Bangladeshi Citizens Sentence: नापोल, जशोर और अखौरा के रास्ते बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए 4 बांग्लादेशी को एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने सजा सुनाई है.
एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने 4 बांग्लादेशी नागरिकों को सुनाई 3 साल की सजा
NIA Special Court: नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की एक स्पेशल कोर्ट ने बुधवार (08 अप्रैल, 2026) को अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी के एक मामले में चार बांग्लादेशियों को दोषी ठहराया और सज़ा सुनाई. इन आरोपियों के नाम ज़ाकिर खान, बादल हौलादार, कबीर तालुकदार और मोहम्मद बच्चू घरामी हैं. जिनको बेंगलुरु (कर्नाटक) स्थित NIA की स्पेशल कोर्ट ने 3 साल की कठोर कारावास (RI) की सज़ा सुनाई है.
इसके अलावा, इन लोगों पर 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है और यदि वे जुर्माना नहीं भर पाते हैं, तो उन्हें एक और महीने जेल में बिताना होगा. यह सज़ा ‘विदेशी अधिनियम’ और ‘पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम’ के संबंधित प्रावधानों के तहत सुनाई गई है.
आरोपियों ने पहले ही अपना गुनाह कबूल कर लिया था कि वे बेनापोल, जशोर और अखौरा के रास्ते बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे. उन्होंने धोखाधड़ी करके भारतीय पहचान पत्र हासिल कर लिए थे और बेंगलुरु शहर के बाहरी इलाकों में कचरा अलग करने (waste segregation) का कारोबार कर रहे थे. NIA की जांच में यह भी पता चला है कि आरोपियों ने अपनी कारोबारी यूनिट में मानव तस्करी के शिकार हुए अन्य बांग्लादेशी नागरिकों को भी काम पर रखा हुआ था.
एनआईए को आगे की जांच में पता चला कि आरोपियों ने बेंगलुरु में ज़मीन लीज़ पर ली थी और वहां मानव तस्करी के शिकार हुए बांग्लादेशी नागरिकों को ठहराने के लिए शेड बना रखे थे. NIA ने नवंबर 2023 में इस मामले को स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए दर्ज किया था. यह कार्रवाई खुफिया जानकारी और गहन निगरानी के आधार पर एक सीमा-पार मानव तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ करने के बाद की गई थी. इसके बाद, NIA ने पूरे देश में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. इन आरोपियों के पास से बांग्लादेशी पहचान पत्रों के साथ-साथ डिजिटल उपकरण, धोखाधड़ी से हासिल किए गए भारतीय पहचान पत्र और भारतीय मुद्रा भी बरामद की गई.
एनआईए ने फरवरी 2024 में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी और मई 2024 में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया था. NIA अपनी जांच जारी रखे हुए है, जिसका मुख्य उद्देश्य इस सीमा-पार अपराध मॉड्यूल को पूरी तरह से खत्म करना है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अपराध में शामिल सभी लोगों को सज़ा मिल सके.
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