Manchester Super Giants Prize Money: द हंड्रेड के फाइनल में मैनचेस्टर सुपर जायंट्स ने ट्रेंट रॉकेट्स को 5 विकेट से हराकर पहली बार खिताब जीत लिया. चैंपियन टीम को पुरस्कार राशि के तौर पर 1.5 लाख पाउंड यानी करीब 2 करोड़ रुपये मिले, जबकि उपविजेता ट्रेंट रॉकेट्स को 75 हजार पाउंड यानी लगभग 98 लाख रुपये मिले. फाइनल में ट्रेंट रॉकेट्स ने 158 रन बनाए और मैनचेस्टर सुपर जायंट्स ने 2 गेंद बाकी रहते लक्ष्य हासिल कर लिया.
द हंड्रेड में पहली बार चैंपियन बनी मैनचेस्टर सुपर जायंट्स
Manchester Super Giants Prize Money: द हंड्रेड के रोमांचक फाइनल में मैनचेस्टर सुपर जायंट्स ने ट्रेंट रॉकेट्स को 5 विकेट से हराकर पहली बार खिताब अपने नाम कर लिया. मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, जिसमें ट्रेंट रॉकेट्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 100 गेंदों में 158 रन का स्कोर खड़ा किया. लक्ष्य का पीछा करने उतरी मैनचेस्टर सुपर जायंट्स ने आखिरी ओवरों में शानदार बल्लेबाजी करते हुए मैच अपने नाम कर लिया. टीम ने निर्धारित लक्ष्य को 2 गेंद बाकी रहते हासिल किया और पहली बार द हंड्रेड की ट्रॉफी पर कब्जा जमाया. हालांकि, इस बड़ी खिताबी जीत के बाद चैंपियन टीम को मिलने वाली पुरस्कार राशि जानकर शायद आपको हैरानी हो सकती है.
द हंड्रेड में दुनिया के कई बड़े और स्टार क्रिकेटर हिस्सा लेते हैं. लीग की लोकप्रियता और खिलाड़ियों के स्तर को देखते हुए आमतौर पर उम्मीद की जाती है कि विजेता टीम को पुरस्कार के तौर पर बड़ी रकम मिलेगी. लेकिन द हंड्रेड के फाइनल में चैंपियन बनने वाली मैनचेस्टर सुपर जायंट्स को प्राइज मनी के रूप में सिर्फ 1.5 लाख पाउंड मिले हैं. भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये के आसपास बैठती है. यानी दुनिया भर के स्टार खिलाड़ियों से सजी इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में चैंपियन बनने के बावजूद टीम को पुरस्कार राशि के तौर पर करीब 2 करोड़ रुपये ही मिले. क्रिकेट की दूसरी बड़ी टी20 लीगों की तुलना में यह रकम काफी कम नजर आती है, यही वजह है कि द हंड्रेड की प्राइज मनी चर्चा का विषय बनी हुई है.
ट्रेंट रॉकेट्स भले ही फाइनल में खिताब अपने नाम नहीं कर सकी, लेकिन उपविजेता टीम को भी पुरस्कार राशि मिली. फाइनल में हारने वाली ट्रेंट रॉकेट्स को 75 हजार पाउंड मिले, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 98 लाख रुपये के बराबर हैं. इस तरह विजेता और उपविजेता के बीच पुरस्कार राशि में अंतर बहुत ज्यादा नहीं है. मैनचेस्टर सुपर जायंट्स को जहां करीब 2 करोड़ रुपये मिले, वहीं ट्रेंट रॉकेट्स के खाते में लगभग 98 लाख रुपये आए.
फाइनल मुकाबले की बात करें तो ट्रेंट रॉकेट्स ने टॉस के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए 100 गेंदों में 158 रन बनाए. टीम की ओर से टिम साइफर्ट ने शानदार बल्लेबाजी की और सबसे ज्यादा 72 रन की पारी खेली. उनकी पारी की बदौलत ट्रेंट रॉकेट्स एक चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचने में सफल रही. मैनचेस्टर सुपर जायंट्स के सामने 159 रन का लक्ष्य था. फाइनल जैसे दबाव वाले मुकाबले में इस स्कोर का पीछा करना आसान नहीं था, लेकिन टीम ने शुरुआत से ही लक्ष्य का पीछा करने की कोशिश जारी रखी. मुकाबला आखिरी गेंदों तक रोमांचक बना रहा और अंत में मैनचेस्टर सुपर जायंट्स ने 2 गेंद बाकी रहते 5 विकेट से जीत दर्ज कर ली.
मैनचेस्टर सुपर जायंट्स की जीत में बल्लेबाजों ने अहम भूमिका निभाई, लेकिन मैच को निर्णायक अंदाज में खत्म करने का काम लियाम डॉसन ने किया. लक्ष्य के करीब पहुंचने के बाद जब मुकाबला बेहद रोमांचक स्थिति में था, तब डॉसन ने छक्का लगाकर अपनी टीम को जीत दिला दी. इस छक्के के साथ ही मैनचेस्टर सुपर जायंट्स ने पहली बार द हंड्रेड का खिताब अपने नाम किया. टीम के लिए यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि उसने फाइनल जैसे बड़े मंच पर दबाव के बीच लक्ष्य का सफलतापूर्वक पीछा किया.
ट्रेंट रॉकेट्स भले ही फाइनल जीतने में नाकाम रही, लेकिन उसके स्टार बल्लेबाज टिम साइफर्ट का पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन देखने को मिला. उनके लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें द हंड्रेड का प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया. साइफर्ट ने टूर्नामेंट में 10 मुकाबले खेले और 49.25 की औसत से कुल 394 रन बनाए. इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट करीब 170 का रहा. यानी उन्होंने न सिर्फ लगातार रन बनाए, बल्कि बेहद तेज गति से बल्लेबाजी करते हुए अपनी टीम के लिए महत्वपूर्ण योगदान भी दिया.
द हंड्रेड में दुनिया के कई नामी क्रिकेटर खेलते हैं और मुकाबलों में बड़ी संख्या में दर्शकों की दिलचस्पी रहती है. ऐसे में विजेता को मिलने वाली महज 1.5 लाख पाउंड की पुरस्कार राशि कई क्रिकेट प्रशंसकों को चौंका सकती है. एक तरफ मैनचेस्टर सुपर जायंट्स ने इतिहास रचते हुए पहली बार खिताब जीता, वहीं दूसरी तरफ पुरस्कार राशि के आंकड़े ने इस प्रतियोगिता की तुलना दुनिया की दूसरी बड़ी क्रिकेट लीगों से शुरू कर दी है. फाइनल की जीत टीम के लिए निश्चित तौर पर ऐतिहासिक रही, लेकिन प्राइज मनी के मामले में यह खिताबी जीत उतनी बड़ी नहीं दिखती, जितनी इसकी क्रिकेटिंग उपलब्धि है.
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