kamika Ekadashi Vrat Katha:इस साल यह व्रत रविवार, 9 अगस्त को रखा जाएगा. व्रत अगले दिन यानी 10 तारीख को तोड़ा जाएगा. आइए कामिका एकादशी से जुड़ी सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, आरती, मंत्र, व्रत खोलने का समय और भगवान विष्णु के पसंदीदा प्रसाद के बारे में जानें.
आज कामिका एकादशी 2026 व्रत
kamika Ekadashi Vrat Katha: हर महीने दो एकादशी व्रत रखे जाते हैं. एक शुक्ल पक्ष में और दूसरा कृष्ण पक्ष में. श्रावण महीने में भी दो एकादशी तिथियां होती हैं. कामिका एकादशी श्रावण महीने के कृष्ण पक्ष में रखी जाएगी.इस साल यह व्रत रविवार, 9 अगस्त को रखा जाएगा. व्रत अगले दिन यानी 10 तारीख को तोड़ा जाएगा. आइए कामिका एकादशी से जुड़ी सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, आरती, मंत्र, व्रत खोलने का समय और भगवान विष्णु के पसंदीदा प्रसाद के बारे में जानें.
कामिका एकादशी के शुभ अवसर पर, सुबह स्नान करने के बाद, भगवान विष्णु का नाम लेते हुए व्रत रखने का संकल्प लेना चाहिए.इसके बाद, साफ कपड़े पहनें. पूजा घर को साफ करें और भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल का मिश्रण) से नहलाएं. भगवान को नए और साफ कपड़े पहनाएं. उन्हें चंदन का तिलक लगाना शुभ माना जाता है.इसके बादउन्हें पीले रंग का प्रसाद चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है. इसके लिए केसर वाली खीर, तुलसी, पंचामृत, आम-केला और कमल के बीज की खीर बहुत पॉपुलर हैं.
कामिका एकादशी का व्रत बहुत अच्छा फल देता है. इस एकादशी के दिन भगवान कृष्ण की पूजा करने से अचूक फल मिलते हैं. इसके अलावा, इस दिन तीर्थ स्थलों पर स्नान और दान करना आध्यात्मिक नज़रिए से बहुत शुभ माना जाता है. कामिका एकादशी पर भगवान हरि की पूजा करने से पितरों के कष्ट भी दूर होते हैं. श्रावण मास में भगवान विष्णु की पूजा करना गंधर्वों और नागों की पूजा के समान माना जाता है.
एकादशी व्रत का वर्णन पद्म पुराण में देखने को मिलता है, जहां खुद भगवान श्रीकृष्ण धर्मराज युधिष्ठिर को एक कथा सुनाते हुए कहते हैं कि, एक समय की बात एक गांव में क्रोधी ठाकुर नाम का एक जमींदार रहता था जो अपनी बात मनवाने के लिए किसी भी हद तक जाने में संकोच नहीं करता था. एक दिन किसी बात को लेकर उस जमींदार का झगड़ा एक ब्राह्मण से हो गया. गुस्से में आकर ठाकुर ने उस ब्राह्मण की हत्या कर दी.
ब्राह्मण हत्या करने के बाद ठाकुर को अपने किए पर बड़ा पछतावा हुआ. उसने ब्राह्मण का अंतिम संस्कार करने की इच्छा जताई लेकिन अन्य ब्राह्मणों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि, तुम पर ब्रह्म हत्या का पाप है, जब तक तुम इस पाप से मुक्त नहीं हो जाते, तब तक तुम समाज से बेदखल रहोगे.
ठाकुर ने अपनी मुक्ति का उपाय पाने के लिए एक ऋषि से मदद मांगी. उन्होंने उसे कामिका एकादशी व्रत रखने की सलाह दी. उन्होंने ठाकुर को बताया कि, अगर तुम इस व्रत का विधिवत पालन करते हो, तो तुम्हें ब्रह्म हत्या के पाप से छुटकारा मिल जाएगा.
ऋषि के कहने पर ठाकुर ने एकादशी व्रत का पालन किया और भगवान विष्णु की पूजा-अराधना की. रात को जब वो सोने गया तब उसे सपने में भगवान श्रीहरि ने दर्शन दिए कि, तुम ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्त हो चुके हो. इस तरह कामिका एकादशी के पुण्य प्रभाव से उस क्रोधी ठाकुर को न सिर्फ ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिली बल्कि उसे अंत में मोक्ष की प्राप्ति हुई.
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