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अनोखी परंपरा: कराते हैं लोग इस वजह से मेंढकों की शादी, टोटका करता है असर! जानें कहा चलता है यह ट्रेडिशन

Unique Tradition: भारत में कई तरह की अनोखी परंपरा प्रचलित हैं, जिसमें से एक हैं मेंढकों की शादी, जो सुनना में जितनी अजीब है, उससे कई ज्यादा देखने अजीब लगती है और लोगों को हैरान करती है. आइये जानते है यहां कि लोग क्यों मेंढकों की शादी कराते हैं? और यह ट्रेडिशन कहा चलता है? और मेंढकों की शादी के टोटके को लोगअसरदार क्यों मानते है?

Written By: Chhaya Sharma
Last Updated: January 6, 2026 21:23:45 IST

Frog Wedding: भारत के अलग-अलग कोनों में अलग अलग तरह की परंपराएं प्रचलित है, कई तो बेहद अनोखी है, जिसके बारे में सुनना और देखना भी लोगों को बेहद अजीब लगता है. ऐसे ही एक परंपरा है मेंढकों की शादी, जो बेहद अनोखी है. किसी को भी पहली बार यह परंपरा सुनने में बेहद अजीब लग सकती है, लेकिन ग्रामीण भारत में यह परंपरा एक गंभीर और आस्था से जुड़ा हुआ रिवाज है. इस परंपरा की मान्यता है कि मेंढकों की शादी कराने से वर्षा  के देव यानी इंद्र देव प्रसन्न होते हैं और समय के अनुसार अच्छी बारिश करते हैं, जिससे, जो खेती के लिए बेहद जरूरी है. 

कैसे शुरू हुई मेंढकों की शादी कराने की परंपरा

काफी समय से चलती आ रही मेंढकों की शादी कराने की परंपरा बहुत पुरानी है. यह  परंपरा भारत के कई राज्यों, खासकर असम (Bhekuli Biya), राजस्थान, उत्तर प्रदेश (गोरखपुर, वाराणसी), कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और बिहार में बहुत प्रचलित है इस परंपरा का संबंध खेती और मानसून से जुड़ा है. गांव देहात के इलाकों में लोगों का मानना है कि मेंढकों की टर्र-टर्र बारिश आने का संकेत होती है. इसलिए जब भी बारिश आने में देरी होती है या समय से नहीं आती है, जिससे सूखा पड़ने की आशंका होती है,तब लोग मेंढकों की शादी कराते हैं. लोगों का मानना होता है कि यह टोटका बेहद असरदार होता है. मेंढकों की शादी कराके लोग प्रकृति से बारिश की प्रार्थना करते हैं

मेंढकों की शादी कराने की रस्में कैसी होती हैं?

मेंढकों की शादी भी बिल्कुल इंसानों की शादी की तरह कराई जाती है. पहले दूल्हा और दुल्हन बनाने के लिए मेंढकों को चुना जाता है. इसके बाद  उन्हें नहलाया जाता है, उनके नाम के कपड़े बनवाकर उन्हें पहनाए जाते हैं. कभी-कभी दुल्हन मंढक को गहने भी पहनाकर सजाया जाता है. इसके बाद एक पंडित भी बुलाया जाता है, जो पूरे विधि धिवान से और मंत्रों को पढ़कर शादी करवाता है. इस दौरान गाव के सभी लोग इकट्ठा होते है, पूजा करते हैं, गीत गाते हैं और प्रसाद बाँटते हैं. साथ ही सभी इंद्र देव से एक एक ही कामना करते हैं कि अच्छी बारिश हो, जिससे फसल अच्छी हो. 

मेंढकों की शादी की परंपरा अलग-अलग राज्यों में अलग अंदाज में

भारत में यह परंपरा हर जगह थोड़ी अलग-अलग अंदाज में देखी जाती है. असम में मेंढकों की शादी की परंपरा को भेकुली बिया कहा जाता है और यहा पर मेंढकों को पारंपरिक असमिया कपड़े पहनाए जाते हैं. वहीं  उत्तर प्रदेश के सोनभद्र, गोरखपुर और वाराणसी जैसे मशहूर इलाकों में मेंढकों की शादी  पूरे गाँव की भागीदारी होवनी जरूरी होती है. कर्नाटक के उडुपी में यह मेंढकों की शादी की परंपरा शांत और धार्मिक तरह से की जाती है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में मेंढकों की शादी की पूजा को बेहद श्रद्धा-भाव के साथ किया जाता है.  साथ ही मध्य प्रदेश और बिहार में भी मेंढकों की शादी की परंपरा देखने को मिलती है और यहां स्थानीय संस्कृति के अनुसार रस्में निभाई जाती है.

मेंढकों की शादी का सांस्कृतिक महत्व क्या है 

मेंढकों की शादी सिर्फ एक रीति रिवाज परंपरा या फिर कोई रस्म नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और इंसान के गहरे रिश्ते को दर्शाती है, क्योंकि किसान आज के समय में भी बारिश पर निर्भर रहते हैं और यह प्रचलित परंपरा उनकी उम्मीद और सामूहिक विश्वास का प्रतीक मानी जाती है. साथ ही यह एक तरह की सामाजिक आयोजन भी होता है, जिसमें पूरा गाँव एक साथ समलित होता है

मेंढकों की शादी का वैज्ञानिक नजरिया क्या है

विज्ञान दृष्टिकोण के अनुसार, मेंढकों की शादी की परंपरा और बारिश होने के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है, क्योंकि बारिश प्राकृतिक क्रिया है, जो मौसम चक्र से होती है. लेकिन ऐसी परंपराएँ लोगों को मानसिक शांति देती हैं और लोगों को भी एक-दूसरे से जोड़ने का काम करती है. साथ ही उनकी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने और प्रचलित करने में मदद करती है. 

अंधविश्वास या विश्वास क्या है मेंढकों की शादी

मेंढकों की शादी भारत की उन परंपराओं में से एक है, जो कई लोगों को अंधविश्वास लगती है, लेकिन इसके पीछे लोगों की छिपी भावनाएँ, विश्वास और सामूहिकता को दिखाती है. क्योंकि भारत की कुछ ऐसी परंपराएं ही हमे याद दिलाती है कि बदलती दुनिया में भी इंसान और प्रकृति का रिश्ता कितना पुराना और गहरा है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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अनोखी परंपरा: कराते हैं लोग इस वजह से मेंढकों की शादी, टोटका करता है असर! जानें कहा चलता है यह ट्रेडिशन

Unique Tradition: भारत में कई तरह की अनोखी परंपरा प्रचलित हैं, जिसमें से एक हैं मेंढकों की शादी, जो सुनना में जितनी अजीब है, उससे कई ज्यादा देखने अजीब लगती है और लोगों को हैरान करती है. आइये जानते है यहां कि लोग क्यों मेंढकों की शादी कराते हैं? और यह ट्रेडिशन कहा चलता है? और मेंढकों की शादी के टोटके को लोगअसरदार क्यों मानते है?

Written By: Chhaya Sharma
Last Updated: January 6, 2026 21:23:45 IST

Frog Wedding: भारत के अलग-अलग कोनों में अलग अलग तरह की परंपराएं प्रचलित है, कई तो बेहद अनोखी है, जिसके बारे में सुनना और देखना भी लोगों को बेहद अजीब लगता है. ऐसे ही एक परंपरा है मेंढकों की शादी, जो बेहद अनोखी है. किसी को भी पहली बार यह परंपरा सुनने में बेहद अजीब लग सकती है, लेकिन ग्रामीण भारत में यह परंपरा एक गंभीर और आस्था से जुड़ा हुआ रिवाज है. इस परंपरा की मान्यता है कि मेंढकों की शादी कराने से वर्षा  के देव यानी इंद्र देव प्रसन्न होते हैं और समय के अनुसार अच्छी बारिश करते हैं, जिससे, जो खेती के लिए बेहद जरूरी है. 

कैसे शुरू हुई मेंढकों की शादी कराने की परंपरा

काफी समय से चलती आ रही मेंढकों की शादी कराने की परंपरा बहुत पुरानी है. यह  परंपरा भारत के कई राज्यों, खासकर असम (Bhekuli Biya), राजस्थान, उत्तर प्रदेश (गोरखपुर, वाराणसी), कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और बिहार में बहुत प्रचलित है इस परंपरा का संबंध खेती और मानसून से जुड़ा है. गांव देहात के इलाकों में लोगों का मानना है कि मेंढकों की टर्र-टर्र बारिश आने का संकेत होती है. इसलिए जब भी बारिश आने में देरी होती है या समय से नहीं आती है, जिससे सूखा पड़ने की आशंका होती है,तब लोग मेंढकों की शादी कराते हैं. लोगों का मानना होता है कि यह टोटका बेहद असरदार होता है. मेंढकों की शादी कराके लोग प्रकृति से बारिश की प्रार्थना करते हैं

मेंढकों की शादी कराने की रस्में कैसी होती हैं?

मेंढकों की शादी भी बिल्कुल इंसानों की शादी की तरह कराई जाती है. पहले दूल्हा और दुल्हन बनाने के लिए मेंढकों को चुना जाता है. इसके बाद  उन्हें नहलाया जाता है, उनके नाम के कपड़े बनवाकर उन्हें पहनाए जाते हैं. कभी-कभी दुल्हन मंढक को गहने भी पहनाकर सजाया जाता है. इसके बाद एक पंडित भी बुलाया जाता है, जो पूरे विधि धिवान से और मंत्रों को पढ़कर शादी करवाता है. इस दौरान गाव के सभी लोग इकट्ठा होते है, पूजा करते हैं, गीत गाते हैं और प्रसाद बाँटते हैं. साथ ही सभी इंद्र देव से एक एक ही कामना करते हैं कि अच्छी बारिश हो, जिससे फसल अच्छी हो. 

मेंढकों की शादी की परंपरा अलग-अलग राज्यों में अलग अंदाज में

भारत में यह परंपरा हर जगह थोड़ी अलग-अलग अंदाज में देखी जाती है. असम में मेंढकों की शादी की परंपरा को भेकुली बिया कहा जाता है और यहा पर मेंढकों को पारंपरिक असमिया कपड़े पहनाए जाते हैं. वहीं  उत्तर प्रदेश के सोनभद्र, गोरखपुर और वाराणसी जैसे मशहूर इलाकों में मेंढकों की शादी  पूरे गाँव की भागीदारी होवनी जरूरी होती है. कर्नाटक के उडुपी में यह मेंढकों की शादी की परंपरा शांत और धार्मिक तरह से की जाती है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में मेंढकों की शादी की पूजा को बेहद श्रद्धा-भाव के साथ किया जाता है.  साथ ही मध्य प्रदेश और बिहार में भी मेंढकों की शादी की परंपरा देखने को मिलती है और यहां स्थानीय संस्कृति के अनुसार रस्में निभाई जाती है.

मेंढकों की शादी का सांस्कृतिक महत्व क्या है 

मेंढकों की शादी सिर्फ एक रीति रिवाज परंपरा या फिर कोई रस्म नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और इंसान के गहरे रिश्ते को दर्शाती है, क्योंकि किसान आज के समय में भी बारिश पर निर्भर रहते हैं और यह प्रचलित परंपरा उनकी उम्मीद और सामूहिक विश्वास का प्रतीक मानी जाती है. साथ ही यह एक तरह की सामाजिक आयोजन भी होता है, जिसमें पूरा गाँव एक साथ समलित होता है

मेंढकों की शादी का वैज्ञानिक नजरिया क्या है

विज्ञान दृष्टिकोण के अनुसार, मेंढकों की शादी की परंपरा और बारिश होने के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है, क्योंकि बारिश प्राकृतिक क्रिया है, जो मौसम चक्र से होती है. लेकिन ऐसी परंपराएँ लोगों को मानसिक शांति देती हैं और लोगों को भी एक-दूसरे से जोड़ने का काम करती है. साथ ही उनकी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने और प्रचलित करने में मदद करती है. 

अंधविश्वास या विश्वास क्या है मेंढकों की शादी

मेंढकों की शादी भारत की उन परंपराओं में से एक है, जो कई लोगों को अंधविश्वास लगती है, लेकिन इसके पीछे लोगों की छिपी भावनाएँ, विश्वास और सामूहिकता को दिखाती है. क्योंकि भारत की कुछ ऐसी परंपराएं ही हमे याद दिलाती है कि बदलती दुनिया में भी इंसान और प्रकृति का रिश्ता कितना पुराना और गहरा है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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