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Know Your Tradition: क्यों सदियों से हाथों में पहने जाते है कड़े और कंगन? जानें इसके पीछे छुपा शास्त्र

Know Your Tradition: कड़े और कंगन सिर्फ़ गहने से कहीं ज़्यादा क्यों हैं? जानें इसके पीछे छुपा इतिहास, आध्यात्मिक महत्व वैदिक काल में उनकी उत्पत्ति, शक्ति, सुरक्षा और शुभता के प्रतीक.

Written By: Shristi S
Last Updated: 2026-01-30 21:59:03

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Kangan And Kada Significance: जब भी हम अपने हाथ में कड़ा या कंगन पहनते है, तो इसे स्टाइल के तौर पर केवल एक फैशन एक्सेसररी मान लेते है. लेकिन इसके जड़े भारतीय परंपरा में काफी पुरानी है. यह केवल परंपरा नहीं बल्कि ऊर्जा संतुलन और सांस्कृतिक पहचान है. यह वह गहना है जो शरीर के सबसे ज्यादा चलने वाले हिस्से यानी की हाथों में पहना जाता है. भारत में कड़े और कंगन की परंपरा हजारों साल पुरानी है. जिसके जड़े वैदिक काल तक जाती है, वहीं हिंदू धर्म में शादी में दुल्हन को सोना पहनाना काफी शुभ माना जाता है. 

वैदिक काल से कड़े और कंगन का महत्व

जानकारी के मुताबिक, ऋग्वेद और अथर्ववेद में धातुओं के इस्तेमाल और उनसे मिलने वाली उर्जा के गुणों का उल्लेख मिलता है. वैदिक समाज में कड़ा और कंगन केवल स्त्रितयों तक ही सीमित नहीं थे बल्कि यह योद्धा, ऋषियों और गृहस्थ पुरुषों की कलाईयों कि भी शोभा बनाते थे. जहां योद्धाओं के लिए कड़ा शक्ति और रक्षा का प्रतीक था, वहीं ऋषियों के लिए कड़ा अनुशासन और आत्म संयम का प्रतीक माना जाता था. 

सोने को माना जाता है देवी लक्ष्मी का प्रतीक

सोना धन और समृद्धि का प्रतीक है. हिंदू धर्म में, देवी लक्ष्मी को धन की देवी माना जाता है. इसलिए, शादियों के दौरान दुल्हन को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है और इसीलिए शादी की रस्म के दौरान सोना पहनना महिलाओं के लिए शुभ माना जाता है. यही वजह है कि दुल्हन को गहनों से सजाया जाता है.

सोने के कंगन पहने का महत्व

ज्योतिष के अनुसार, सोने का ब्रेसलेट सौभाग्य और खुशी लाता है। सोना सबसे चमकदार धातु माना जाता है और माना जाता है कि यह कई पॉजिटिव एनर्जी को आकर्षित करता है। ये एनर्जी आत्म-संतुष्टि, स्थिरता और शांति को बढ़ावा देती हैं। कहा जाता है कि सोने का ब्रेसलेट पहनने से नेगेटिव प्रभावों का असर कम होता है और व्यक्ति की पर्सनैलिटी में सुरक्षात्मक गुण बढ़ते हैं। इसके अलावा, यह भी माना जाता है कि सोना पहनने से कुछ बीमारियों और ग्रहों के बुरे प्रभावों से राहत मिलती है।

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Know Your Tradition: कड़े और कंगन सिर्फ़ गहने से कहीं ज़्यादा क्यों हैं? जानें इसके पीछे छुपा इतिहास, आध्यात्मिक महत्व वैदिक काल में उनकी उत्पत्ति, शक्ति, सुरक्षा और शुभता के प्रतीक.

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Last Updated: 2026-01-30 21:59:03

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Kangan And Kada Significance: जब भी हम अपने हाथ में कड़ा या कंगन पहनते है, तो इसे स्टाइल के तौर पर केवल एक फैशन एक्सेसररी मान लेते है. लेकिन इसके जड़े भारतीय परंपरा में काफी पुरानी है. यह केवल परंपरा नहीं बल्कि ऊर्जा संतुलन और सांस्कृतिक पहचान है. यह वह गहना है जो शरीर के सबसे ज्यादा चलने वाले हिस्से यानी की हाथों में पहना जाता है. भारत में कड़े और कंगन की परंपरा हजारों साल पुरानी है. जिसके जड़े वैदिक काल तक जाती है, वहीं हिंदू धर्म में शादी में दुल्हन को सोना पहनाना काफी शुभ माना जाता है. 

वैदिक काल से कड़े और कंगन का महत्व

जानकारी के मुताबिक, ऋग्वेद और अथर्ववेद में धातुओं के इस्तेमाल और उनसे मिलने वाली उर्जा के गुणों का उल्लेख मिलता है. वैदिक समाज में कड़ा और कंगन केवल स्त्रितयों तक ही सीमित नहीं थे बल्कि यह योद्धा, ऋषियों और गृहस्थ पुरुषों की कलाईयों कि भी शोभा बनाते थे. जहां योद्धाओं के लिए कड़ा शक्ति और रक्षा का प्रतीक था, वहीं ऋषियों के लिए कड़ा अनुशासन और आत्म संयम का प्रतीक माना जाता था. 

सोने को माना जाता है देवी लक्ष्मी का प्रतीक

सोना धन और समृद्धि का प्रतीक है. हिंदू धर्म में, देवी लक्ष्मी को धन की देवी माना जाता है. इसलिए, शादियों के दौरान दुल्हन को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है और इसीलिए शादी की रस्म के दौरान सोना पहनना महिलाओं के लिए शुभ माना जाता है. यही वजह है कि दुल्हन को गहनों से सजाया जाता है.

सोने के कंगन पहने का महत्व

ज्योतिष के अनुसार, सोने का ब्रेसलेट सौभाग्य और खुशी लाता है। सोना सबसे चमकदार धातु माना जाता है और माना जाता है कि यह कई पॉजिटिव एनर्जी को आकर्षित करता है। ये एनर्जी आत्म-संतुष्टि, स्थिरता और शांति को बढ़ावा देती हैं। कहा जाता है कि सोने का ब्रेसलेट पहनने से नेगेटिव प्रभावों का असर कम होता है और व्यक्ति की पर्सनैलिटी में सुरक्षात्मक गुण बढ़ते हैं। इसके अलावा, यह भी माना जाता है कि सोना पहनने से कुछ बीमारियों और ग्रहों के बुरे प्रभावों से राहत मिलती है।

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