैंक हासिल कर उन्होंने दिखा दिया कि कामयाबी महंगे संसाधनों से नहीं, बल्कि मजबूत इरादों, सही दिशा और लगातार प्रयास से मिलती है. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट की डिग्री हासिल की हैं.
आज के दौर में जहां सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए लाखों रुपये की कोचिंग आम बात मानी जाती है, वहीं नमामि ने इस धारणा को तोड़ दिया. उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया. उनका मानना था कि पढ़ाई का भारी खर्च परिवार पर अतिरिक्त बोझ बन सकता है. इसलिए उन्होंने सेल्फ स्टडी का रास्ता चुना. ऑनलाइन संसाधनों, किताबों और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों की मदद से उन्होंने अपनी तैयारी की मजबूत रणनीति तैयार की.
साधारण परिवार, असाधारण उपलब्धि
नमामि के पिता ऋषिकेश में बर्तनों की एक छोटी दुकान चलाते हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित थी, लेकिन सपनों की उड़ान ऊंची थी. घर का माहौल सादगी भरा जरूर था, पर हौसले बुलंद थे. नमामि ने समय का सही प्रबंधन किया, नियमित अध्ययन किया और हर विषय को गहराई से समझने पर ध्यान दिया. उन्होंने यह साबित किया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो सीमित संसाधन भी बड़ी सफलता की राह नहीं रोक सकते.
सेल्फ स्टडी की रणनीति बनी सफलता की कुंजी
नमामि ने अपनी तैयारी के दौरान सिलेबस को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर पढ़ाई की. उन्होंने नियमित रिविजन, मॉक टेस्ट और उत्तर लेखन अभ्यास को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया. उनकी सफलता यह संदेश देती है कि सही दिशा में किया गया प्रयास और निरंतर अभ्यास ही सिविल सेवा जैसी कठिन परीक्षा में सफलता दिला सकता है.
लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा
नमामि बंसल की कहानी उन छात्रों के लिए उम्मीद की किरण है, जो आर्थिक अभाव के कारण बड़े सपने देखने से हिचकिचाते हैं. उन्होंने यह दिखा दिया कि संसाधनों की कमी कभी भी सफलता में बाधा नहीं बनती, अगर आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय साथ हो. उनकी उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि पूरे उत्तराखंड और देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है.
IAS नमामि बंसल के इंस्टग्राम प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की हैं. वह फिलहाल अभी देहरादून की म्युनिसिपल कमिश्नर हैं.