Lohri 2026 Date: लोहड़ी का त्योहोर कल, यानी 13 जनवरी मंगलवार के दिन मनाया जाएगा. लेकिन लोहड़ी का त्योहोर क्यों मनाया जाता है? जानें यहां इतिहास और महत्व
Lohri 2026 Date
Lohri 2026 Date: लोहड़ी का त्योहार इस साल यानी 2026 में कल,13 जनवरी मंगलवार के दिन मनाया जाएगा. लेकिन लोहड़ी के त्योहार की तैयारी एक दिन पहले ही, यानी आज 12 जनवरी की शाम से शुरू हो जाती है। लोग घरों में लकड़ियाँ जुटाने लगते हैं, गाने चलने हैं, रिश्तेदारों को बधाई देने के लिए फोन करते हैं और माहौल खूदबाखूद त्योहार वाला हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लोहड़ी का त्योहार क्यों मनाया जाता हैं? इसका इतिहास और महत्व क्या है? आइये जानते हैं यहां
लोहड़ी को आप ऐसे समझ सकते हैं जैसे सर्दीयों कोअलविदा कहना. यह एक तरह का पुराना फसल का त्योहार है, जिसे किसान अच्छी फसल की कामना करने और धरती का धन्यवाद देने के लिए मनाते हैं. लेकिन आज के समय में, लोहड़ी बस खेतों तक सीमित नहीं रही है, भारत के शहरो में लोग आग के चारों ओर खड़े होकर ठंड में गर्माहट महसूस करते हैं, ढोल बजते नाचते हैं, जिसकी वजह से किसानों के साथ-साथ यह त्योहार आम लोगों के लिए भी बेहद खास बन जाता है.
हर त्योहार के पीछे एक कहानी होती है, इसी वजह से लोहड़ी के त्योहार की कहानी भी बेहद दिलचस्प है, जिसमें एक नाम बार-बार आता है—दुल्ला भट्टी, जिसे पंजाब का लोकनायक कहा जाता है। दुल्ला भट्टी गलत के खिलाफ खड़े होने वाले इंसान थे। उन्होंने अपने जीवन में कई लड़कियों को जबरदस्ती और अन्याय से बचाया, उन लड़कियों की शादी सम्मान के साथ करवाई और वो सब किया जो उस समय लोग करने से डरते थे। यही वजह है कि जब लोहड़ी के गीत गाए जाते हैं और दुल्ला भट्टी का नाम आता है, तो वह सिर्फ गीत नहीं होता, वो एक इंसान की याद होते है जिसने समाज की सोच बदली है
लोहड़ी का त्योहार आज भी लोगों के लिए क्यों खास है, क्योंकि यह दिलों से जुड़ा है, क्योंकि, जो यह परिवारवालों के साथ मनाया जाता हैं, ऐसे में जो परिवार साल भर मुश्किल से मिल पाते हैं, वे भी लोहड़ी की शाम के लिए समय निकाल लेते हैं और परिवार के साथ खुशियां मनाते हैं. विदेश में रहने वाले लोग परविरा को वीडियो कॉल करते हैं बधाइयां देते हैं. इस दिन नए शादीशुदा जोड़े और नवजात बच्चों के लिए बेहद खास होता. मिठाइयों के साथ-साथ बढ़ों का आशीर्वाद भी मिलता है. उत्तर भारत में इस दौरान सर्दी कड़ी होती है, लेकिन लोहड़ी याद दिलाती है कि मौसम बदलने वाला है.
लोहड़ी के दिन जैसे ही शाम होने लगती है, तब अलाव जलाता है, लोग अपने-आप उसके चारों ओर इकट्ठा होने लगते हैं, कोई तय घेरा नहीं, बस जगह मिल जाए वहां खड़े हो जाते हैं। आग्नी में तिल, मूंगफली, रेवड़ी, पॉपकॉर्न डाले जाते हैं. संगीत शुरू होता है. लोग खूदबाखूद नाचने लगते हैं. मिठाइयाँ बाटते हैं. परिवार वालें के दूसरे को बधाइयां देते हैं. बड़े छोटों को आशीर्वाद देते हैं. लोहड़ी के दिन रेवड़ी, गजक, मूंगफली, गरम-गरम पॉपकॉर्न खाते हैं, जो सर्दियों में खाने से मजा आता है.. इस दिन कई घरो में सरसों का साग और मक्के की रोटी बनती हैं. इस दिन कोई दिखावे नहीं होता, बस इतना कहा जाता है—“लो, खाओ, लोहड़ी है।” यह त्योहार कोई बड़ा नहीं होता, लेकिन बेहद खास माना जाता हैं, लोग इसे दिल से मनाते हैं और परिवार वालों से जुड़ते हैं.
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.
सोशल मीडिया (Social Media) पर 'पंच' नाम का एक नन्हे बंदर (Baby Punch Monkey) का…
किसी कारण जैसे कोहरा पड़ने, मौसम या तकनीकी खराबी के चलते अगर ट्रेन लेट होती…
इस लेख में हम आपको दोनों बाइकों के अंतर के बारे में बताएंगे, जिससे आपके…
JEE IIT Course: 12वीं पास छात्र अक्सर IIT में पढ़ाई का सपना देखते हैं. अब,…
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 इस बार मार्च के तीसरे हफ्ते में शुरू होने…
Trump Tariff: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा…