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Maa Katyayani Aarti: नवरात्रि के छठे दिन शाम की पूजा में करें ‘जय जय अम्बे’ आरती का पाठ, यहां पढ़ें संपूर्ण लिरिक्स

Maa Katyayani Aarti Lyrics In Hindi: नौ दिनों तक चलने वाला चैत्र नवरात्रि 2026 का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की उपासना का विशेष विधान बताया गया है. इस दिन विधि-विधान से पूजा करने के बाद उनकी आरती करना अत्यंत शुभ माना जाता है.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: 2026-03-24 12:54:05

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Maa Katyayani Aarti: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के इन नौ दिनों में माता रानी की दिव्य शक्ति पूरे ब्रह्मांड में सबसे अधिक सक्रिय रहती है. इसलिए इस अवधि में की गई भक्ति और साधना का फल भी कई गुना अधिक मिलता है. नवरात्रि का हर दिन देवी के एक विशेष रूप को समर्पित होता है और छठा दिन मां कात्यायनी की आराधना के लिए खास माना जाता है.मां कात्यायनी को शक्ति, सौंदर्य और साहस का प्रतीक माना जाता है. उनका यह रूप अत्यंत तेजस्वी और प्रभावशाली है, जो बुराई के विनाश और धर्म की रक्षा के लिए जाना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी कात्यायनी ने ही राक्षसों का संहार कर संसार को उनके अत्याचारों से मुक्त कराया था. साथ ही, उन्हें भक्तों को अभय देने वाली और मनचाहा वरदान प्रदान करने वाली देवी के रूप में भी पूजा जाता है.

नवरात्रि के छठे दिन श्रद्धालु मां कात्यायनी के नाम का व्रत रखते हैं और सुबह-शाम उनकी पूजा पूरे विधि-विधान के साथ करते हैं. अगर आप भी मां कात्यायनी की कृपा पाना चाहते हैं, तो छठे दिन उनकी आरती का पाठ जरूर करें. यहां आप देवी कात्यायनी को समर्पित संपूर्ण आरती के लिरिक्स पढ़ सकते हैं, जो आपकी पूजा को पूर्णता प्रदान करते हैं.

मां कात्यायनी की आरती-1 

जय जय अम्बे जय कात्यायनी।
जय जगमाता जय महारानी॥

बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाती नाम पुकारा॥

कई नाम हैं कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है॥

हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी॥

हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते॥

कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की॥

झूठे मोह से छुड़ाने वाली।
अपना नाम जपाने वाली॥

बृहस्पतिवार को पूजा करिए।
ध्यान कात्यायनी का धरिए॥

हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी॥

मां कात्यायनी की आरती-2 

जय कात्यायनी माँ, मैया जय कात्यायनी माँ ।
उपमा रहित भवानी, दूँ किसकी उपमा ॥ मैया जय… 

गिरजापति शिव का तप, असुर रम्भ कीन्हाँ ।
वर-फल जन्म रम्भ गृह, महिषासुर लीन्हाँ ॥ मैया जय…

कर शशांक-शेखर तप, महिषासुर भारी ।
शासन कियो सुरन पर, बन अत्याचारी ॥ मैया जय… 

त्रिनयन ब्रह्म शचीपति, पहुँचे, अच्युत गृह ।
महिषासुर बध हेतू, सुर कीन्हौं आग्रह ॥ मैया जय…

सुन पुकार देवन मुख, तेज हुआ मुखरित ।
जन्म लियो कात्यायनी, सुर-नर-मुनि के हित ॥ मैया जय…

अश्विन कृष्ण-चौथ पर, प्रकटी भवभामिनि ।
पूजे ऋषि कात्यायन, नाम काऽऽत्यायिनी ॥ मैया जय… 

अश्विन शुक्ल-दशी को, महिषासुर मारा ।
नाम पड़ा रणचण्डी, मरणलोक न्यारा ॥ मैया जय…

दूजे कल्प संहारा, रूप भद्रकाली ।
तीजे कल्प में दुर्गा, मारा बलशाली ॥ मैया जय…

दीन्हौं पद पार्षद निज, जगतजननि माया ।
देवी सँग महिषासुर, रूप बहुत भाया ॥ मैया जय…

उमा रमा ब्रह्माणी, सीता श्रीराधा ।
तुम सुर-मुनि मन-मोहनि, हरिये भव-बाधा ॥ मैया जय…

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Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: 2026-03-24 12:54:05

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Maa Katyayani Aarti: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के इन नौ दिनों में माता रानी की दिव्य शक्ति पूरे ब्रह्मांड में सबसे अधिक सक्रिय रहती है. इसलिए इस अवधि में की गई भक्ति और साधना का फल भी कई गुना अधिक मिलता है. नवरात्रि का हर दिन देवी के एक विशेष रूप को समर्पित होता है और छठा दिन मां कात्यायनी की आराधना के लिए खास माना जाता है.मां कात्यायनी को शक्ति, सौंदर्य और साहस का प्रतीक माना जाता है. उनका यह रूप अत्यंत तेजस्वी और प्रभावशाली है, जो बुराई के विनाश और धर्म की रक्षा के लिए जाना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी कात्यायनी ने ही राक्षसों का संहार कर संसार को उनके अत्याचारों से मुक्त कराया था. साथ ही, उन्हें भक्तों को अभय देने वाली और मनचाहा वरदान प्रदान करने वाली देवी के रूप में भी पूजा जाता है.

नवरात्रि के छठे दिन श्रद्धालु मां कात्यायनी के नाम का व्रत रखते हैं और सुबह-शाम उनकी पूजा पूरे विधि-विधान के साथ करते हैं. अगर आप भी मां कात्यायनी की कृपा पाना चाहते हैं, तो छठे दिन उनकी आरती का पाठ जरूर करें. यहां आप देवी कात्यायनी को समर्पित संपूर्ण आरती के लिरिक्स पढ़ सकते हैं, जो आपकी पूजा को पूर्णता प्रदान करते हैं.

मां कात्यायनी की आरती-1 

जय जय अम्बे जय कात्यायनी।
जय जगमाता जय महारानी॥

बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाती नाम पुकारा॥

कई नाम हैं कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है॥

हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी॥

हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते॥

कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की॥

झूठे मोह से छुड़ाने वाली।
अपना नाम जपाने वाली॥

बृहस्पतिवार को पूजा करिए।
ध्यान कात्यायनी का धरिए॥

हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी॥

मां कात्यायनी की आरती-2 

जय कात्यायनी माँ, मैया जय कात्यायनी माँ ।
उपमा रहित भवानी, दूँ किसकी उपमा ॥ मैया जय… 

गिरजापति शिव का तप, असुर रम्भ कीन्हाँ ।
वर-फल जन्म रम्भ गृह, महिषासुर लीन्हाँ ॥ मैया जय…

कर शशांक-शेखर तप, महिषासुर भारी ।
शासन कियो सुरन पर, बन अत्याचारी ॥ मैया जय… 

त्रिनयन ब्रह्म शचीपति, पहुँचे, अच्युत गृह ।
महिषासुर बध हेतू, सुर कीन्हौं आग्रह ॥ मैया जय…

सुन पुकार देवन मुख, तेज हुआ मुखरित ।
जन्म लियो कात्यायनी, सुर-नर-मुनि के हित ॥ मैया जय…

अश्विन कृष्ण-चौथ पर, प्रकटी भवभामिनि ।
पूजे ऋषि कात्यायन, नाम काऽऽत्यायिनी ॥ मैया जय… 

अश्विन शुक्ल-दशी को, महिषासुर मारा ।
नाम पड़ा रणचण्डी, मरणलोक न्यारा ॥ मैया जय…

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तीजे कल्प में दुर्गा, मारा बलशाली ॥ मैया जय…

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देवी सँग महिषासुर, रूप बहुत भाया ॥ मैया जय…

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