Panduranga Swamy temple Anantapur: शराब की लत सिर्फ पीने वाले व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार को परेशान कर देती है. यह आदत धीरे-धीरे सेहत, पैसे और रिश्तों-तीनों पर बुरा असर डालती है. कई लोग इस लत से छुटकारा पाने के लिए नशामुक्ति केंद्रों का सहारा लेते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें सफलता नहीं मिल पाती. ऐसे में आंध्र प्रदेश का एक मंदिर इन दिनों चर्चा में है, जहां लोगों का दावा है कि यहां की एक खास परंपरा अपनाने से शराब की आदत छोड़ना आसान हो जाता है.
आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित एक मंदिर धीरे-धीरे आध्यात्मिक नशामुक्ति केंद्र के रूप में पहचान बना रहा है. यहां आने वाले लोग भगवान के सामने संकल्प लेते हैं और तुलसी की माला धारण करते हैं. स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस माला को पहनने के बाद व्यक्ति धीरे-धीरे शराब से दूरी बना लेता है.इस मंदिर से जुड़ी मान्यताएं काफी दिलचस्प मानी जाती हैं. स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का विश्वास है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से यहां भगवान के दर्शन करता है और प्रार्थना करता है, उसकी शराब पीने की आदत धीरे-धीरे खत्म हो जाती है.
आंध्र प्रदेश का यह मंदिर क्यों हो रहा है मशहूर?
अनंतपुर जिले के बोम्मनहाल मंडल के उन्थाकल्लू गांव में साल 2005 में ‘पांडुरंगा स्वामी मंदिर’ का निर्माण किया गया था. समय के साथ-साथ इस जगह की एक खास मान्यता लोगों के बीच फैलने लगी. कहा जाता है कि जो व्यक्ति यहां आकर श्रद्धा से तुलसी की माला धारण करता है, उसकी शराब पीने की आदत धीरे-धीरे खत्म हो जाती है.हर एकादशी के दिन शराब की लत से परेशान लगभग दो हजार लोग इस दिन मंदिर में आकर भगवान के सामने माला धारण करते हैं और दीक्षा लेते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि माला पहनने के बाद लोगों के मन में यह भावना रहती है कि अगर वे दोबारा शराब को छुएंगे तो यह भगवान के प्रति किए गए वचन को तोड़ने जैसा होगा. यही सोच उन्हें नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करती है.
41 दिनों तक निभाने पड़ते हैं खास नियम
माला धारण करने के बाद व्यक्ति को 41 दिनों की विशेष दीक्षा का पालन करना होता है. इस अवधि में जीवनशैली को पूरी तरह बदलने वाले कुछ नियम अपनाने पड़ते हैं.
- रोज सुबह जल्दी उठकर स्नान करना
- नियमित रूप से पूजा, भजन और प्रार्थना करना
- सात्विक और सादा भोजन करना
- जमीन पर सोना
- नशे और गलत आदतों से पूरी तरह दूरी बनाए रखना
जो लोग इस दीक्षा का पालन करते हैं, उनका कहना है कि इन 41 दिनों में धीरे-धीरे शराब पीने की इच्छा कम होने लगती है. अनुशासित दिनचर्या और आध्यात्मिक माहौल मन को मजबूत बनाते हैं, जिससे व्यक्ति खुद को नशे से दूर रखने में सफल हो पाता है.
मंदिर बनता जा रहा है आध्यात्मिक नशामुक्ति केंद्र
स्थानीय लोगों के अनुसार, कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जिनमें लोगों ने 41 दिन की दीक्षा पूरी करने के बाद भी शराब से दूरी बनाए रखी. इससे भक्तों का विश्वास और भी मजबूत होता जा रहा है.धीरे-धीरे यह छोटा सा गांव और यहां स्थित ‘पांडुरंगा स्वामी मंदिर’ एक आध्यात्मिक नशामुक्ति केंद्र के रूप में जाना जाने लगा है. श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां की आस्था, अनुशासन और संकल्प ही लोगों को शराब जैसी बुरी आदत से बाहर निकलने की ताकत देते हैं.