Chaitra Navratri 2026 Day 7: शक्ति साधना का चैत्र नवरात्रि महापर्व इस बार 9 दिन का है. इस महापर्व का सातवां दिन दुर्गा के माता कालरात्रि स्वरूप की पूजा के लिए है. यानी 24 मार्च को भक्त मां कालरात्रि की पूजा करेंगे. धार्मिक मान्यता है कि, मां कालरात्रि का स्वरूप उनके नाम की तरह ही अत्यंत भयंकर और प्रभावशाली है. उनका रंग गहरा काला है, जो अज्ञान और भय का नाश करने का प्रतीक माना जाता है. मां के तीन नेत्र हैं, जो ब्रह्मांड की हर दिशा को देखने की शक्ति दर्शाते हैं. उनके चार हाथ हैं. दो हाथों में खड्ग और कांटा जबकि अन्य दो हाथों से वह भक्तों को वरदान देती हैं और अभय का आशीर्वाद प्रदान करती हैं. उनकी सवारी गधा है. मान्यता है कि रक्तबीज राक्षस के संहार के लिए मां ने यह उग्र रूप धारण किया था, जिससे संसार को भयमुक्त किया जा सके. अब सवाल है कि आखिर, चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा कैसे करें? कालरात्रि की पूजा में क्या-क्या सामग्री चाहिए? मां कालरात्रि की पूजा में किन मंत्रों का जप करना चाहिए? नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि को क्या भोग लगाएं? मां कालरात्रि की कथा क्या है? इस बारे में India News को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-
मां कालरात्रि का स्वरूप कैसा है?
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, मां कालरात्रि नवदुर्गा का सातवां स्वरूप हैं. मां कालरात्रि का स्वरूप नाम की तरह ही भयंकर और प्रभावशाली है. उनका रंग गहरा काला है, जो अज्ञान और भय का नाश करने का प्रतीक माना जाता है. मां के तीन नेत्र और चार हाथ हैं. दो हाथों में खड्ग और कांटा जबकि अन्य दो हाथों से वह भक्तों को वरदान देती हैं और अभय का आशीर्वाद प्रदान करती हैं. उनकी सवारी गधा है.
मां कालरात्रि की पूजा के लिए सामग्री
- मां कालरात्रि की मूर्ति या फोटो.
- चौकी के लिए लाल या काला कपड़ा.
- गंगाजल, रोली, सिंदूर, कुमकुम, अक्षत (साबुत चावल), चंदन.
- लाल गुड़हल के फूल या रातरानी के फूल.
- देसी घी या सरसों के तेल का दीपक, कपूर, अगरबत्ती, धूप.
- पान का पत्ता, सुपारी, लौंग, इलायची, नारियल, लाल चुनरी, शृंगार का सामान (काजल, कंघी, मेहंदी आदि).
- दुर्गा सप्तशती की पुस्तक, दुर्गा चालीसा.
मां कालरात्रि की पूजा करने की विधि
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि के पूजन के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें और साफ वस्त्र पहन लें. इसके बाद पूजा स्थान को साफ कर गंगाजल से शुद्ध करें. फिर देवी की प्रतिमा या चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं और रोली, अक्षत, फूल अर्पित करें. इसके बाद मां को गुड़हल या रातरानी के फूल चढ़ाएं. धूप और दीप से विधिपूर्वक पूजा करें. ध्यान रहे कि, मां कालरात्रि का गुड़ का भोग जरूर लगाएं, यह उनका प्रिय भोग माना जाता है. पूजा के अंत में कपूर या दीपक से मां की आरती करें और परिवार के साथ माता के जयकारे लगाएं.
मां कालरात्रि की पूजा के मंत्र
- ॐ कालरात्र्यै नम:..
- ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा..
- ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम:..
मां कालरात्रि का प्रिय भोग
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना का विशेष महत्व माना गया है. इस दिन देवी को गुड़ और उससे बने पकवान अर्पित किए जाते हैं, जो भक्तों के जीवन से दुख और बाधाओं को दूर करने का प्रतीक है. मान्यता है कि गुड़ का भोग लगाने से मां प्रसन्न होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. श्रद्धा और विधि-विधान से अर्पित किया गया यह भोग भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने में सहायक माना जाता है.
मां कालरात्रि की पूजा का महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के सातवें दिन मां कात्यायनी की पूजा को जीवन में विशेष फलदायी माना गया है. ऐसी मान्यता है कि जो लोग किसी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा, तंत्र-मंत्र या शत्रु बाधा से परेशान होते हैं, उन्हें इस दिन मां कालरात्रि की विशेष पूजा करनी चाहिए. सच्चे मन से की गई आराधना से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है.
मां कालरात्रि की व्रत कथा | Maa kalratri Vrat Katha
पौराणिक कथाओं के अनुसार, रक्तबीज नामक राक्षस ने देववा और मनुष्य सभी त्रस्त थे. रक्तबीज राक्षस की विशेषता यह थी कि जैसे ही उसके रक्त की बूंद धरती पर गिरती तो उसके जैसा एक और राक्षस पैदा हो जाता था. इस राक्षस से परेशान होकर समस्या का हल जानने सभी देवता भगवान शिव के पास पहुंचे. भगवान शिव को पता था कि इसका वध अंत में देव पार्वती ही करेंगी. भगवान शिव ने माता से अनुरोध किया. इसके बाद मां पार्वती ने स्वयं शक्ति व तेज से मां कालरात्रि को उत्पन्न किया. इसके बाद जब मां ने दैत्य रक्तबीज का अंत किया और उसके शरीर से निकलने वाले रक्त को मां कालरात्रि ने जमीन पर गिरने से पहले ही अपने मुख में भर लिया. इस रूप में मां पार्वती कालरात्रि कहलाईं.