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Guru Ravidas Jayanti: आज है रविदास जयंती,जानिए महत्व, इतिहास और सही जानकारी

Guru Ravidas Jayanti: गुरु रविदास जयंती को लेकर पूरे देश में विशेष तैयारियां हैं. लेकिन  इस वर्ष पूर्णिमा दो दिनों तक रहने के कारण लोगों में डेट को लेकर कन्फ्यूजन पैदा हो गया है. आइए जानते हैं ,रविदास जयंती का इतिहास और धार्मिक महत्व के बारे में.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: 2026-02-01 10:41:49

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Guru Ravidas Jayanti: गुरु रविदास जयंती 2026 को लेकर देशभर में लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है. कई लोग मान रहे हैं कि रविदास जयंती 1 फरवरी को है, जबकि कुछ का कहना है कि यह पर्व 2 फरवरी को मनाया जाएगा. दरअसल, संत रविदास जी की जयंती माघ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है और इस वर्ष पूर्णिमा दो दिनों तक रहने के कारण कन्फ्यूजन पैदा हो गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि गुरु रविदास जयंती 2026 में किस दिन मनाना सही रहेगा? आइए विस्तार से जानते हैं.

 रविदास जयंती के अवसर पर लोग गुरु रविदास जी की तस्वीरों के साथ जुलूस निकालते हैं, उनके भजन गाते हैं और सत्संग का आयोजन करते हैं. समाज में समानता और मानवता का संदेश फैलाने वाले संत रविदास जी को श्रद्धांजलि देने के लिए दूर-दूर से लोग वाराणसी पहुंचते हैं.

 गुरु रविदास जयंती 2026 की सही तिथि क्या है?

  • हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत
  • 1 फरवरी 2026, रविवार को सुबह 5 बजकर 52 मिनट से हो रही है
  • 2 फरवरी 2026, सोमवार को सुबह 3 बजकर 38 मिनट पर इसका समापन
    होगा.

उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए धार्मिक दृष्टि से गुरु रविदास जयंती 1 फरवरी 2026 को ही मनाई जाएगी. इस वर्ष संत गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती मनाई जा रही है.

 संत गुरु रविदास जी का जन्म और जीवन परिचय

संत गुरु रविदास जी 15वीं शताब्दी के महान संत, कवि और समाज सुधारक थे. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था. धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार, गुरु रविदास जी का जन्म संवत 1337 में माघ मास की पूर्णिमा के दिन हुआ था.उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने और समानता का संदेश देने में समर्पित कर दिया. गुरु रविदास जी का मानना था कि ईश्वर की दृष्टि में सभी मनुष्य समान हैं, चाहे वह अमीर हो या गरीब. वे जरूरतमंदों की सहायता करने में हमेशा आगे रहते थे.

वाराणसी में क्यों खास होती है रविदास जयंती?

चूंकि संत रविदास जी का जन्म वाराणसी में हुआ था, इसलिए यहां उनकी जयंती का विशेष महत्व है. इस दिन शहर में भव्य शोभायात्राएं निकाली जाती हैं. गुरु रविदास जी की प्रतिमा को सुसज्जित रथ पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया जाता है.श्रद्धालु भजन-कीर्तन, आरती और प्रवचनों के माध्यम से संत रविदास जी की शिक्षाओं को याद करते हैं. कई स्थानों पर भंडारे और सेवा कार्य भी आयोजित किए जाते हैं.

 गुरु रविदास जयंती का धार्मिक और सामाजिक महत्व

गुरु रविदास जी की शिक्षाएं आज भी समाज को सही दिशा दिखाती हैं. उन्होंने प्रेम, करुणा, सत्य और समानता का संदेश दिया. उनकी जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और मानवता का प्रतीक भी है.मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई भक्ति और सेवा से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं.

Disclaimer : प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. INDIA News इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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