Holika Dahan Ke Niyam: फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि के दिन होलिका दहन किया जाता है, यानी रंगों की होली से एक दिन पहले. यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन होलिका श्री हरी भक्त प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठी थी, लेकिन खूद जलकर भस्म हो गई थी और प्रह्लाद की रक्षा हुई थी. इसी वजह से होलिका की अग्नि नकारात्मकता को समाप्त करने वाली मानी गई है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुछ लोगों के लिए होलिका दहन वर्जित है. आइए जानते हैं यहाँ कि किन लोगों के लिए होलिका दहन की अग्नि से दूर रहना होता है और इसका कारण क्या है?
साल 2026 में होलिका दहन कब है? (Holika Dahan 2026 Date?)
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 के दिन शाम 5 बजकर 55 मिनट पर शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन 3 मार्च 2026 को शाम 05 बजकर 07 मिनट पर हो रहा है. ऐसे में होलिका दहन 3 मार्च 2026 को किया जाएगा और रंगों की होली 4 मार्च को खेली जाएगी.
- होलिका दहन का मुहूर्त- शाम 5 बजकर 51 मिनट से 09 बजकर 18 मिनट तक
- होलिका दहन पूजन का समय- 02 घण्टे 27 मिनट्स
- भद्रा पूंछ – रात 1 बजकर 25 मिनट से 2 बजकर 35 मिनट तक (3 मार्च 2026)
- भद्रा मुख – 02 बजकर 35 मिनट से 4 बजकर 30 मिनट तक (3 मार्च 2026)
किन लोगों को नहीं देखना चाहिए होलिका दहन?
नवविवाहित महिलाएं नहीं देंखे होलिका दहन
पौराणिक मान्यताओं और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नवविवाहित महिलाओं को होलिका दहन नहीं देखना चाहिए, ऐसा इसलिए क्योंंकि होलिका दहन की आग बीते साल के प्रतिकात्मक दाह संस्कार का प्रतीक होती है. इस अग्नि को लोग एक जलते हुए शरीर के रूप में देखते है. वहीं सनातन धर्म शास्त्रों के मुताबिक नवविवाहितों के लिए जलती हुई चिता की आग देखना अशुभ होता है. मान्यताओं के अनुसार, अगर कोई नई दुल्हन होलिका दहन की अग्नि देखें, तो इसका अशुभ प्रभाव वैवाहिक जीवन पर पड़ता है.
गर्भवती महिलाएं नहीं देंखे होलिका दहन
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को भी होलिका दहन नहीं देखना चाहिए. होलिका दहन के दौरान वातावरण नकारात्मक ऊर्जा, धुआं और गर्मी से भरा होता है, जिसका प्रभाव बच्चे और मां पर पड़ सकता है. इसी वजह से गर्भवती महिलाओं को होलिका दहन की अग्नि नहीं देखनी चाहिए.
छोटे बच्चे नहीं नहीं देंखे होलिका दहन
शास्त्र के अनुसार छोटे बच्चों को भी होलिका दहन नहीं देखना चाहिए. ऐसा इसलिए है कि इस दिन वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा रहती है, जो बच्चों पर पड़ सकती है.
होलिका दहन से जुड़े अन्य नियम
हिंदू धर्म में होलिका की अग्नि बेहद पवित्र होती है, इसमें प्लास्टिक, चमड़ा या कचरा गलती डालें. होलिका दहन की अग्नि में सिर्फ गोबर के उपले, सूखी लकड़ी और कपूर का प्रयोग करें.
रंगों की होली वाले दिना सुबह जल्दी उठकर होलिका दहन की राख को घर लाकर माथे पर लगाना चाहिए और घर के चारों कोनों में छिड़कना चाहिए, ऐसा करना बहुत शुभ माना जाता है, इससे घर का वास्तु दोष भी दूर होता है. इसके अलावा होली के दोनों दिन ही तामसिक चीजों से दूर रहना चाहिए.
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.