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आसमान में खून जैसा लाल चांद क्यों चमकता है? जानिए ब्लड मून चंद्र ग्रहण का पूरा वैज्ञानिक सच और इसके प्रकार

When is the Blood Moon in 2026:आसमान में जब चांद अचानक लाल या सुर्ख भूरा दिखाई देने लगता है, तो उसे आम भाषा में 'ब्लड मून'  कहा जाता है. यह कोई रहस्यमय या अलौकिक घटना नहीं, बल्कि एक पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान होती है.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: February 25, 2026 17:20:52 IST

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What is Lunar Eclipse: ब्लड मून उस स्थिति को कहते हैं जब पूर्ण चंद्र ग्रहण के समय चांद लालिमा लिए नजर आता है. ऐसा तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया पूरी तरह चंद्रमा को ढक लेती है.

सूर्य की रोशनी जब पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरती है, तो नीली और बैंगनी जैसी छोटी तरंगदैर्ध्य वाली रोशनी बिखर जाती है. वहीं लाल और नारंगी रंग की लंबी तरंगदैर्ध्य वाली रोशनी कम बिखरती है और मुड़कर चंद्रमा तक पहुंचती है. यही कारण है कि चंद्रमा लाल या तांबे जैसा दिखाई देता है.हालांकि यह दृश्य बेहद आकर्षक होता है, लेकिन खगोल विज्ञान के लिहाज से इसका कोई विशेष महत्व नहीं है.

 2026 में ब्लड मून कब दिखेगा?

2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को पूर्ण चंद्र ग्रहण या ब्लड मून होगा. दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को होगा.

 चंद्र ग्रहण क्या होता है?

चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और अपनी छाया चंद्रमा पर डालती है. यह घटना केवल पूर्णिमा के दिन ही संभव है.लेकिन हर पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण नहीं होता. इसका कारण यह है कि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा से लगभग 5 डिग्री झुकी हुई है. ज्यादातर समय चंद्रमा पृथ्वी की छाया के ऊपर या नीचे से निकल जाता है. ग्रहण तभी लगता है जब तीनों पिंड बिल्कुल सीध में आ जाएं.

 चंद्र ग्रहण के प्रकार

1. आंशिक चंद्र ग्रहण
इसमें चंद्रमा का केवल कुछ हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया (अम्ब्रा) में जाता है. चंद्रमा पर हल्का अंधेरा या काटे जैसा निशान दिखाई देता है.

2. उपछाया (पेनुम्ब्रल) चंद्र ग्रहण
इस स्थिति में चंद्रमा पृथ्वी की हल्की बाहरी छाया से गुजरता है. इसमें बदलाव बहुत हल्का होता है और सामान्य आंख से पहचानना मुश्किल होता है.

3. पूर्ण चंद्र ग्रहण (ब्लड मून)
यह सबसे दुर्लभ और प्रभावशाली रूप है. इसमें चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया में आ जाता है और लाल रंग का दिखाई देता है.

चांद लाल क्यों हो जाता है?

पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान लाल रंग दिखने की वजह ‘रेले प्रकीर्णन’ (Rayleigh Scattering) है. जब सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरती है, तो छोटी तरंगों वाली नीली रोशनी ज्यादा बिखर जाती है, जबकि लाल रंग की रोशनी मुड़कर चंद्रमा तक पहुंचती है.

लाल रंग की रोशनी कई बातों पर निर्भर करती है

प्रदूषण: ज्यादा धूल या ज्वालामुखीय राख हो तो चांद और गहरा लाल दिख सकता है.
बादल: बादलों की स्थिति भी चमक को प्रभावित कर सकती है.

साल में कितनी बार होता है चंद्र ग्रहण?

आमतौर पर साल में 2 से 4 बार चंद्र ग्रहण हो सकता है, लेकिन हर ग्रहण दुनिया के हर हिस्से से दिखाई नहीं देता. यह इस पर निर्भर करता है कि उस समय पृथ्वी का कौन-सा भाग चंद्रमा की ओर है.

 क्या सिर्फ पृथ्वी पर ही नियमित चंद्र ग्रहण होते हैं?

हमारे सौर मंडल में कई ग्रहों के चंद्रमा हैं, लेकिन पृथ्वी का चंद्रमा नियमित रूप से चंद्र ग्रहण का अनुभव करता है क्योंकि पृथ्वी की छाया इतनी बड़ी है कि वह चंद्रमा को पूरी तरह ढक सकती है.हालांकि वैज्ञानिकों के अनुसार चंद्रमा हर साल लगभग 4 सेंटीमीटर पृथ्वी से दूर जा रहा है. बहुत दूर भविष्य में ऐसा समय आ सकता है जब पूर्ण चंद्र ग्रहण संभव न रहे.

Disclaimer : प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. INDIA News इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: February 25, 2026 17:20:52 IST

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