Basant Panchami Vrat Katha In Hindi: सरस्वती देवी को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से उनकी पूजा की जाती है. सरस्वती देवी को संगीत की देवी भी कहा जाता है. वसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं. पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने सरस्वती से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पंचमी के दिन तुम्हारी पूजा की जाएगी. इस वजह से वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी माता सरस्वती की पूजा की जाती है. वसंत को ऋतुओं का राजा भी कहा जाता है.
पुराणों में कथा का वर्णन
पौराणिक कथा के मुताबिक, जब सृष्टि का विस्तार हो रहा था, तब भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्माजी ने मनुष्य योनि की रचना की. लेकिन, वह अपनी सर्जना से खुश नहीं थे. ब्रम्हा जी को सृष्टि की रचना में कुछ कमी दिखाई दी. इसके बाद उन्होंने विष्णु जी की आज्ञा से अपने कमंडल का जल पृथ्वी पर छिड़का. इससे धरती पर कंपन होने लगा और एक अद्भुत शक्ति के रूप में चतुर्भुजी सुंदर स्त्री प्रकट हुई.
वे और कोई नहीं बल्कि देवी मां सरस्वती थीं. सरस्वती के चार हाथ थे, जिसमें वीणा, माला, पुस्तक और चौथे हाथ में वर मुद्रा थी. ब्रह्माजी ने उन्हें ज्ञान की देवी के रूप में पूजा और उन्हें वाणी, विद्या और कला की देवी के रूप में पूजा. ऐसा कहा जाता है कि जब सरस्वती देवी को प्रकट किया गया तब वसंत ऋतु का आगमन हुआ. इसलिए बसंत पंचमी को देवी सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में भी मनाया जाता है. इस दिन को श्री पंचमी, शुक्ल पंचमी, वसंत पंचमी भी कहा जाता है.
विभिन्न इलाकों में वसंत उत्सव
इस दिन को सिर्फ सरस्वती पूजन दिवस के तौर पर ही नहीं मनाया जाता है. भारत के विभिन्न राज्यों में वसंत पंचमी का त्योहार कई तरीकों से सेलिब्रेट किया जाता है. पंजाब में वसंत ऋतु को पतंग उत्सव के तौर पर मनाते हैं. इस दिन लोग पीले कपड़े पहनते हैं और पीले चावल बना कर खाते हैं. पीला रंग ज्ञान का प्रतीक होता है. सिख पुरुष पीली पगड़ियां पहनते हैं. इसके अलावा महाराष्ट्र में शादी के बाद पहली वसंत पंचमी पर शादीशुदा जोड़े पीले कपड़े धारण कर मंदिरों में जाते हैं. राजस्थान में इस दिन चमेली के फूलों की मालाएं पहनने का रिवाज है. वसंत पंचमी के दिन ही बिहार में सूर्य देवता की प्राचीन मूर्ति की स्थापना हुई थी, जिसे स्नान कराकर सजाया जाता है और उत्सव मनाया जाता है.
मुस्लिम समुदाय का क्या महत्व है?
मुस्लिम समाज के सूफ़ी संतों के लिए भी वसंत पंचमी काफी अहम है. जानकारी के तौर पर कुछ सूफ़ी मान्यताओं के मुताबिक, तेरहवीं सदी में दिल्ली के महान सूफ़ी कवि अमीर ख़ुसरो ने हिंदू महिलाओं को वसंत पंचमी पर पीले फूल ले जाते हुए देखा. फिर उन्होंने इस प्रथा को अन्य सूफ़ी संतों में फैलाया था. इसका पालन आज तक भी चिश्ती वंश के मुस्लिम सूफ़ी संतों द्वारा किया जाता है. वसंत पंचमी के दिन ही कुछ मुस्लिम सूफ़ी लोग दिल्ली की मशहूर निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर सजदा करने जाते हैं. इस तरह वसंत पंचमी का पर्व पूरे भारत में अपने-अपने तरीके से मनाते हैं.
बन रहा सर्वार्थ सिध्दि योग
वसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी. इस दिन शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि गुरु बृहस्पति और शुक्र देव की अनुकूल स्थिति और गुरु-चन्द्र योग विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं. सर्वार्थ सिध्दि योग बहुत ही अच्छा माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं की मानें तो इन ग्रह योगों के कारण विद्या की प्राप्ति, मानसिक शांति और पारिवारिक सौहार्द में बढ़ोत्तरी होती है. इस वर्ष वसंत पंचमी पर बुधादित्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है. सूर्य देव और बुध देव की युति से बनने वाला बुधादित्य योग करियर, शिक्षा और व्यापार में उन्नति देने वाला माना जाता है. वहीं कहा जाता है कि कोई भी काम सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू किया जाए तो यह सफल होने के लिए सबसे अच्छी संभावना मानी जाती है. ये योग इस दिन को आध्यात्मिक और भौतिक दृष्टि से भी अच्छे फलदायी बना रहे हैं.
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं. यह विभिन्न स्त्रोतो से ली गई है. विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.)