बिसरख थाना पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो पूर्व सैनिकों की सुविधा के लिए बने ECHS (एक्स-सर्विमेन कॉन्ट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम) कार्ड का फर्जीवाड़ा कर लोगों का इलाज करा रहा था. पुलिस ने इस मामले में एक महिला समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से फर्जी कार्ड और मोबाइल फोन बरामद हुए हैं. सरकारी सुविधाओं और पूर्व सैनिकों के सम्मान से जुड़ी योजनाओं में सेंधमारी करने वाले एक शातिर गिरोह को बिसरख थाना पुलिस ने दबोच लिया है. यह गैंग फर्जी तरीके से ECHS कार्ड का इस्तेमाल कर अस्पतालों में इलाज कराने का काला कारोबार चला रहा था. पुलिस ने इस कार्रवाई में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक महिला भी शामिल है.
ऐसे खुला फर्जीवाड़े का खेल
डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि यह गिरोह बेहद शातिर था. ये लोग उन मरीजों को निशाना बनाते थे जो अस्पताल के भारी-भरकम बिल से परेशान होते थे. गिरोह के सदस्य अस्पताल के बिल से काफी कम पैसे लेकर फर्जी ECHS कार्ड के जरिए उनका इलाज सेटल करा देते थे. इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ जब एक असली ECHS कार्ड धारक ने अपने कार्ड के गलत इस्तेमाल की शिकायत पुलिस से की. हैरानी की बात यह है कि पुलिस की गिरफ्त में आए ये जालसाज पहले भी इसी तरह के फर्जीवाड़े के मामले में जेल की हवा खा चुके हैं. जेल से बाहर आने के बाद इन्होंने दोबारा वही रास्ता चुन लिया. हालांकि, पुलिस की सक्रियता से यह गैंग फिर से सलाखों के पीछे पहुँच गया है, लेकिन गिरोह का मुख्य आरोपी अभी भी फरार बताया जा रहा है जिसकी तलाश जारी है.
कैसे जुटाते थे डेटा?
शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पूर्व आर्मी कर्मचारियों से उनके ECHS कार्ड की डिटेल्स इकट्ठा करता था. इसके बाद उन जानकारियों का इस्तेमाल फर्जी कार्ड बनाने में किया जाता था. पुलिस इस मामले में केवल बाहरी लोगों तक ही सीमित नहीं है. इस बात की भी गहनता से जांच की जा रही है कि क्या अस्पताल के कुछ कर्मचारियों की इस गिरोह के साथ मिलीभगत थी. बिना अस्पताल के अंदरूनी सहयोग के इतने बड़े पैमाने पर फर्जी कार्ड से एंट्री मिलना मुश्किल है, इसलिए पुलिस संदिग्ध कर्मचारियों की भूमिका को भी खंगाल रही है.