Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.
Gas Cylinder Crisis: देश में बढ़ते गैस सिलेंडर संकट का असर अब आम लोगों से आगे बढ़कर धार्मिक स्थलों तक पहुंच चुका है. अंतरराष्ट्रीय हालात, खासकर ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव के चलते एलपीजी की सप्लाई पर असर पड़ा है. इसका सीधा प्रभाव भारत में भी देखने को मिल रहा है. पहले जहां इस कमी का असर घरों, होटलों और रेस्टोरेंट्स में दिख रहा था, वहीं अब मंदिरों की रसोई भी इससे अछूती नहीं रही.
सिलेंडर संकट के वजह से देश के प्रसिद्ध मंदिरों में भोग और लंगर में हो रही कटौती
Gas Cylinder Crisis: गैस सिलेंडर की कमी ने मंदिरों के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है. एक ओर जहां श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर सीमित संसाधनों में व्यवस्था संभालना आसान नहीं है. ऐसे में कई मंदिर पारंपरिक तरीकों जैसे लकड़ी के चूल्हे का सहारा ले रहे हैं.कुल मिलाकर, यह संकट सिर्फ घरेलू या व्यावसायिक स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब धार्मिक जीवन को भी प्रभावित कर रहा है. जब तक गैस सप्लाई सामान्य नहीं होती, तब तक मंदिरों में इसी तरह के अस्थायी बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
कई प्रसिद्ध मंदिरों में जहां रोजाना हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन और प्रसाद तैयार किया जाता है, वहां अब व्यवस्थाओं में बदलाव करना पड़ रहा है. गैस की सीमित उपलब्धता के कारण कहीं भोजन की मात्रा घटाई गई है तो कहीं पकवानों की संख्या कम कर दी गई है.
नोएडा के इस्कॉन मंदिर में भी गैस संकट की वजह से भोग तैयार करने में दिक्कतें आ रही हैं. कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई रुकने से मंदिर की रसोई प्रभावित हुई है. पहले जहां भगवान को कई तरह के व्यंजन अर्पित किए जाते थे, वहीं अब सीमित संसाधनों के कारण सिर्फ साधारण भोजन ही तैयार हो पा रहा है. भक्तों को भी पहले की तुलना में कम विकल्प मिल रहे हैं.
अयोध्या स्थित राम मंदिर परिसर में संचालित राम रसोई में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को भोजन कराया जाता है. सामान्य दिनों में यहां लगभग 10 हजार लोगों के लिए खाना बनता है, लेकिन गैस की कमी ने इस व्यवस्था को प्रभावित किया है. अब यहां एलपीजी के बजाय लकड़ी और कोयले के चूल्हों का सहारा लिया जा रहा है. इससे खाना बनाने में अधिक समय लग रहा है, जिसके चलते तीन समय की जगह फिलहाल दो समय ही भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है.
महाराष्ट्र के शिरडी स्थित साईं बाबा मंदिर में भी गैस की कमी का असर साफ दिखाई दे रहा है. गैस की बचत के लिए मंदिर प्रशासन ने प्रसाद वितरण में बदलाव किया है. अब भक्तों को सीमित मात्रा में प्रसाद दिया जा रहा है. हालांकि यहां सौर ऊर्जा का उपयोग होने के कारण भोग बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह बाधित नहीं हुई, लेकिन फिर भी संसाधनों को संतुलित करने के लिए कदम उठाए गए हैं.
पश्चिम बंगाल के दीघा स्थित जगन्नाथ मंदिर में भी गैस की कमी ने असर डाला है. पहले जहां रोजाना करीब 3000 श्रद्धालुओं को भोग परोसा जाता था, अब यह संख्या घटाकर लगभग 700 कर दी गई है. मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हो जाती.
Ishan Kishan: सनराइजर्स हैदराबाद की टीम मैनेजमेंट ने बड़ा फैसला लेते हुए ईशान किशन को…
मेवाड़ राजपरिवार के भीतर चल रहे उत्तराधिकार विवाद में एक नाटकीय मोड़ आया है. दिल्ली…
Indian Airlines: भारत मेें हवाई यात्रा करने वाले लोगों को भारत सरकार ने बड़ी राहत…
Sendha Namak Niyam: नवरात्र के व्रत में लोग साधारण नमक का इस्तेमाल नहीं करते हैं…
Heart Health: हृदय रोग एक्सपर्ट के मुताबिक, शाम 7 बजे के बाद की कुछ आदतें…
दोनों ही अपने सेगमेंट के बेस्ट माने जाते हैं, जिनमें आपको लंबी बैटरी लाइफ और…