Jaya Ekadashi Vrat Kahani In Hindi: आज 29 जनवरी के दिन जया एकादशी का व्रत किया जाएगा, हर अपवास की तरह इस व्रत का भी हिंदू धर्म में बेहद महत्व होता है. क्योंकि एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ मा लक्ष्मी की पूजा की जाती है. कहा जाता है कि जो व्यक्ति एकादशी का व्रत करता है उसके सारे पाप नष्ट हो जाते है, जिवन में परेशानियों का अंत होता हैं, लेकिन बता दें कि एकादशी का व्रत तब कर सफल नहीं माना जाता, जब तक व्रत की कहानी ना सुनी या पढ़ी जाएं. ऐसे में अग आप भी अपना जया एकादशी का व्रत सफल बनाना चाहते हैं, तो यह कहानी जरूर पढ़े.
जया एकादशी व्रत कथा (Jaya Ekadashi Vrat Katha In Hindi)
एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से जया एकादशी व्रत का महत्व और विधि पूछी. तब भगवान श्रीकृष्ण ने बताया कि माघ शुक्ल एकादशी व्रत को ही जया एकादशी के नाम से जाना जाता है. जो भी इस दिन विधि विधान से व्रत और पूजा करता है, उसे भूत, प्रेत, पिशाच योनि से मुक्ति प्राप्त हो जाती है. जया एकादशी व्रत कथा कुछ इस तरह से है.
एक समय की बात है स्वर्ग के राजा देवराज इंद्र अपनी अप्सराओं और गंधर्व के साथ सुंदरवन घूमने गए. उनके साथअप्सरा पुष्पवती और गंधर्व माल्यवान भी थे. पुष्पवती माल्यवान को देखकर मोहित हो गई थे और माल्यवान भी पुष्पवती की सुंदरता को देखकर मंत्रमुग्ध रह गए थे. कुछ समय बाद वे दोनों इंद्र को प्रसन्न करने के लिए नृत्य और गायन कर रहे थे. लेकिन उस समय भी दोनों एक दूसरे के आकर्षण में बंधे थे. देवराज इंद्र को भी पुष्पवती और माल्यवान की मन:स्थिति के बारे में आभास हो गया. ये सब देखकर राज इंद्र को लगा कि पुष्पवती और माल्यवान उनका अपमान कर रहे हैं. ऐसे में इंद्र बेहद नराज हो गए और दोनों को श्राप दे दिया कि वो अभी के अभी स्वर्ग से धरती पर गिर जाएंगे और दोनों को पिशाच की योनि मिलेगी, जहां इन दोनों को कई प्रकार के कष्ट भोगने होंगे. श्राप लगते ही पुष्पवती और माल्यवान दोनों हिमालय पर जा गिरे और दोनों नेपिशाच योनि में अनेक तरह के कष्ट भोगे. इसी दौरान माघ शुक्ल एकादशी तिथि आई. उस दिन पुष्पवती और माल्यवान ने अन का एक दान भी नहीं छुआ था, जिसकी वजह से पूरे दिन उनका उपवास माना गया. दोनों फल, फूल आदि खाकर ही उस दिन को व्यतीत किया. सूर्यास्त होने के बौद दोनों एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठ गए. उस दौरान सर्दी बहुत ज्यादा था दोनों ने जैसे-तैसे पूरी रात बिताई, उस रात वे दोनों सो ही नहीं पाए, एक तरह ये उनकी रात जागरण में ही व्यतीत हुई. उन दोनों ने अनजाने में जया एकादशी व्रत के साथ -साथ रात्रि जागरण कर लिया. ऐसे में जैसे ही सूर्योदय हुआ, दोनों पर श्रीहरि की कृपा हुई. पुष्पवती और माल्यवान ने पिशाच योनि से मुक्ति पा ली और भगवान विष्णु के आशीर्वाद से दोनों को ही सुंदर शरीर प्राप्त हुआ और दोनों ही दौबारा स्वर्ग पहुंच गए. स्वर्ग के राजा इंद्र दोनों कोआश्चर्य से देखने लगे. उन्होंने पूछा की आखिर तुम दोनों को पिशाच योनि से मुक्ति कैसे मिली? इस पर माल्यवान ने बताया कि जया एकादशी व्रत के प्रभाव से उनको मुक्ति मिल गई. भगवान विष्णु के आशीर्वाद उन्हें प्राप्त हुआ
इसलिए कहा जाता है कि जो भी जीव विधि विधान से जया एकादशी का व्रत रखता है, उसे श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती है और इस व्रत को करने से आत्मा को मृत्यु के बाद भूत, प्रेत या पिशाच योनि में कष्ट नहीं भोगना पड़ता है.
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