UPSC NDA Indian Navy Success Story: कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो संसाधनों की कमी भी राह नहीं रोक सकती. गोवर्धन क्षेत्र के छोटे से गांव सकरवा से निकलकर श्रेयांश शर्मा (Shreyansh Sharma) ने यही साबित कर दिखाया है. साधारण ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े श्रेयांश ने अपने दृढ़ संकल्प और अनुशासित जीवनशैली के बल पर भारतीय नौसेना (Indian Navy) में सब लेफ्टिनेंट पद हासिल कर लिया है. उनकी यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गई है.
श्रेयांश के इस सफर के पीछे उनके परिवार का अटूट विश्वास और निरंतर प्रोत्साहन रहा. सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने कभी उनके सपनों को छोटा नहीं होने दिया. पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने कठिन दिनचर्या अपनाई, अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाया और लक्ष्य से कभी नजर नहीं हटाई. कई बार चुनौतियां आईं, लेकिन श्रेयांश ने हार मानने के बजाय उन्हें सीख में बदला.
शैक्षणिक उत्कृष्टता और बहुमुखी प्रतिभा
श्रेयांश शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रहे हैं. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा वात्सल्य पब्लिक स्कूल से प्राप्त की. कक्षा 10वीं में उन्होंने 94 प्रतिशत और कक्षा 12वीं में 88 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था. पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें गिटार बजाने का भी शौक है, जो उनके संतुलित व्यक्तित्व को दर्शाता है.
एनडीए और एसएसबी में शानदार सफलता
कड़ी मेहनत के बल पर श्रेयांश ने यूपीएससी द्वारा आयोजित एनडीए परीक्षा को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण किया. इसके बाद गुजरात के गांधीनगर में आयोजित पांच दिवसीय कठिन एसएसबी साक्षात्कार में भी उन्होंने अपनी योग्यता साबित की. इस पूरी चयन प्रक्रिया में उन्हें अखिल भारतीय रैंक (AIR) 503 प्राप्त हुई, जो उनकी लगन और अनुशासन का प्रमाण है.
संस्कार और परिवार का मजबूत आधार
श्रेयांश शर्मा, जितेंद्र कुमार शर्मा के पुत्र हैं तथा भगवान दास प्रधान और ओमप्रकाश शर्मा (ओमी पंडित) के नाती हैं. उन्होंने जिस अनुशासन, परिश्रम और आत्मविश्वास के साथ यह मुकाम हासिल किया है, उसके पीछे उनके परिवार के संस्कार और निरंतर सहयोग की अहम भूमिका रही है. उनकी सफलता पर दादी उमा शर्मा और माता नीता शर्मा ने गहरी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे परिवार के लिए अविस्मरणीय पल बताया. आज वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं.