Hanuman Jayanti vs Janmotsav difference: हनुमान जयंती या हनुमान जी के जन्म के दिन को पूरे देश में बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है. लोग इस अवसर पर हनुमान जी की पूजा करते हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएं भी देते हैं. लेकिन, हाल के समय में कुछ लोग कहते हैं कि इसे हनुमान ‘जन्मोत्सव’ ही कहना चाहिए, क्योंकि ‘जयंती’ शब्द सामान्य मनुष्यों के लिए होता है और हनुमान जी अमर हैं.
सच यह है कि भले ही जयंती शब्द समय के साथ कई प्रमुख व्यक्तियों के जन्म पर भी इस्तेमाल होने लगा है, इसका मतलब यह नहीं कि यह केवल मनुष्यों के लिए ही है.
जयंती और जन्मोत्सव में अंतर
संसकृत में ‘जयंती’ का अर्थ होता है, पवित्र या दिव्य जन्म, विजय और ध्वज. वहीं, ‘जन्मोत्सव’ का अर्थ है जन्म का उत्सव. यानि जयंती शब्द उन व्यक्तियों के लिए प्रयोग होता है जिनका जन्म दिव्य या पवित्र माना जाता है, जबकि जन्मोत्सव शब्द सामान्य जन्म उत्सव के लिए होता है. इस दृष्टि से, किसी के लिए जन्मोत्सव तो कहा जा सकता है, लेकिन जयंती शब्द सिर्फ उन्हीं के लिए उपयुक्त है जिनका जन्म पवित्र या दिव्य है.दरअसल, हिन्दू शास्त्रों में भी जयंती शब्द का इस्तेमाल देवी-देवताओं के पवित्र जन्म के लिए किया गया है, न कि जन्मोत्सव का. स्कंदपुराण में एक श्लोक है:
‘जयम् पुण्यं च कुरुते जयन्तीमिति तां विदुः’
जिसका अर्थ है – जो व्यक्ति विजय और पुण्य देने वाला होता है, उसे जयंती कहा जाता है.
भगवान कृष्ण और जयंती
भविष्य पुराण में भगवान कृष्ण की जयंती का विशेष महत्व बताया गया है. इसमें उल्लेख है कि कृष्ण जयंती का व्रत रखने से बड़े पाप नष्ट होते हैं. विष्णुधर्मोत्तर पुराण में भी कहा गया है कि जब अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र से मेल खाती है, तो वह कृष्ण जयंती बन जाती है.
हनुमान जी का दिव्य जन्म
जैसे भगवान कृष्ण का जन्म दिव्य था, वैसे ही हनुमान जी का जन्म भी दिव्य था. वाल्मीकि रामायण के किश्किंधा कांड में इसका उल्लेख मिलता है:’तुम केसरीन पुत्र हो, पवनसुत हो और तुम्हारी शक्ति और गती पवनदेव जैसी है. उड़ते समय भी तुम पवनदेव के समान हो’अर्थात, हनुमान जी का जन्म पवित्र और दिव्य था. इसलिए, हनुमान ‘जयंती’ कहना पूरी तरह सही है. साथ ही, इसे ‘जन्मोत्सव’ कहना भी गलत नहीं है, क्योंकि यह हनुमान जी के जन्म के उत्सव का दिन है.