Hazaribagh Treasury Scam: झारखंड के हजारीबाग इलाके से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सरकारी सुरक्षा और ऑडिट व्यवस्था की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। किसी फिल्मी थ्रिल्स की तरह 8 साल हुई सरकारी खजाने की चोरी और करोड़पति बने सिपाही की कहानी ने पुलिस के होश उडा दिए हैं.
मामले की शुरुआत जांच में सामने आ चुका है कि कैसे साधारण सिपाही शंभू कुमार ने सिस्टम की नाक के नीचे 28 करोड़ रुपये का ‘ट्रेजरी घोटाला’ कर दिया. लेकिन सोचने की बात तो यह है कि सरकारी तिजोरी से करोड़ों गायब होते रहे और 8 साल तक सिस्टम को भनक तक नहीं लगी. जानें क्या है ये पूरा मामला-
कैसे बनाया 28 करोड़ की चोरी का मास्टरप्लान?
हजारीबाग ट्रेजरी घोटाले के आरोपी और पुलिस विभाग के अकाउंट सेक्शन में तैनात सिपाही शंभू कुमार ने साल 2016 से कागजों और ट्रांजैक्शन को लेकर 28 करोड़ की हेरफेर की.
इस पैसे को अपने नेटवर्क के जरिए फर्जी खातों में भेजता रहा. इस मामले की जांच के बाद करीबन 21 संदिग्ध खाते फ्रीज कर दिए गए हैं, जिनमें कुल 1.60 करोड़ रुपये पाए गए हैं.
सिपाही की सैलरी में कैसे बना महल?
सोचने की बात तो यह है कि पुलिस में सिपाही के पद पर तैनात शंभू कुमार ने चोरी के 8 साल के अंदर ही आलीशान महल कैसे खड़ा कर दिया. प्रशासन को जब खबर लगी तो शुक्रवार को हजारीबाग के भवानी चौक (दुपुगढ़ा) स्थित शंभू कुमार के इस घर को भी सील कर दिया। साथ में, सिपाही शंभू कुमार और उनकी पत्नि को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
अब CID खोलेगी भ्रष्टाचार की परतें
प्रशासन की ओर से की गई जांच के बाद अब सीआईडी ने हजारीबाग घोटाले की कमान संभाल ली है. उम्मीद की जा रही है कि CID उन चेहरों को भी बेनकाब करेगी जो जो सिस्टम में रहते हुए शंभू कुमार की महा-लूट का सपोर्ट कर रहे थे और करोड़ों की चोरी के मास्टर प्लान में भी शामिल थे.
रिपोर्ट: मनीष मेहता, रांची।