Magh Mela 2026: हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, प्रयागराज को ‘तीर्थराज’ यानी सभी तीर्थ स्थलों का राजा कहा जाता है. मत्स्य पुराण और पद्म पुराण में बताया गया है कि जब पूरी सृष्टि की रचना होनी थी, तो भगवान ब्रह्मा ने यहां ‘अश्वमेध यज्ञ’ किया था. इस पहले यज्ञ के कारण ही इस जगह का नाम ‘प्रयाग’ (प्र – पहला, याग – यज्ञ) पड़ा.कल्पवास की कठिन तपस्या और समुद्र मंथन से जुड़ी पौराणिक कहानी जो यहां के पानी को पवित्र बनाती है?
हालांकि,प्रयागराज में माघ मेला लगने का सबसे बड़ा कारण अमृत की बूंदों को माना जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवताओं और राक्षसों ने समुद्र मंथन से निकले अमृत के घड़े के लिए लड़ाई की, तो अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी पर चार जगहों पर गिरीं – हरिद्वार, उज्जैन, नासिक और प्रयागराज. माघ के महीने में प्रयागराज में संगम का पानी अमृत जैसा हो जाता है, इसीलिए यहां स्नान करने से मोक्ष मिलता है.
कल्पवास के बारे में (Kalpvas Ritual Significance)
माघ मेले की सबसे अनोखी बात ‘कल्पवास’ है. पूरे एक महीने तक संगम के रेतीले किनारों पर सादा और संयमित जीवन जीना कल्पवास कहलाता है. कल्पवासी ज़मीन पर सोते हैं, दिन में सिर्फ़ एक बार खाना खाते हैं, और दिन में तीन बार गंगा में स्नान करते हैं. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति माघ के महीने में संगम के किनारे तपस्या और ध्यान करता है, उसे जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है.
माघ मेला 2026 की प्रमुख स्नान तिथि
- मकर संक्रांति
- मौनी अमावस्या
- बसंत पंचमी
- माघी पूर्णिमा
माघ महीने का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व
आध्यात्मिक नजरिए से, माघ का महीना ऊर्जा जमा करने का समय माना जाता है. वैज्ञानिक रूप से भी, इस समय गंगा नदी का पानी खास मिनरल्स और औषधीय गुणों के मामले में अपने चरम पर होता है. ये गुण शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने औमें मदद करते हैं. कड़ाके की ठंड में ठंडे पानी में डुबकी लगाने से इंसान की इच्छाशक्ति भी मजबूत होती है.