Holika Dahan 2026: होली के एक दिन पहले मनाया जाने वाला ‘होलिका दहन‘ बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. इस दिन परिवार के सभी सदस्य विधि विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और रात को होलिका का दहन करते हैं.लेकिन ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन कुछ खास नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है. इन नियमों की जानकारी न होने पर पूजा का पूरा फल नहीं मिलता और जीवन में सुख-समृद्धि का लाभ भी अधूरा रह सकता है.
वैदिक पंचांग के अनुसार, ‘होलिका दहन 2 मार्च 2026 की रात’ को होगा. भद्रा काल शाम 5:55 बजे से शुरू होकर 3 मार्च की सुबह 4:28 बजे तक रहेगा. इस दौरान पृथ्वी पर भद्रा का प्रभाव रहता है, इसलिए प्रदोष काल में पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है.
होलिका दहन से पहले और दौरान पालन करने योग्य नियम
- सिर पर पवित्र धागा बांधें और होलिका के चारों ओर 5-7 बार परिक्रमा करें.
- अग्नि में जौ या साबुत चावल अर्पित करे फिर नई फसल को अग्नि में भूनें. भुने हुए दानों को घर लेकर जाकर आपस में बांटना शुभ माना जाता है.
- सही वस्त्र पहनें सफेद, पीला या लाल रंग शुभ है. काले या चमड़े के कपड़े पहनने से बचें. महिलाएं बहुत चमकीले या गहरे रंग के कपड़े पहनने से बचें.
- दहन के बाद तुरंत स्थल न छोड़ें. थोड़ी देर वहीं रुककर अग्नि की परिक्रमा करें, क्योंकि अग्नि में नकारात्मक शक्तियों को समाप्त करने की ऊर्जा होती है.
- राख का सही उपयोग अगली सुबह राख को घर में लाकर माथे पर लगाएं और घर के चारों कोनों में छिड़कें. ऐसा करने से वास्तु दोष दूर होता है.
पूजा और वर्जित कार्य
- होलिका दहन के दिन ‘होलिका माता की पूजा’ करें और घर में सुख-समृद्धि की कामना करें.
- मांस, शराब और तामसिक भोजन का सेवन वर्जित है, क्योंकि ये आर्थिक हानि और रोग की समस्या बढ़ा सकते हैं.
- नकारात्मक ऊर्जाओं से बचने के लिए महिलाएं पूजा के दौरान बाल खुले न रखें.