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Hindu Nav Varsh: हिंदू नववर्ष 2026 कब शुरू होगा, विक्रम संवत 2083 में क्यों होंगे 13 महीने? जाने पहला त्योहार और अधिक मास का धार्मिक महत्व

हिंदू नववर्ष 2026: हिंदू नववर्ष 2026 कब शुरू होगा? हिंदू नववर्ष का पहला त्योहार कौन सा है? इस साल विक्रम संवत 2083 में 13 महीने क्यों होंगे और अधिक मास का धार्मिक महत्व क्या है?

Written By: Shristi S
Last Updated: February 16, 2026 21:51:27 IST

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Hindu New Year 2026: हिंदू नववर्ष वैदिक कैलेंडर के अनुसार तय किया जाता है. हिंदू कैलेंडर को विक्रमी संवत के नाम से जाना जाता है. इस साल फाल्गुन महीने में विक्रमी संवत 2082 समाप्त होगा और चैत्र में विक्रम संवत 2083 शुरू होगा. इस हिसाब से इस साल हिंदु नव वर्ष 19 मार्च को शुरू होने वाला है. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें कि हिंदू नववर्ष का पहला त्यौहार कौन सा है और विक्म संवत 2083 में 13 महीने कैसे होने वाले और अधिक मास का धार्मिक महत्व क्या है.

‘रुद्र’ नाम का संवत्सर शुरू होगा

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, नया संवत्सर (एक वर्ष का समय) चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को शुरू होता है. इस साल ‘रुद्र’ नाम का संवत्सर शुरू हो रहा है. हिंदू नए साल का राजा बृहस्पति होगा और मंत्री मंगल होगा. 19 मार्च, 2026 से शुरू होने वाले इस संवत्सर में 12 की जगह 13 महीने होंगे. ज्येष्ठ का महीना दो बार आएगा. इस ज़्यादा महीने को लोकल भाषा में ‘मलमास’, ‘पुरुषोत्तम मास’ या ‘अधिक मास’ कहा जाता है. वैदिक कैलेंडर के अनुसार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च, 2026 को सुबह 6:45 बजे शुरू होगी और अगली सुबह तक रहेगी. 19 मार्च से विक्रम संवत 2083 की शुरुआत होगी.

हिंदू नववर्ष में पहला त्योहार कौन सा होता है?

देवी दुर्गा की पूजा के नौ दिन, चैत्र नवरात्रि हिंदू नए साल के साथ शुरू होते हैं. चैत्र नवरात्रि के दौरान, लोग नौ दिनों तक देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं. पूरे भारत में, लोग इस त्योहार को अलग-अलग नामों से मनाते हैं: महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में उगादी, सिंधियों के लिए चेटी चंद और उत्तर भारत में चैत्र नवरात्रि.

विक्रम संवत 2083 में 13 महीने होंगे

हिंदू कैलेंडर चांद की चाल पर आधारित है. चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष 365 दिनों का होता है. दोनों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है. इस अंतर को बैलेंस करने के लिए, हर तीन साल में एक एक्स्ट्रा महीना जोड़ा जाता है. 2026 में यह बैलेंस ज्येष्ठ महीने में बनेगा, इसलिए इस साल दो ज्येष्ठ महीने होंगे. ज्योतिषियों के अनुसार, 17 मई से 15 जून, 2026 के बीच अधिक मास आएगा. इस वजह से आने वाले व्रत और त्योहार लगभग 15 से 20 दिन आगे बढ़ जाएंगे.

अधिक मास का धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब यह अधिक मास बना था, तो कोई भी देवता इस पर राज नहीं करना चाहता था। तब भगवान विष्णु ने इसे अपनाया और इसका नाम पुरुषोत्तम मास रखा. इसलिए, यह महीना भक्ति, जप, दान और साधना के लिए बहुत शुभ माना जाता है.

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Written By: Shristi S
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