PNB scam: ग्रेटर नोएडा के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की पाई शाखा में खाताधारकों की जमा पूंजी में कथित हेराफेरी के मामले में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की है. जांच एजेंसी ने बैंक में तैनात महिला कार्यालय सहायक दीपांशी और उसके कथित निजी सहयोगी आशुतोष कुमार पाठक को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि दोनों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर ग्राहकों के खातों से बिना अनुमति करोड़ों रुपये निकाले और दूसरी जगह ट्रांसफर किए. सीबीआई के मुताबिक, इस मामले में 10.24 करोड़ रुपये के अनधिकृत लेनदेन की जांच की जा रही है. निजी सहयोगी को महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार किया गया है.
बैंककर्मी और निजी सहयोगी पर मिलीभगत का आरोप
सीबीआई की 3 नवंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, पंजाब नेशनल बैंक की ग्रेटर नोएडा स्थित पाई शाखा में खाताधारकों के अलग-अलग खातों से अनधिकृत तरीके से 10.24 करोड़ रुपये निकाले गए थे. आरोप है कि शाखा में कार्यालय सहायक के पद पर तैनात दीपांशी ने एक निजी व्यक्ति और अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर इस कथित हेराफेरी को अंजाम दिया. जांच एजेंसी का कहना है कि ग्राहकों के खातों से बिना अधिकृत अनुमति के डेबिट ट्रांजेक्शन किए गए और रकम को दूसरे खातों में स्थानांतरित किया गया. इसी मामले में सीबीआई ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है. फिलहाल उनसे पूछताछ कर कथित लेनदेन और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाया जा रहा है.
पुणे से पकड़ा गया निजी सहयोगी, ट्रांजिट रिमांड पर लिया
मामले में गिरफ्तार निजी व्यक्ति आशुतोष कुमार पाठक को सीबीआई ने महाराष्ट्र के पुणे से पकड़ा. इसके बाद उसे वहां की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से जांच एजेंसी ने उसका ट्रांजिट रिमांड हासिल किया. अब उसे आगे की पूछताछ के लिए लाया गया है. सीबीआई दोनों आरोपियों से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि खातों से रकम निकालने के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल किया गया और पैसा कहां-कहां भेजा गया.
तीन साल तक खातों से रकम निकलने का आरोप
इस मामले में खाताधारकों की शिकायतें भी सामने आई थीं. ग्राहकों का आरोप था कि उनके बचत खातों और सावधि जमा यानी एफडी से बिना जानकारी और अनुमति के पैसे निकाल लिए गए. कुछ खाताधारकों ने यह भी शिकायत की थी कि उनके बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी तक बदल दिए गए थे. इससे लेनदेन से संबंधित अलर्ट उन तक नहीं पहुंच पाए. शिकायतकर्ताओं का दावा है कि खातों में यह गड़बड़ी करीब तीन साल तक चलती रही. शुरुआती शिकायतों में कथित हेराफेरी की रकम 35 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी. हालांकि, सीबीआई की ओर से दर्ज मामले में फिलहाल 10.24 करोड़ रुपये के अनधिकृत लेनदेन का उल्लेख है. दोनों आंकड़ों में अंतर को देखते हुए जांच में कुल वित्तीय नुकसान का दायरा स्पष्ट होना बाकी है.
खाताधारकों को पैसे लौटाने की प्रक्रिया जारी
मामला सामने आने के बाद प्रभावित ग्राहकों ने बैंक से अपनी जमा रकम वापस दिलाने की मांग की थी. बैंक प्रबंधन की ओर से भी प्रभावित खाताधारकों को रकम लौटाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है. अब सीबीआई की जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि कथित हेराफेरी में और कौन-कौन शामिल था, कितने खातों को निशाना बनाया गया और ग्राहकों की रकम किन खातों में स्थानांतरित की गई.