Braj Holi 2026 Celebration Important Dates: ब्रज की होली भारत ही नहीं विदेशों में मशहूर है. बरसाना, नंदगांव, वृंदावन, मथुरा और गोकुल जैसे स्थानों पर यह उत्सव अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है. 40 दिनों तक तक चलने वाला उत्सव केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति, और उल्लास का संगम माना जाता है. यहां कई तरह की होली खेली जाती है, जैसे लड्डू गोपाल संग होली, लठमार होली, फूलों की होली, हुरंगा और धुलेंडी. अगर आप भी इस साल होली ब्रज में मनाना चाहते हैं, तो पहले यहां जान लें ब्रज की होली की पूरी डेट लिस्ट और मुख्य आयोजनों की जानकारी.
लड्डू होली और राधा सखी का नंदगांव निमंत्रण
24 फरवरी से ब्रज की होली की शुरु हो चुकी है, राधा सखी नंदगांव जाकर श्रीकृष्ण को होली खेलने का निमंत्रण दे चुकी हैं. ऐसे में शाम को बरसाना में लाडली जी ने मंदिर में विश्व प्रसिद्ध लड्डू होली हो खेली है. यह होली पूरी तरह प्राकृतिक रंगों से खेली गई और दूर दूर से हजारों की संख्या में भक्त मौजुद हुए.
लठामार होली का उत्साह
आज 25 फरवरी को बरसाना में लठामार होली का आयोजन हुआ है. बरसाना की हुरियारिनें नंदगांव से आए हुरियारों पर प्रेम भरी लाठियों की बरसात की है. मीडिया रिपोर्ट की माने तो रंगीली गली में यह उत्सव देखने के लिए करीब 10 से 15 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे. वहीं अब कल 26 फरवरी को नंदगांव और रावल में लठामार होली खेल का आयोजन किया जाएगा, इस मौके पर नंदगांव में गोपियां लाठियों से हुरियारों को रंग से रंगेंगी . इस दौरान प्रेम और मस्ती का बड़ा संगम देखने को मिलेगा
वृंदावन और मथुरा में इस दिन होगा होली के मुख्य आयोजन
श्रीकृष्ण के जन्मस्थान मथुरा में 27 फरवरी को होली खेली जाएगी, वहीं 1 मार्च के दिन गोकुल में छड़ी मार होली होगी. इसके बाद 3 मार्च को चतुर्वेदी समाज का होली डोला निकला जाएगा और 4 मार्च को पूरे देशभर में धुलेंडी मनाई जाएगी. इसके अगले दिन यानी 5 मार्च को दाऊजी महाराज का हुरंगा, जाव का हुरंगा, नंदगांव का हुरंगा और मुखराई में चरकुला नृत्य का बड़ा भव्य आयोजन किया जाएगा. फिर 6 मार्च को बठैन और गिडोह में हुरंगा होगा और 9 मार्च को महावन में छड़ी मार होली और 12 मार्च को वृंदावन के श्री रंगजी मंदिर में होली का आयोजन किया जाएगा.
- 24 फरवरी – बरसाना में लड्डू होली
- 25 फरवरी – लठमार होली बरसाना
- 26 फरवरी – लठामार होली नंदगांव और रावल
- 27 फरवरी – श्री कृष्ण जन्मस्थान मथुरा में होली
- 1 मार्च – छड़ी मार होली गोकुल
- 3 मार्च – चतुर्वेदी समाज का होली डोला
- 3 मार्च – होलिका दहन
- 4 मार्च – धुलेंडी
- 5 मार्च – दाऊजी महाराज का हुरंगा (बलदेव), नंदगांव का हुरंगा, जाव का हुरंगा, चरकुला नृत्य मुखराई
- 6 मार्च – बठैन और गिडोह का हुरंगा
- 9 मार्च – छड़ी मार होली महावन
- 12 मार्च – श्री रंगजी मंदिर वृंदावन में होली
अगर आप भी ब्रज की होली का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो आप इन तारीखों के अनुसार अपना टूर प्लान कर सकते हैं. रंगों की भक्ति और प्यार से खेली जा रही ब्रज की होली में शामिल हो सकते हैं.
क्या है ब्रज की होली की खास बात ?
ब्रज की होली की खास बात यह है कि यह होली का त्योहार पूरी तरह प्राकृतिक और हर्बल होती है, जिसमें टेसू के फूलों के रंग, गुलाब, चमेली, लिली, गेंदा, चंपा, डाहलिया, हिबिस्कस, सूरजमुखी और गुलमोहर की पंखुड़ियां का इस्तेमाल होता है। गुलाल और फूलों की वर्षा और प्रेम भरी फटकार को ब्रज की होली की जान माना जाता है. बरसाना, नंदगांव, गोकुल, रावल, और महावन में अलग-अलग तरह से यह उत्सव मनाया जाता है और इस ब्रज की होली को खास और यादगार बनाया जाता है. वहीं प्रशासन द्वारा साफ-सफाई, पार्किंग, यातायात और सुरक्षा के भी कड़ें इंतजाम किए जाते हैं, ताकि किसी को कोई नुकसान ना पहुचे और गलत हादसा न हो.
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