Live
Search
Home > धर्म > आखिर क्यों मनाई जाती है चैत्र नवरात्रि, कैसे हुई इसकी शुरुआत और क्या कहती हैं पौराणिक कथाएं?

आखिर क्यों मनाई जाती है चैत्र नवरात्रि, कैसे हुई इसकी शुरुआत और क्या कहती हैं पौराणिक कथाएं?

Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है. इस दौरान भक्तजन पूरे नौ दिनों तक माता दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करते हैं.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: 2026-03-23 19:18:06

Mobile Ads 1x1

Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है. इस दौरान भक्तजन पूरे नौ दिनों तक माता दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करते हैं. यह पावन पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर नवमी तक चलता है. इन नौ दिनों में श्रद्धालु व्रत रखते हैं और माता की भक्ति में लीन रहते हैं. मान्यता है कि इस अवधि में सच्चे मन से की गई उपासना से व्यक्ति को शुभ फल प्राप्त होते हैं और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना यानी कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है. इसी दिन घरों और मंदिरों में अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है, जिसे पूरे नौ दिनों तक जलाए रखा जाता है. ऐसा माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और देवी मां की कृपा परिवार पर बनी रहती है. इस पर्व का समापन नवमी तिथि को होता है, जिसे राम नवमी के रूप में भी मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था, इसलिए इस तिथि का महत्व और भी बढ़ जाता है.

चैत्र नवरात्रि की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन समय में महिषासुर नामक असुर ने अपने अत्याचारों से तीनों लोकों में आतंक फैला रखा था. उसे ऐसा वरदान प्राप्त था कि कोई भी देवता या दानव उसे पराजित नहीं कर सकता था. उसके अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवताओं ने आदिशक्ति से सहायता की प्रार्थना की.तब माता पार्वती ने अपने दिव्य तेज से नौ अलग-अलग स्वरूप धारण किए. देवताओं ने इन स्वरूपों को अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र देकर उन्हें और अधिक शक्तिशाली बनाया. इसके बाद देवी और महिषासुर के बीच भीषण युद्ध हुआ, जो लगातार नौ दिनों तक चला. अंततः दसवें दिन देवी ने महिषासुर का वध कर धर्म की रक्षा की. इसी विजय के प्रतीक के रूप में नवरात्रि का पर्व मनाया जाने लगा. कहा जाता है कि यह दिव्य युद्ध चैत्र मास के दौरान ही हुआ था, इसलिए इस महीने में नवरात्रि का विशेष महत्व है.

 नवरात्रि में नौ देवियों की पूजा

नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है, की पूजा की जाती है. प्रत्येक दिन एक विशेष देवी को समर्पित होता है.
पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नौवें दिन सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है.

अन्य नवरात्रि और उनकी मान्यता

धार्मिक ग्रंथों में वर्षभर में चार नवरात्रियों का उल्लेख मिलता है-चैत्र, आषाढ़, अश्विन और माघ. इनमें से चैत्र और अश्विन नवरात्रि को विशेष रूप से पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है. जबकि आषाढ़ और माघ नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है, जिनका महत्व मुख्य रूप से साधना और तांत्रिक उपासना से जुड़ा होता है.

 कन्या पूजन का महत्व

नवरात्रि के अंतिम दिन यानी अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्या पूजन किया जाता है. इस दिन छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उन्हें भोजन कराया जाता है और उनका आशीर्वाद लिया जाता है. मान्यता है कि इससे माता रानी प्रसन्न होती हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखती हैं.इस प्रकार चैत्र नवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, शक्ति और भक्ति का प्रतीक है, जो हर साल लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का संदेश लेकर आता है.
 

 Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

MORE NEWS

Home > धर्म > आखिर क्यों मनाई जाती है चैत्र नवरात्रि, कैसे हुई इसकी शुरुआत और क्या कहती हैं पौराणिक कथाएं?

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: 2026-03-23 19:18:06

Mobile Ads 1x1

Chaitra Navratri 2026: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है. इस दौरान भक्तजन पूरे नौ दिनों तक माता दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करते हैं. यह पावन पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर नवमी तक चलता है. इन नौ दिनों में श्रद्धालु व्रत रखते हैं और माता की भक्ति में लीन रहते हैं. मान्यता है कि इस अवधि में सच्चे मन से की गई उपासना से व्यक्ति को शुभ फल प्राप्त होते हैं और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना यानी कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है. इसी दिन घरों और मंदिरों में अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है, जिसे पूरे नौ दिनों तक जलाए रखा जाता है. ऐसा माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और देवी मां की कृपा परिवार पर बनी रहती है. इस पर्व का समापन नवमी तिथि को होता है, जिसे राम नवमी के रूप में भी मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था, इसलिए इस तिथि का महत्व और भी बढ़ जाता है.

चैत्र नवरात्रि की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन समय में महिषासुर नामक असुर ने अपने अत्याचारों से तीनों लोकों में आतंक फैला रखा था. उसे ऐसा वरदान प्राप्त था कि कोई भी देवता या दानव उसे पराजित नहीं कर सकता था. उसके अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवताओं ने आदिशक्ति से सहायता की प्रार्थना की.तब माता पार्वती ने अपने दिव्य तेज से नौ अलग-अलग स्वरूप धारण किए. देवताओं ने इन स्वरूपों को अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र देकर उन्हें और अधिक शक्तिशाली बनाया. इसके बाद देवी और महिषासुर के बीच भीषण युद्ध हुआ, जो लगातार नौ दिनों तक चला. अंततः दसवें दिन देवी ने महिषासुर का वध कर धर्म की रक्षा की. इसी विजय के प्रतीक के रूप में नवरात्रि का पर्व मनाया जाने लगा. कहा जाता है कि यह दिव्य युद्ध चैत्र मास के दौरान ही हुआ था, इसलिए इस महीने में नवरात्रि का विशेष महत्व है.

 नवरात्रि में नौ देवियों की पूजा

नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है, की पूजा की जाती है. प्रत्येक दिन एक विशेष देवी को समर्पित होता है.
पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नौवें दिन सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है.

अन्य नवरात्रि और उनकी मान्यता

धार्मिक ग्रंथों में वर्षभर में चार नवरात्रियों का उल्लेख मिलता है-चैत्र, आषाढ़, अश्विन और माघ. इनमें से चैत्र और अश्विन नवरात्रि को विशेष रूप से पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है. जबकि आषाढ़ और माघ नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है, जिनका महत्व मुख्य रूप से साधना और तांत्रिक उपासना से जुड़ा होता है.

 कन्या पूजन का महत्व

नवरात्रि के अंतिम दिन यानी अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्या पूजन किया जाता है. इस दिन छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उन्हें भोजन कराया जाता है और उनका आशीर्वाद लिया जाता है. मान्यता है कि इससे माता रानी प्रसन्न होती हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखती हैं.इस प्रकार चैत्र नवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, शक्ति और भक्ति का प्रतीक है, जो हर साल लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का संदेश लेकर आता है.
 

 Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

MORE NEWS