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Kartik Swami Murugan Temple: उत्तराखंड का रहस्यमयी मंदिर, जहां हड्डियों की होती है पूजा, वजह जानकर चौंक जाएंगे

Kartik Swami Murugan Temple: उत्तराखंड को यूं ही देवभूमि नहीं कहा जाता. यहां की पवित्र वादियों में अनगिनत मंदिर और तीर्थस्थल मौजूद हैं, जो श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं. इन्हीं में से एक है भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय को समर्पित एक ऐसा मंदिर, जो अपनी अनोखी परंपरा के कारण बाकी सभी मंदिरों से अलग पहचान रखता है.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: March 17, 2026 18:58:16 IST

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Kartik Swami Murugan Temple: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के कनकचौरी गांव के पास ऊंचाई पर स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा हुआ है. यहां तक पहुंचने के लिए भक्तों को पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है, लेकिन ऊपर पहुंचकर जो दृश्य मिलता है, वह मन को मंत्रमुग्ध कर देता है. सावन और शिवरात्रि जैसे खास अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.

इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां किसी भगवान की मूर्ति स्थापित नहीं है. आमतौर पर मंदिरों में प्रतिमा या शिवलिंग की पूजा की जाती है, लेकिन यहां एक प्राकृतिक शिला की आराधना होती है, जिसे भगवान कार्तिकेय की अस्थियों का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है कि यह मंदिर अपनी अनोखी मान्यता के लिए प्रसिद्ध है. बताया जाता है कि इस धाम का इतिहास लगभग दो सदियों पुराना है.

पौराणिक कथा से जुड़ी मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार भगवान गणेश और कार्तिकेय के बीच प्रतियोगिता हुई थी. इस प्रतिस्पर्धा में हार के बाद कार्तिकेय बेहद दुखी हो गए और पर्वतों की ओर चले गए. कहा जाता है कि उन्होंने अपने माता-पिता के प्रति प्रेम और समर्पण दिखाते हुए शरीर का त्याग कर दिया. इसी घटना के कारण इस स्थान को त्याग, प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है.

आस्था और प्रकृति का अनोखा संगम

कार्तिक स्वामी मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है. चारों ओर फैले पहाड़, शुद्ध हवा और शांत वातावरण इसे एक आध्यात्मिक अनुभव बना देते हैं. यही कारण है कि यहां आने वाले श्रद्धालु सिर्फ दर्शन ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति का भी अनुभव करते हैं.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: March 17, 2026 18:58:16 IST

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Kartik Swami Murugan Temple: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के कनकचौरी गांव के पास ऊंचाई पर स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा हुआ है. यहां तक पहुंचने के लिए भक्तों को पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है, लेकिन ऊपर पहुंचकर जो दृश्य मिलता है, वह मन को मंत्रमुग्ध कर देता है. सावन और शिवरात्रि जैसे खास अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.

इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां किसी भगवान की मूर्ति स्थापित नहीं है. आमतौर पर मंदिरों में प्रतिमा या शिवलिंग की पूजा की जाती है, लेकिन यहां एक प्राकृतिक शिला की आराधना होती है, जिसे भगवान कार्तिकेय की अस्थियों का प्रतीक माना जाता है. यही वजह है कि यह मंदिर अपनी अनोखी मान्यता के लिए प्रसिद्ध है. बताया जाता है कि इस धाम का इतिहास लगभग दो सदियों पुराना है.

पौराणिक कथा से जुड़ी मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार भगवान गणेश और कार्तिकेय के बीच प्रतियोगिता हुई थी. इस प्रतिस्पर्धा में हार के बाद कार्तिकेय बेहद दुखी हो गए और पर्वतों की ओर चले गए. कहा जाता है कि उन्होंने अपने माता-पिता के प्रति प्रेम और समर्पण दिखाते हुए शरीर का त्याग कर दिया. इसी घटना के कारण इस स्थान को त्याग, प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है.

आस्था और प्रकृति का अनोखा संगम

कार्तिक स्वामी मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है. चारों ओर फैले पहाड़, शुद्ध हवा और शांत वातावरण इसे एक आध्यात्मिक अनुभव बना देते हैं. यही कारण है कि यहां आने वाले श्रद्धालु सिर्फ दर्शन ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति का भी अनुभव करते हैं.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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