IPL 2026 BCCI: बीसीसीआई (BCCI) ने आईपीएल इकोसिस्टम पर अपनी अनुशासन की पकड़ को सीजन की आखिरी गेंद के बाद भी काफी समय तक बनाए रखने का कदम उठाया है. बोर्ड ने फैसला किया है कि उसका ‘भेदभाव-विरोधी कोड’ (Anti-Discrimination Code) खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ और अन्य स्टेकहोल्डर्स पर उनके कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद भी एक तय समय तक लागू रहेगा.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बोर्ड ने सभी फ्रेंचाइज़ीज़ को 11 पन्नों का एक निर्देश जारी किया है. इसमें बताया गया है कि हर प्रतिभागी अपने एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी तीन महीने तक इस कोड के दायरे में रहेगा. इस अतिरिक्त समय के दौरान और साथ ही पहले हुई किसी भी घटना के मामले में बीसीसीआई के पास जांच करने और कार्रवाई करने का पूरा अधिकार सुरक्षित रहेगा.
दस्तावेस में क्या कहा गया?
इस दस्तावेज में कहा गया है कि सभी खिलाड़ी और टीम अधिकारी अपने कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के 3 महीने बाद तक भी भेदभाव-विरोधी कोड का पालन करने के लिए बाध्य रहेंगे. किसी टीम अधिकारी के मामले में फ्रेंचाइज़ी और बीसीसीआई के साथ हुई किसी भी अन्य व्यवस्था के तहत बीसीसीआई के पास उस समय से पहले हुई किसी भी घटना के संबंध में भेदभाव-विरोधी कोड के तहत उस अधिकारी पर कार्रवाई करने का अधिकार बना रहेगा.
इस नियम में क्या है?
अगर इस नियम के उद्देश्य की बात करें तो भेदभाव-विरोधी कोड का उद्देश्य लीग की सार्वजनिक छवि, लोकप्रियता और गरिमा को बनाए रखने का प्रयास करना है. इसके लिए यह दो चीज़ें प्रदान करता है :-
- एक प्रभावी माध्यम, जो किसी भी प्रतिभागी को ऐसे व्यवहार करने से रोकता है जिसे नस्लीय और/या धार्मिक रूप से आपत्तिजनक माना जा सकता है.
- एक मज़बूत अनुशासनात्मक प्रक्रिया, जिसके तहत लीग से संबंधित इस तरह के अनुचित व्यवहार के सभी मामलों को निष्पक्षता, निश्चितता और तेज़ी से निपटाया जा सके.
बीसीसीआई ने आगे क्या कहा?
इस नियम में आगे कहा गया है कि किसी भी ऐसे व्यवहार में शामिल होना (चाहे भाषा, हाव-भाव या किसी अन्य तरीके से) जिससे किसी भी समझदार व्यक्ति को – चाहे वह खिलाड़ी हो, टीम अधिकारी हो, अंपायर हो, मैच रेफरी हो या कोई अन्य व्यक्ति (दर्शक सहित) – उसकी नस्ल, धर्म, संस्कृति, रंग, वंश, राष्ट्रीय या जातीय मूल, लिंग, यौन रुझान, विकलांगता, वैवाहिक स्थिति और/या मातृत्व स्थिति के आधार पर ठेस पहुंचे, अपमान हो, उसे नीचा दिखाया जाए, डराया जाए, धमकाया जाए, उसकी निंदा की जाए या उसे बदनाम किया जाए.
कितने मैचों के लिए लगेगा बैन?
इस कोड के तहत दी जाने वाली सजाएं काफी सख्त होती हैं और हर बार नियम तोड़ने पर ये और भी बढ़ जाती हैं. पहली बार नियम तोड़ने पर चार से आठ मैचों तक का बैन लग सकता है, जबकि दूसरी बार नियम तोड़ने पर आठ मैचों से लेकर आजीवन प्रतिबंध तक की सज़ा हो सकती है. तीसरी या उसके बाद की किसी भी गलती के लिए सज़ा एक साल के निलंबन से लेकर लीग से हमेशा के लिए बैन किए जाने तक हो सकती है.