Chaiti Chhath 2026: छठ पूजा के नहाय-खाय के साथ चैती छठ महापर्व की शुरुआत हो गई है. बिहार की राजधानी पटाना के पटना सिटी के गंगा घाटों पर छठव्रती महिलाएं स्नान कर पूजा-अर्चना में मगन होती दिख रही हैं और घरों में पूजा सामग्री की तैयारी चल रही है. कल से छठ व्रती 36 घंटे का निर्जला उपवास रखेंगे. आस्था और परंपरा से जुड़े इस महापर्व का पौराणिक महत्व भी बेहद खास माना जाता है.
घरों से घाटों तक छठ पर्व की रौनक
लोक आस्था का महापर्व चैती छठ पूजा का नहाय खाय है. छठव्रती महिलाएं नहाय खाय को लेकर पटना सिटी के गंगा घाटो पर छठवर्ति स्नान कर पूजा करती नजर आ रही है. पूजा सामग्री बनाने के लिए पीतल के पात्र में गंगा जल भरा जा रहा है. कल से छठ व्रती 36 घण्टे का निर्जला उपवास रहकर छठ करेंगे.
भगवान सूर्य और छठ माता का विशेष संबंध
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत कल से हुई थी. सूर्य पुत्र कर्ण सूर्य की आराधना कर शक्ति शाली योद्धा बने थे. जब पाण्डव जुए में सारा राज पाठ हार गए थे तो द्रौपदी ने छठ पूजा किया था. जहां छठी मैया के पूजा से द्रौपदी की मनोकामना पूरी हुई और खोया हुआ राजपाठ पांडवों को वापस मिला. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान सूर्य और छठ माता दोनों भाई बहन है. इसलिए छठ पर्व में भगवान सूर्य की भी पूजा की जाती है.