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Holi 2026: होलिका में गुलरी की माला क्यों चढ़ाई जाती है? किन परेशानियों से मिलती है मुक्ति, जानिए इसका महत्व

Holika Dahan 2026: इस साल होलिका दहन 2 मार्च दिन सोमवार को किया जाएगा. क्योंकि, इस दिन प्रदोषकाल-व्यापिनी फाल्गुन पूर्णिमा है. 3 मार्च को चंद्रग्रहण रहेगा और इसके अगले दिन यानी 4 मार्च को रंगों वाली होली (धुलेंडी) खेली जाएगी. होलिका की अग्नि में कुछ ऐसी चीजों को भी जलाया जाता है, जिनका ज्योतिष में भी विशेष महत्व है. ऐसी ही चीजों में से एक हैं गोबर की गुलरी. जानिए, गुलरी की माला चढ़ाते क्यों हैं? गाय के गोवर की ही क्यों बनाई जाती हैं गुलरी? इससे क्या होता है लाभ?

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: March 2, 2026 17:12:24 IST

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Holika Dahan 2026: ज्योतिषीय गणनाओं और पंचांग के अनुसार, इस साल होलिका दहन 2 मार्च दिन सोमवार को किया जाएगा. क्योंकि, इस दिन प्रदोषकाल-व्यापिनी फाल्गुन पूर्णिमा है. 3 मार्च को चंद्रग्रहण रहेगा और इसके अगले दिन यानी 4 मार्च को रंगों वाली होली (धुलेंडी) खेली जाएगी. होली हिंदुओं के लिए सबसे खास त्योहारों में से एक है. माना जाता है कि, होलिका दहन के साथ सभी बुराइयों का नाश होता है. होलिका की अग्नि में कुछ ऐसी चीजों को भी जलाया जाता है, जिनका ज्योतिष में भी विशेष महत्व है. ऐसी ही चीजों में से एक हैं गोबर की गुलरी. होलिका दहन की रात महिलाएं गुलरी की माला बनाकर होली पर चढ़ाती हैं और पूजा करती हैं. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर होली पर गुलरी की माला चढ़ाते क्यों हैं? गाय के गोवर की ही क्यों बनाई जाती हैं गुलरी? इससे क्या होता है लाभ? इस बारे में India News को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-

होलिका में क्यों चढ़ाते हैं गुलरी की माला

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, होली पर गोवर के छोटे-छोटे गुलरी या बल्ला-बल्लियां बनाई जाते हैं. हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में इसे किसी और नाम से भी जाना जा सकता है. इसके बाद सभी को एक रस्सी में इनको पिरोकर माला तैयार की जाती है. होलिका दहन की रात महिलाएं इस माला को होली पर चढ़ाती हैं और पूजा करती हैं.

होलिका में गुलरी की माला चढ़ाने के लाभ

नकारात्मक शक्तियों का नाश: ज्योतिष आचार्यों की मानें तो गोबर के उपले शुभता का प्रतीक माने जाते हैं. इन्हें जलाने से इनसे निकले धुआं से आसपास की नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं. यही वजह है कि यज्ञ और हवन में भी गाय के गोवर का इस्तेमाल होता है.

परेशानियां होती दूर: होली पर होलिका दहन के लिए गोबर से बनी गुलरियां जलाई जाती है. इसके लिए गोबर के छोटे-छोटे बनाकर उसमें बीच से छेद करके सुखाया जाता है और उनकी माला बनाई जाती हैं. माना जाता है कि, गुलरियों को जलाने से घर की परेशानियां दूर होती हैं.

खास क्यों गाय का गोबर: हिन्दू धर्म में गाय को पूज्यनीय माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है. ऐसे में गाय की पूजा करने से कई ज्योतिष लाभ मिलते हैं. गाय के गोबर से बने उपले जलाने से घर का वातावरण शुद्ध बना रहता है. इसलिए होलिका दहन की रात गोबर की गुलरी चढ़ाई जाती है. 

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Written By: Lalit Kumar
Last Updated: March 2, 2026 17:12:24 IST

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