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Aaj Kaun si Mata ka Din: दुर्गा अष्टमी पर होगी महागौरी की पूजा, जानें पूजन विधि, मुहूर्त, मंत्र और कथा

Chaitra Navratri 2026 Day 8: आज शक्ति साधना के नवरात्रि महापर्व की अष्टमी तिथि का दिन देवी दुर्गा के माता महागौरी स्वरूप की पूजा के लिए है. इस दिन देवी के साधक जप, व्रत आदि नियमों का पालन करते हुए मां महागौरी की विधि​-विधान से पूजा करते हैं. जानिए, चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा कैसे करें? महागौरी की पूजा में क्या-क्या सामग्री चाहिए? मां महागौरी की पूजा में किन मंत्रों का जप करना चाहिए? इस बारे में India News को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-

Chaitra Navratri 2026 Day 8: शक्ति साधना का चैत्र नवरात्रि महापर्व इस बार 9 दिन का है. इस महापर्व की अष्टमी तिथि दुर्गा के माता महागौरी स्वरूप की पूजा के लिए है. आज यानी 26 मार्च को भक्त मां महागौरी की पूजा करेंगे. धार्मिक मान्यता है कि, मां महागौरी का यह दिव्य स्वरूप अत्यंत ही तेजवान है. मान्यता है​ कि जो कोई साधक मां महागौरी की पूजा सच्चे मन से करता है, उस पर देवी प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाती हैं. शास्त्रों में मां भगवती के हर स्वरूप की पूजा की अलग-अलग विधि, मंत्र, आरती और कथा बताई जाती है. इसी तरह से मां महागौरी की पूजा करने की भी एक विधि है. अब सवाल है कि आखिर, चैत्र नवरात्रि की अष्टमी पर माता महागौरी की पूजा कैसे करें? महागौरी की पूजा में क्या-क्या सामग्री चाहिए? मां महागौरी की पूजा में किन मंत्रों का जप करना चाहिए? नवरात्रि की अष्टमी दिन मां महागौरी को क्या भोग लगाएं? दुर्गा अष्टमी 2025 पर पूजन का समय क्या है? मां महागौरी की कथा क्या है? इस बारे में India News को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री- 

मां महागौरी का स्वरूप कैसा है?

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, नवरात्रि की अष्टमी तिथि को मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा होती है. बता दें कि, मां महागौरी, नवरात्र के आठवें दिन पूजी जाने वाली मां दुर्गा की 8वीं शक्ति हैं, जो अपनी अत्यंत श्वेत (गौर) कांति, सौम्य स्वभाव और शांत स्वरूप के लिए जानी जाती हैं. उनका वर्ण शंख, चंद्र और कुंद के फूल के समान सफेद है. वे वृषभ (बैल) पर सवार हैं और शांत भाव से भक्तों को वरदान (वरद मुद्रा) देती हैं.

दुर्गा अष्टमी 2026 मुहूर्त

जो लोग इस बार 26 मार्च को दुर्गा अष्टमी का व्रत रखने वाले हैं, वे लोग पहले दुर्गा अष्टमी मुहूर्त के बारे में जान लें.
चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि का प्रारंभ: 25 मार्च, बुधवार, दोपहर 1:50 बजे
चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि का समापन: 26 मार्च, गुरुवार, दिन में 11:48 बजे
शुभ-उत्तम मुहूर्त: सुबह 06:18 बजे से 07:50 बजे तक
लाभ-उन्नति मुहूर्त: दोपहर 12:27 बजे से 01:59 बजे तक

दुर्गा अष्टमी 2026 शुभ योग

शोभन योग: प्रात:काल से लेकर देर रात 12:32 ए एम तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: 04:19 पी एम से 06:17 ए एम, मार्च 27
रवि योग: 04:19 पी एम से 06:17 ए एम, मार्च 27

मां महागौरी की पूजा के लिए सामग्री

  • मां महागौरी की प्रतिमा या तस्वीर
  • सफेद वस्त्र
  • चुनरी
  • गंगाजल
  • कलश
  • चंदन
  • रोली
  • कुमकुम
  • अक्षत
  • धूप
  • दीप
  • घी
  • कपूर
  • फल
  • फूल (सफेद फूल, चमेली, मोगरा)
  • नारियल
  • नारियल की मिठाई
  • सूजी का हलवा
  • पूरी
  • काले चने.

मां महागौरी की पूजा करने की विधि

नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी के पूजन के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें और साफ वस्त्र पहन लें. इसके बाद साधक को मां महागौरी के व्रत और पूजन का संकल्प करना चाहिए. फिर घर के ईशान कोण में देवी का चित्र या मूर्ति रखकर उसे पवित्र जल से स्नान कराना चाहिए. इसके बाद माता को सफेद पुष्प अर्पित करना चाहिए. फिर देवी को धूप-दीप, चंदल-रोली, फल-मिठाई आदि अर्पित करते हुए माता के मंत्र का जप और उनके स्तोत्र का पाठ करना चाहिए.

मां महागौरी की पूजा के मंत्र

– श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः.
– महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा.
– देवी सर्वभू‍तेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता.
– नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:.

महागौरी का स्तोत्र पाठ

सर्वसंकट हंत्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्.
ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥
 
सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदीयनीम्.
डमरूवाद्य प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥
 
त्रैलोक्यमंगल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्.
वददं चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥

मां महागौरी का प्रिय भोग

नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की आराधना का विशेष महत्व माना गया है. मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के आठवें दिन की देवी मां महागौरी की पूजा में जो भक्त उनकी प्रिय चीजें चढ़ाता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. बता दें कि, नवरात्रि के आठवें दिन (अष्टमी) मां महागौरी को मुख्य रूप से नारियल या नारियल से बनी मिठाई (नारियल बर्फी/लड्डू) का भोग लगाया जाता है. मान्यता है कि इससे माता प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि देती हैं. इसके अलावा, माता को हलवा-पूरी और काले चने का प्रसाद भी बेहद प्रिय है, जो कन्या पूजन में भी इस्तेमाल होता है. 
 

मां महागौरी की पूजा का महत्व

हिंदू मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के आठवें दिन पूजी जाने वाली मां महागौरी (श्वेत रंग) को पवित्रता, शांति और सौंदर्य की देवी माना जाता है. उनकी पूजा से भक्तों के पाप नष्ट होते हैं, वैवाहिक जीवन में सुख मिलता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. वे अपने भक्तों को सौभाग्य, आरोग्य और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं. इस दिन नारियल का भोग लगाना अत्यंत शुभ है. 

अष्टमी पर किस समय करें कन्या पूजन?

इस बार अष्टमी का व्रत 26 मार्च 202 को रखा जाएगा. इस तिथि पर कुलदेवी पूजन, हवन और कन्या पूजन का विधान है. कन्या पूजन को देवी की साक्षात उपासना का रूप माना गया है. ऐसे में विधि-विधान से हवन-पूजन कर कन्याओं को भोज कराया जाता है. इस तरह भक्त अपने व्रत को पूर्णता प्रदान करते हैं और देवी की कृपा प्राप्त करते हैं. इस बार अष्टमी कन्या पूजन के लिए सुबह 6:18 से 7:50 बजे तक का समय सबसे शुभ बताया जा रहा है. हालांकि, किसी कारणवश आप इस समय तक कन्या पूजन नहीं कर पाते हैं, तो 10:55 बजे से दोपहर 3:31 बजे तक भी कर सकते हैं. 

मां महागौरी की व्रत कथा | Mahagauri Vrat Katha

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां महागौरी की पौराणिक कथा के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए कई हजार वर्षों तक कठोर तप किया. इस दौरान उन्होंने जल और अन्न ग्रहण नहीं किया. इसके कारण देवी का गौरवर्ण काला हो गया. एक समय बाद मां पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी ने देवी उमा को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया. तपस्या के कारण देवी के काले पड़े शरीर को महादेव ने गंगा जल से शुद्ध किया, जिसके परिणामस्वरूप उनका शरीर फिर से गौरवर्ण का तथा और ज्यादा चमकदार हो गया. गंगा जल के प्रभाव से उनका रंग सफेद हो गया, इसलिए उन्हें महागौरी के नाम से जाना गया. 

मां महागौरी की आरती

जय महागौरी जगत की माया
जय उमा भवानी जय महामाया.
हरिद्वार कनखल के पासा.
महागौरी तेरा वहां निवासा..

चंद्रकली और ममता अंबे.
जय शक्ति जय जय मां जगदंबे..
भीमा देवी विमला माता.
कौशिकी देवी जग विख्याता..

हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा.
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा..
सती ‘सत’ हवन कुंड में था जलाया.
उसी धुएं ने रूप काली बनाया..

बना धर्म सिंह जो सवारी में आया.
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया..
तभी मां ने महागौरी नाम पाया.
शरण आने वाले का संकट मिटाया..

Lalit Kumar

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