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Home > धर्म > पूजा में बजने वाला शंख आखिर कब और कैसे अस्तित्व में आया? जानिए इसकी उत्पत्ति से जुड़ा पौराणिक रहस्य

पूजा में बजने वाला शंख आखिर कब और कैसे अस्तित्व में आया? जानिए इसकी उत्पत्ति से जुड़ा पौराणिक रहस्य

Shankh Rituals:हिंदु धर्म में लगभग हर पूजा-पाठ में शंख बजाया जाता है, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बगैर शंख के पूजा अधुरी माना जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस शंख की उत्पत्ति कैसे हुई होगी औप यह इतना पवित्र कैसे बना,तो आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: 2026-04-09 14:05:10

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Shankh Significance: धार्मिक परंपराओं में शंख का बहुत खास स्थान माना जाता है. ऐसा विश्वास है कि पूजा के समय शंख बजाने से वातावरण में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और जहां तक इसकी ध्वनि पहुंचती है, वहां तक सकारात्मकता फैलती है. यही वजह है कि घर के मंदिर में शंख को विशेष रूप से रखा जाता है और इसके उपयोग से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है.

मान्यता यह भी है कि शंख से संबंधित किसी भी प्रकार की लापरवाही व्यक्ति के जीवन में बाधाएं पैदा कर सकती है. इसलिए शंख बजाने से पहले उसके नियमों और महत्व को समझना जरूरी होता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि शंख की शुरुआत आखिर कैसे हुई. आइए इसे विस्तार से समझते हैं.

 शंख की उत्पत्ति की पौराणिक कथा

प्राचीन कथाओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन हुआ, तब उस मंथन से कई दिव्य रत्न प्रकट हुए. कुल 14 रत्नों में से एक शंख भी था, जो अपनी विशेष ध्वनि और दिव्यता के कारण अलग पहचान रखता था.

कहा जाता है कि इस अद्भुत शंख को भगवान विष्णु ने अपने पास रख लिया और तभी से उनके हाथों में शंख धारण किए हुए रूप को देखा जाता है. यहीं से शंख की पवित्रता और पूजा में इसके उपयोग की परंपरा शुरू हुई मानी जाती है.

शास्त्रों में शंख का महत्व

धार्मिक ग्रंथों में भी शंख को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है. ऐसा माना जाता है कि पूजा के दौरान शंख न बजाने पर साधना अधूरी रह जाती है. श्रीमद्भागवत पुराण और स्कंद पुराण जैसे ग्रंथों में इसकी महिमा और उत्पत्ति का विस्तार से उल्लेख मिलता है.

शंख के प्रमुख प्रकार

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शंख तीन प्रकार के होते हैं, जिनका अपना अलग महत्व है-

दक्षिणावर्ती शंख
इसे मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. घर या मंदिर में इसकी स्थापना से धन-समृद्धि बनी रहती है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं.

वामावर्ती शंख
पूजा-पाठ में इसी शंख को बजाया जाता है. इसकी ध्वनि को नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने वाला माना जाता है, जिससे घर का वातावरण शुद्ध होता है.

मध्यावर्ती या गणेश शंख
इस प्रकार के शंख को भगवान गणेश से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि इसकी उपस्थिति से घर की दरिद्रता दूर होती है और सुख-शांति का वास होता है.

  Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: 2026-04-09 14:05:10

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Shankh Significance: धार्मिक परंपराओं में शंख का बहुत खास स्थान माना जाता है. ऐसा विश्वास है कि पूजा के समय शंख बजाने से वातावरण में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और जहां तक इसकी ध्वनि पहुंचती है, वहां तक सकारात्मकता फैलती है. यही वजह है कि घर के मंदिर में शंख को विशेष रूप से रखा जाता है और इसके उपयोग से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है.

मान्यता यह भी है कि शंख से संबंधित किसी भी प्रकार की लापरवाही व्यक्ति के जीवन में बाधाएं पैदा कर सकती है. इसलिए शंख बजाने से पहले उसके नियमों और महत्व को समझना जरूरी होता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि शंख की शुरुआत आखिर कैसे हुई. आइए इसे विस्तार से समझते हैं.

 शंख की उत्पत्ति की पौराणिक कथा

प्राचीन कथाओं के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन हुआ, तब उस मंथन से कई दिव्य रत्न प्रकट हुए. कुल 14 रत्नों में से एक शंख भी था, जो अपनी विशेष ध्वनि और दिव्यता के कारण अलग पहचान रखता था.

कहा जाता है कि इस अद्भुत शंख को भगवान विष्णु ने अपने पास रख लिया और तभी से उनके हाथों में शंख धारण किए हुए रूप को देखा जाता है. यहीं से शंख की पवित्रता और पूजा में इसके उपयोग की परंपरा शुरू हुई मानी जाती है.

शास्त्रों में शंख का महत्व

धार्मिक ग्रंथों में भी शंख को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है. ऐसा माना जाता है कि पूजा के दौरान शंख न बजाने पर साधना अधूरी रह जाती है. श्रीमद्भागवत पुराण और स्कंद पुराण जैसे ग्रंथों में इसकी महिमा और उत्पत्ति का विस्तार से उल्लेख मिलता है.

शंख के प्रमुख प्रकार

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शंख तीन प्रकार के होते हैं, जिनका अपना अलग महत्व है-

दक्षिणावर्ती शंख
इसे मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. घर या मंदिर में इसकी स्थापना से धन-समृद्धि बनी रहती है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं.

वामावर्ती शंख
पूजा-पाठ में इसी शंख को बजाया जाता है. इसकी ध्वनि को नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने वाला माना जाता है, जिससे घर का वातावरण शुद्ध होता है.

मध्यावर्ती या गणेश शंख
इस प्रकार के शंख को भगवान गणेश से जोड़ा जाता है. मान्यता है कि इसकी उपस्थिति से घर की दरिद्रता दूर होती है और सुख-शांति का वास होता है.

  Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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