Live
Search
Home > धर्म > Pradosh Vrat 2026: जनवरी का आखिरी प्रदोष व्रत कब है? जानिए सही तिथि और शुभ उपाय

Pradosh Vrat 2026: जनवरी का आखिरी प्रदोष व्रत कब है? जानिए सही तिथि और शुभ उपाय

Shukra Pradosh Vrat 2026: साल 2026 का पहला  महीना अपने समाप्ति की ओर है,ऐसे मे लोगों के मन में सवाल है कि आखिर इस महीने का प्रदोष व्रत कब है? तो आइए जानते हैं प्रदोष व्रत की तिथि और उपायों के बारे में.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: January 28, 2026 18:43:48 IST

Mobile Ads 1x1

Shukra Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने का अत्यंत प्रभावशाली व्रत माना जाता है. पापों से मुक्ति, रोगों से राहत और आर्थिक उन्नति के लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना गया है. वर्ष 2026 में जनवरी महीने का अंतिम प्रदोष व्रत 30 जनवरी को रखा जाएगा, जो कि शुक्र प्रदोष व्रत होगा. शुक्रवार के दिन पड़ने वाला यह प्रदोष व्रत विशेष रूप से धन प्राप्ति और लक्ष्मी कृपा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.

कब है शुक्र प्रदोष व्रत 2026?

पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 30 जनवरी 2026 को सुबह 11:09 बजे होगी औरइस तिथि का समापन  31 जनवरी 2026 को सुबह 8:25 बजे होगा.

शुक्र प्रदोष व्रत पूजा का शुभ समय

प्रदोष व्रत की पूजा सायंकाल के समय करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है.

पूजा का शुभ मुहूर्त:

शाम 5:59 बजे से रात 8:37 बजे तक

इसी समय भगवान शिव की आराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है.

शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व

शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है. ऐसे में जब त्रयोदशी तिथि शुक्रवार को पड़ती है, तो यह संयोग धन, वैभव और सुख-समृद्धि को बढ़ाने वाला माना जाता है. मान्यता है कि शुक्र प्रदोष व्रत करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और घर में स्थायी सुख-समृद्धि का वास होता है.

प्रदोष व्रत में क्यों होती है शाम की पूजा?

प्रदोष काल सूर्यास्त से ठीक पहले और बाद का समय होता है, जिसे शिव उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है. इस समय भगवान शिव की पूजा करने से साधक को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है.

शुक्र प्रदोष व्रत की सरल पूजा विधि

  •  प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें.
  •  दिनभर उपवास रखें. इच्छानुसार फलाहार या निर्जल व्रत किया जा सकता है.
  •  संध्या समय पुनः स्नान करें और सफेद या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें.
  •  पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान शिव की पूजा करें.
  • शिवलिंग का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) से अभिषेक करें.
  •  बेलपत्र, चंदन, अक्षत, धतूरा और पुष्प अर्पित करें.
  •  “ॐ नमः शिवाय” मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र या शिव चालीसा का पाठ करें.
  • अंत में भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद वितरित करें.

दान का विशेष महत्व

शुक्र प्रदोष व्रत के दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है. ऐसा करने से पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. इन खबर इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

MORE NEWS

More News