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Home > धर्म > Chaitra Purnima 2026:  साल की पहली पूर्णिमा आज, स्नान-दान से होगा दोगुना लाभ, जानें मुहूर्त और महत्व

Chaitra Purnima 2026:  साल की पहली पूर्णिमा आज, स्नान-दान से होगा दोगुना लाभ, जानें मुहूर्त और महत्व

Chaitra Purnima 2026 Date: आज हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा हो है. यह दिन आध्यात्मिक ऊर्जा, पुण्य और सकारात्मकता से भरपूर माना जाता है. धर्म शास्त्रों की मानें तो, इसी तिथि पर भगवान हनुमान का जन्म भी हुआ था, जिसे हम हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं. अब सवाल है कि, चैत्र पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त क्या हैं? पूर्णिमा पर कैसे करें पूजा? चैत्र पूर्णिमा का महत्व क्या है?

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: April 2, 2026 11:17:13 IST

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Chaitra Purnima 2026 Date: सनातन धर्म में व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व होता है. पूर्णिमा तिथि इनमें से एक है. हिन्दू नववर्ष का पूर्णिमा का महत्व और बढ़ जाता है. बता दें कि, हिंदू धर्म में चैत्र मास की पूर्णिमा का स्थान सबसे ऊपर माना गया है, क्योंकि यह हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा होती है. यह दिन आध्यात्मिक ऊर्जा, पुण्य और सकारात्मकता से भरपूर माना जाता है. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चैत्र पूर्णिमा आज यानी 2 अप्रैल दिन गुरुवार को मनाई जा रही है. धर्म शास्त्रों की मानें तो, इसी तिथि पर भगवान हनुमान का जन्म भी हुआ था, जिसे हम हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं. अब सवाल है कि, चैत्र पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त क्या हैं? पूर्णिमा पर कैसे करें पूजा? चैत्र पूर्णिमा का महत्व क्या है? इस बारे में बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री.

चैत्र पूर्णिमा 2026 के शुभ मुहूर्त?

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:38 से 05:24 तक.
विजय मुहूर्त- दोपहर 02:30 से 03:20 तक.
गोधूलि मुहूर्त- शाम 06:38 से 07:01 तक.
निशिता मुहूर्त- रात 12:01 से 12:47 तक रहेगा.

चैत्र पूर्णिमा की पूजा करने की सही विधि?

शास्त्रों की मानें तो चैत्र पूर्णिमा के दिन पूजा-अर्चना, जप-तप और दान करना विशेष फलदायी माना गया है. इसलिए जातक को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें. फिर साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर पूजा स्थान को शुद्ध करें. भगवान विष्णु, चंद्र देव और हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. दीपक जलाकर फूल, अक्षत और तुलसी अर्पित करें. मंत्रों का जाप करें और व्रत का संकल्प लें. आखिर में आरती करें और प्रसाद वितरण करें.

चैत्र पूर्णिमा का धार्मिक महत्व क्या?

मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं. साथ ही यह दिन हनुमान जयंती के रूप में भी कई स्थानों पर मनाया जाता है, इसलिए इस दिन बजरंगबली की आराधना करने से भय, रोग और संकटों से मुक्ति मिलती है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने से कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है.

चैत्र पूर्णिमा पर स्नान-दान का महत्व क्या?

चैत्र पूर्णिमा के दिन सुबह नदी, सरोवर या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है. इसके बाद जरूरतमंदों को दान करना चाहिए. इस दिन विशेष रूप से इन चीजों का दान लाभकारी होता है. जैसे अन्न और जल, वस्त्र, गुड़ और चावल,घी और शहद और दक्षिणा दान करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है और ग्रह दोष भी शांत होते हैं.

पूर्णिमा पर क्या करें और क्या न करें

ज्योतिशषाचार्य के मुताबिक, इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना, सूर्य को अर्घ्य देना और शाम को चंद्रमा की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है. वहीं, नकारात्मक सोच, झूठ बोलना या किसी का अपमान करने से बचना चाहिए. छोटे-छोटे नियमों का पालन ही इस दिन को सार्थक बनाता है.

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Chaitra Purnima 2026 Date: सनातन धर्म में व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व होता है. पूर्णिमा तिथि इनमें से एक है. हिन्दू नववर्ष का पूर्णिमा का महत्व और बढ़ जाता है. बता दें कि, हिंदू धर्म में चैत्र मास की पूर्णिमा का स्थान सबसे ऊपर माना गया है, क्योंकि यह हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा होती है. यह दिन आध्यात्मिक ऊर्जा, पुण्य और सकारात्मकता से भरपूर माना जाता है. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चैत्र पूर्णिमा आज यानी 2 अप्रैल दिन गुरुवार को मनाई जा रही है. धर्म शास्त्रों की मानें तो, इसी तिथि पर भगवान हनुमान का जन्म भी हुआ था, जिसे हम हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं. अब सवाल है कि, चैत्र पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त क्या हैं? पूर्णिमा पर कैसे करें पूजा? चैत्र पूर्णिमा का महत्व क्या है? इस बारे में बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री.

चैत्र पूर्णिमा 2026 के शुभ मुहूर्त?

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:38 से 05:24 तक.
विजय मुहूर्त- दोपहर 02:30 से 03:20 तक.
गोधूलि मुहूर्त- शाम 06:38 से 07:01 तक.
निशिता मुहूर्त- रात 12:01 से 12:47 तक रहेगा.

चैत्र पूर्णिमा की पूजा करने की सही विधि?

शास्त्रों की मानें तो चैत्र पूर्णिमा के दिन पूजा-अर्चना, जप-तप और दान करना विशेष फलदायी माना गया है. इसलिए जातक को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें. फिर साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर पूजा स्थान को शुद्ध करें. भगवान विष्णु, चंद्र देव और हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. दीपक जलाकर फूल, अक्षत और तुलसी अर्पित करें. मंत्रों का जाप करें और व्रत का संकल्प लें. आखिर में आरती करें और प्रसाद वितरण करें.

चैत्र पूर्णिमा का धार्मिक महत्व क्या?

मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं. साथ ही यह दिन हनुमान जयंती के रूप में भी कई स्थानों पर मनाया जाता है, इसलिए इस दिन बजरंगबली की आराधना करने से भय, रोग और संकटों से मुक्ति मिलती है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने से कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है.

चैत्र पूर्णिमा पर स्नान-दान का महत्व क्या?

चैत्र पूर्णिमा के दिन सुबह नदी, सरोवर या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है. इसके बाद जरूरतमंदों को दान करना चाहिए. इस दिन विशेष रूप से इन चीजों का दान लाभकारी होता है. जैसे अन्न और जल, वस्त्र, गुड़ और चावल,घी और शहद और दक्षिणा दान करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है और ग्रह दोष भी शांत होते हैं.

पूर्णिमा पर क्या करें और क्या न करें

ज्योतिशषाचार्य के मुताबिक, इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना, सूर्य को अर्घ्य देना और शाम को चंद्रमा की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है. वहीं, नकारात्मक सोच, झूठ बोलना या किसी का अपमान करने से बचना चाहिए. छोटे-छोटे नियमों का पालन ही इस दिन को सार्थक बनाता है.

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