UPSC IPS Story: पुलिस विभाग में सबसे उच्च और प्रतिष्ठित पद DGP (Director General of Police) का होता है, जिसे केवल अनुभवी और योग्य IPS अधिकारियों को ही सौंपा जाता है. इस पद तक पहुंचने के लिए सबसे पहले उम्मीदवारों को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की कठिन परीक्षा पास करनी होती है. इसके बाद उनकी रैंक के आधार पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयन होता है और सालों के अनुभव के साथ ही अधिकारी DGP के पद तक पहुंचते हैं.
हाल ही में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य के पुलिस अधिकारियों में बड़ा फेरबदल किया गया. इस बदलाव में 1992 बैच के IPS अधिकारी सिद्ध नाथ गुप्ता (IPS Siddh Nath Gupta) को नया DGP बनाया गया है.
पश्चिम बंगाल में चुनाव के ठीक पहले DGP में बदलाव
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में पुलिस अधिकारियों के तबादले का आदेश दिया है. इसके तहत पीयूष पांडे की जगह सिद्ध नाथ गुप्ता को नए DGP और पुलिस महानिरीक्षक (प्रभारी) के रूप में नियुक्त किया गया है. यह निर्णय राज्य में चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के बाद लिया गया. चुनाव आयोग ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह इस नियुक्ति को लागू करे. इसके साथ ही नटराजन रमेश बाबू को सुधार सेवा महानिदेशक बनाया गया है. यह कदम पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के एक दिन बाद आया, जिससे यह संकेत मिलता है कि चुनाव से जुड़ी तैयारी को देखते हुए यह निर्णय लिया गया.
नए DGP सिद्ध नाथ गुप्ता की प्रोफ़ाइल
सिद्ध नाथ गुप्ता 1992 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के IPS अधिकारी हैं. उन्होंने वर्ष 1988 में Indian Institute of Technology Kanpur से बीटेक की डिग्री प्राप्त की और बाद में एमटेक भी किया. गुप्ता उत्तर प्रदेश के निवासी हैं और उनके अनुभव और तकनीकी पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है.
अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियां
चुनाव आयोग ने कुछ अन्य महत्वपूर्ण पुलिस पदों में भी बदलाव किया है. अजय मुकुंद रानाडे को अतिरिक्त महानिदेशक और IGP (कानून-व्यवस्था) नियुक्त किया गया. वहीं अजय कुमार नंद को कोलकाता पुलिस का कमिश्नर बनाया गया. आयोग ने निर्देश दिया है कि इन आदेशों को तत्काल लागू किया जाए और राज्य सरकार को सोमवार दोपहर 3 बजे तक अनुपालन रिपोर्ट जमा करनी होगी.
चुनाव दौरान अधिकारियों की नई भूमिका
चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन अधिकारियों का तबादला किया गया है, उन्हें चुनाव समाप्त होने तक किसी चुनाव से जुड़े काम पर तैनात नहीं किया जाएगा. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष और शांतिपूर्ण रहे. पश्चिम बंगाल में यह बदलाव यह दर्शाता है कि चुनाव आयोग चुनाव की तैयारी और कानून-व्यवस्था पर पूरा ध्यान दे रहा है. नए नियुक्त अधिकारियों की भूमिका राज्य में सुरक्षित और सुचारू चुनाव सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण होगी.