Jharkhand Murder Case: झारखंड के गढ़वा जिला के गढ़वा के बरडीहा थाना क्षेत्र के ओबरा गांव में तीन साल के मासूम अनुराग उरांव का अपहरण और फिर उसकी बेरहमी से हत्या से गांव में सनसनी फैल गई थी. पुलिस अब इस जांच को अंधविश्वास के एंगल से फोकस कर रही है. डॉग स्क्वायड की मदद से पुलिस ने वार्ड नंबर आठ के सदस्य ललन उरांव को हिरासत में लिया है. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें पूरा मामला.
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, जैनेंद्र उरांव का बेटा अनुराग सोमवार शाम करीब 4 बजे अपनी दुकान के पास से लापता हो गया था. बाद में उसकी लाश घर के पीछे अरहर के खेत में बोरे में बंद मिली. इस घटना के बाद पूरा गांव शोक में है. पुलिस जांच कर रही है, और शक के आधार पर वार्ड मेंबर से पूछताछ की जा रही है. अगर आरोप कन्फर्म हो जाते हैं, तो यह बहुत चिंता की बात होगी कि समाज में ज़िम्मेदार पदों पर बैठे लोग ऐसे जघन्य अपराधों में शामिल पाए जा रहे हैं.
काले जादू और आपसी रंजिश का मामला
शुरुआती पुलिस जांच और गांव के सूत्रों के मुताबिक, घटना का संबंध काला जादू और आपसी रंजिश से हो सकता है. मंगलवार को जब बच्चे का शव बोरे में मिला, तो थाना प्रभारी ऋषिकेश कुमार सिंह ने गढ़वा से डॉग स्क्वायड टीम को बुलाया. जांच के दौरान जब खोजी कुत्ते ने शव मिले बोरे को सूंघा, तो वह सीधे वार्ड सदस्य ललन उरांव के घर पहुंचा. कुत्ता ललन के गेट से होते हुए उस खाट पर जाकर बैठ गया, जिस पर वह सो रहा था.
अहम सुराग के आधार पर ललन उरांव को हिरासत में लिया गया
पुलिस इंस्पेक्टर बृज कुमार ने बताया कि इस अहम सुराग के आधार पर ललन उरांव को हिरासत में लिया गया है और उससे गहन पूछताछ की जा रही है. उन्होंने कहा कि गांव वालों को शक है कि हत्या अंधविश्वास के कारण हुई है, और पुलिस इसी पॉइंट पर जांच कर रही है. गांववालों का कहना है कि ललन उरांव की पत्नी की करीब तीन महीने पहले किसी अनजान बीमारी से मौत हो गई थी. ओबरा गांव आदिवासी बहुल इलाका है, जहां आज भी अंधविश्वास बहुत फैला हुआ है. शक है कि ललन ने अपनी पत्नी की मौत के लिए अनुराग के परिवार को जिम्मेदार ठहराया और उन पर काला जादू करने का शक जताया.
अंधविश्वास के चलते पहले भी हुई कई हत्याएं
गांव में पहले भी अंधविश्वास के चलते हत्याएं हो चुकी हैं. ओबरा गांव में अंधविश्वास के चलते हत्या का यह पहला मामला नहीं है. सालों पहले इसी गांव में अंधविश्वास के चलते एक दंपत्ति की भी हत्या कर दी गई थी. सरकार और प्रशासन के जागरूकता अभियान के बावजूद, कुछ गांववाले आज भी साइंटिफिक सोच के बजाय जादू-टोने पर यकीन करते हैं. इस बार, एक तीन साल का बच्चा इस बुरी प्रथा का शिकार हो गया.