Chaitra Navratri 2026 Day 9: शक्ति साधना का चैत्र नवरात्रि महापर्व इस बार 9 दिन का है. इस महापर्व की नवमी तिथि दुर्गा के माता सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा के लिए है. आज यानी 26 मार्च को भक्त मां सिद्धिदात्री की पूजा करेंगे. धार्मिक मान्यता है कि, जैसा कि इनके नाम से ही स्पष्ट है, मां का यह स्वरूप अपने भक्तों को सभी प्रकार की ‘सिद्धियां’ और पूर्णता प्रदान करने वाला है. इस साल राम नवमी और मां सिद्धिदात्री की पूजा का महापर्व 27 मार्च 2026 को मनाया जाएगा. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने भी इन्हीं की कृपा से आठ सिद्धियां प्राप्त की थीं और उनका आधा शरीर देवी का हुआ था, जिससे वे ‘अर्धनारीश्वर’ कहलाए. नवरात्रि के अंतिम दिन मां की उपासना करने से पिछले आठ दिनों की पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है.
शास्त्रों में मां भगवती के हर स्वरूप की पूजा की अलग-अलग विधि, मंत्र, आरती और कथा बताई जाती है. इसी तरह से मां सिद्धिदात्री की पूजा करने की भी एक विधि है. अब सवाल है कि आखिर, चैत्र नवरात्रि की नवमी पर माता सिद्धिदात्री की पूजा कैसे करें? सिद्धिदात्री की पूजा में क्या-क्या सामग्री चाहिए? मां सिद्धिदात्री की पूजा में किन मंत्रों का जप करना चाहिए? नवरात्रि की अष्टमी दिन मां सिद्धिदात्री को क्या भोग लगाएं? दुर्गा अष्टमी 2025 पर पूजन का समय क्या है? मां सिद्धिदात्री की कथा क्या है? इस बारे में India News को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-
मां सिद्धिदात्री का स्वरूप कैसा है?
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, नवरात्रि की नवमी तिथि को मां दुर्गा के नौवें स्वरूप सिद्धिदात्री की पूजा होती है. बता दें कि, मां दुर्गा का नौवां स्वरूप मां सिद्धिदात्री सिद्धियों और ज्ञान की दात्री हैं. वे कमल पर विराजमान, शांत, दिव्य और चार भुजाओं (गदा, चक्र, शंख, कमल) वाली हैं. मान्यता है कि इनकी कृपा से ही शिवजी ‘अर्धनारीश्वर’ कहलाए. वे ज्ञान, मोक्ष और आठ अलौकिक सिद्धियों की देवी हैं.
महानवमी 2026 का शुभ मुहूर्त
सुबह का शुभ समय: प्रातः 06:18 बजे से 10:15 बजे तक (यह समय कलश विसर्जन और पूजा के लिए श्रेष्ठ है).
राम जन्मोत्सव मुहूर्त: दोपहर 11:13 बजे से 01:41 बजे तक (राम नवमी की मुख्य पूजा इसी समय की जाएगी).
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:02 बजे से 12:51 बजे तक.
मां सिद्धिदात्री की पूजा के लिए सामग्री
- दुर्गा की प्रतिमा/चित्र.
- लाल या बैंगनी रंग का आसन.
- गंगाजल
- रोली
- कुमकुम
- सिंदूर
- अक्षत (साबुत चावल)
- धूप
- दीपक
- अगरबत्ती
- कपूर
- कमल, लाल या जामुनी रंग के फूल.
- लाल चुनरी
- चूड़ियां
- बिंदी
- मेहंदी
- हवन कुंड
- आम की लकड़ी
मां सिद्धिदात्री की पूजा करने की विधि
नवरात्रि के नौंवे दिन मां सिद्धिदात्री के पूजन के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें और साफ वस्त्र पहनें. बता दें कि, मां सिद्धिदात्री कमल के पुष्प पर विराजमान हैं और उन्हें बैंगनी या लाल रंग अत्यंत प्रिय है. पूजा के दिन इन रंगों के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. मां की प्रतिमा को गंध, धूप और दीप अर्पित करें. सिद्धिदात्री मां को हलवा, पूरी और काले चने का भोग लगाना सबसे उचित माना जाता है. पूजा के बाद नवमी के दिन हवन जरूर करें. हवन की अग्नि में आहुति देते समय “ॐ ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे नमो नमः” और मां के नाम का जाप करें. इसके बाद नौ कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन कराएं और सामर्थ्य अनुसार भेंट दें. कन्याओं की सेवा आपके जीवन के लिए बहुत मंगलकारी है.
मां सिद्धिदात्री की पूजा के मंत्र
– ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्र्यै नम:।
– ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः।
– या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।
मां सिद्धिदात्री का प्रिय भोग
नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना का विशेष महत्व माना गया है. मान्यता के अनुसार, महानवमी के दिन मां को कमल का फूल चढ़ाना विशेष शुभ माना गया है. फिर मातारानी को हलवा, पूरी, चने, खीर आदि का भोग लगाएं. मंत्र जाप करें. मां सिद्धिदात्री की आरती करें. इसके बाद कन्या पूजन करें. गरीबों को भोजन कराएं. फिर स्वयं प्रसाद ग्रहण करें.
मां कात्यायनी की पूजा का महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार, नवमी के दिन बैंगनी रंग पहनना शुभ रहेगा. साथ ही इस दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा करें. चार भुजाओं वाली देवी सिद्धिदात्री का वाहन सिंह है. वे कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं. इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमलपुष्प है. इन्हें कमलारानी भी कहते हैं. मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से भक्तों को सिद्धियां प्राप्त होती हैं.
मां सिद्धिदात्री की व्रत कथा | Siddhidatri Vrat Katha
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार पूरे ब्रह्मांड में अंधकार छा गया था. उस अंधकार में एक छोटी सी किरण प्रकट हुई. धीरे-धीरे यह किरण बड़ी होती गई और फिर इसने एक दिव्य नारी का रूप धारण कर लिया. इस तरह मां सिद्धिदात्री ने प्रकट होकर त्रिदेव अर्थात ब्रह्मा, विष्णु, और महेश को जन्म दिया. इन्हीं देवी मां की शिव जी ने आराधना की. देवी ने उन्हें सिद्धियां प्रदान की. इसी कारण देवी मां भगवती का नौवां स्वरूप मां सिद्धिदात्री कहलाया.
मां सिद्धिदात्री की आरती | Maa Siddhidatri Aarti
जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दातातू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता,
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि!!
कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम
जब भी हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,
तेरी पूजा में तो न कोई विधि है
तू जगदम्बे दाती तू सर्वसिद्धि है!!
रविवार को तेरा सुमरिन करे जो
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो,
तुम सब काज उसके कराती हो पूरे
कभी काम उसके रहे न अधूरे!!
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया
रखे जिसके सर पर मैया अपनी छाया,
सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली
जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली!!
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा
महा नंदा मंदिर में है वास तेरा,
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता
वंदना है सवाली तू जिसकी दाता!!