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Home > धर्म > Gudi Padwa 2026: गुड़ी पड़वा से शुरु हिंदू नववर्ष, जानें क्या है इस पर्व का महत्व? किस दिशा में करें गुड़ी स्थापित?

Gudi Padwa 2026: गुड़ी पड़वा से शुरु हिंदू नववर्ष, जानें क्या है इस पर्व का महत्व? किस दिशा में करें गुड़ी स्थापित?

Gudi Padwa 2026: गुड़ी पड़वा हिंदू नववर्ष का आरंभ होता है. मान्याता है कि इस दिन सृष्टि की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए यह पर्व आस्था, परंपरा और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है.

Written By: Chhaya Sharma
Last Updated: March 17, 2026 15:17:42 IST

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Gudi Padwa 2026: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया जाता है, जो  हिंदू नववर्ष का आरंभ होता है. यह दिन नई ऊर्जा, नई उम्मीद, जीवन में सकारात्मकता और शुभता के आगमन का संकेत माना जाता है. इस वर्ष गुड़ी पड़वा 19 मार्च को चैत्र नवरात्रि के साथ मनाया जाएगा, जिसकी वजह से इसका महत्ता और भी बढ़ जाता है. ऐसे में गुड़ी पड़वा पर शुभ मुहूर्त और सही दिशा में गुड़ी स्थापित करना सबसे जरूरी है, ताकि पूरे वर्ष सुख-समृद्धि बनी रहे. आइए जानते हैं गुड़ी पड़वा की गुड़ी स्थापित करने की सही दिशा और गुड़ी पड़वा का महत्व।

क्या है गुड़ी पड़वा का महत्व

गुड़ी पड़वा हिंदू नववर्ष का शुभारंभ माना जाता है. ‘गुड़ी’ का अर्थ होता है ध्वज या विजय पताका, जबकि ‘पड़वा’ मराठी भाषा में प्रतिपदा तिथि को कहा जाता है. यही वजह है कि इस पर्व को गुड़ी पड़वा के नाम से जाना जाता है. धार्मिक मानयाता के अनसार गुड़ी पड़वा के दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी, इसलिए इसे सृजन और नवआरंभ का दिन माना जाता है. इस दिन घरों में गुड़ी स्थापित करने की भी परंपरा है, जिसे विजय, समृद्धि और सुख का प्रतीक माना जाता है.

कैसे मनाते हैं गुड़ी पड़वा का पर्व

गुड़ी पड़वा के दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, रंगोली बनाते हैं, फूलों की मालाओं से घर सजाते हैं. इस दिन घर के मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों से बना तोरण बांधना भी शुभ माना जाता है. इसके अलावा गुड़ी पड़वा के दिन लोग अपने घरों में विभिन्न पारंपरिक व्यंजन भी बनाए जाते हैं. साथ ही इस दिन आंगन या फिर घर के बाहर गुड़ी यानी ध्वज स्थापित की भी परंपरा होती है, जिसमें पात्र पर स्वस्तिक बनाकर उस पर रेशमी वस्त्र लपेटा जाता है. साथ ही गुड़ी पड़वा के दिन सुबह तेल लगाकर स्नान करने और गुड़ के साथ नीम की कोपल खाने की भी परंपरा होती है, जिसे स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है.

गुड़ी लगाने के लिए कौन सी दिशा शुभ मानी जाती है?

गुड़ी पड़वा के दिन गुड़ी स्थापित करने के लिए पूर्व दिशा को सबसे शुभ माना गया है, क्योंकि इस दिशा में सूर्य उदय होता है और सूर्य को ऊर्जा, नई शुरुआत और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिशा को गुड़ी लगाने के लिए चुना जाता है. इसके अलावा उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण कहा जाता है, वहां गुड़ी स्थापित करना भी लाभदायक है. मान्यता है कि इस दिशा में गुड़ी स्थापित करने से घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Last Updated: March 17, 2026 15:17:42 IST

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Gudi Padwa 2026: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया जाता है, जो  हिंदू नववर्ष का आरंभ होता है. यह दिन नई ऊर्जा, नई उम्मीद, जीवन में सकारात्मकता और शुभता के आगमन का संकेत माना जाता है. इस वर्ष गुड़ी पड़वा 19 मार्च को चैत्र नवरात्रि के साथ मनाया जाएगा, जिसकी वजह से इसका महत्ता और भी बढ़ जाता है. ऐसे में गुड़ी पड़वा पर शुभ मुहूर्त और सही दिशा में गुड़ी स्थापित करना सबसे जरूरी है, ताकि पूरे वर्ष सुख-समृद्धि बनी रहे. आइए जानते हैं गुड़ी पड़वा की गुड़ी स्थापित करने की सही दिशा और गुड़ी पड़वा का महत्व।

क्या है गुड़ी पड़वा का महत्व

गुड़ी पड़वा हिंदू नववर्ष का शुभारंभ माना जाता है. ‘गुड़ी’ का अर्थ होता है ध्वज या विजय पताका, जबकि ‘पड़वा’ मराठी भाषा में प्रतिपदा तिथि को कहा जाता है. यही वजह है कि इस पर्व को गुड़ी पड़वा के नाम से जाना जाता है. धार्मिक मानयाता के अनसार गुड़ी पड़वा के दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी, इसलिए इसे सृजन और नवआरंभ का दिन माना जाता है. इस दिन घरों में गुड़ी स्थापित करने की भी परंपरा है, जिसे विजय, समृद्धि और सुख का प्रतीक माना जाता है.

कैसे मनाते हैं गुड़ी पड़वा का पर्व

गुड़ी पड़वा के दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, रंगोली बनाते हैं, फूलों की मालाओं से घर सजाते हैं. इस दिन घर के मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों से बना तोरण बांधना भी शुभ माना जाता है. इसके अलावा गुड़ी पड़वा के दिन लोग अपने घरों में विभिन्न पारंपरिक व्यंजन भी बनाए जाते हैं. साथ ही इस दिन आंगन या फिर घर के बाहर गुड़ी यानी ध्वज स्थापित की भी परंपरा होती है, जिसमें पात्र पर स्वस्तिक बनाकर उस पर रेशमी वस्त्र लपेटा जाता है. साथ ही गुड़ी पड़वा के दिन सुबह तेल लगाकर स्नान करने और गुड़ के साथ नीम की कोपल खाने की भी परंपरा होती है, जिसे स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है.

गुड़ी लगाने के लिए कौन सी दिशा शुभ मानी जाती है?

गुड़ी पड़वा के दिन गुड़ी स्थापित करने के लिए पूर्व दिशा को सबसे शुभ माना गया है, क्योंकि इस दिशा में सूर्य उदय होता है और सूर्य को ऊर्जा, नई शुरुआत और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिशा को गुड़ी लगाने के लिए चुना जाता है. इसके अलावा उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण कहा जाता है, वहां गुड़ी स्थापित करना भी लाभदायक है. मान्यता है कि इस दिशा में गुड़ी स्थापित करने से घर में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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