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Magh Purnima 2026: 1 या 2 फरवरी,माघ पूर्णिमा को लेकर कन्फ्यूजन खत्म, जानिए सही तारीख,स्नान-दान और मुहूर्त का समय

Magh Purnima 2026: इस बार पूर्णिमा की तिथि दो दिन पड़ने के वजह से लोगो के मन में माघ पूर्णिमा को लेकर भ्रम बना हुआ है.चलिए जानते है आखिर कब है, माघ पूर्णिमा और कब है स्नान-दान का शुभ समय.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: 2026-01-31 19:33:51

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Magh Purnima 2026: माघ पूर्णिमा को लेकर इस बार लोगों के मन में काफी भ्रम बना हुआ है. कोई इसे 1 फरवरी बता रहा है तो कोई 2 फरवरी को पूर्णिमा का व्रत रखने की बात कर रहा है. वजह है पंचांग में दी गई पूर्णिमा तिथि का दो दिन . ऐसे में सवाल उठना भी सही है कि माघ पूर्णिमा का स्नान-दान आखिर किस दिन करना शुभ रहेगा? आइए पंचांग और ज्योतिषीय मान्यताओं के आधार पर इसका साफ जवाब जानते हैं.

 माघ पूर्णिमा 2026 की सही तिथि क्या है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 1 फरवरी को सुबह 5 बजकर 52 मिनट से हो रही है, जबकि इसका समापन 2 फरवरी की सुबह 3 बजकर 38 मिनट पर होगा.चूंकि पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ दिन में हो रहा है और उदया तिथि भी 1 फरवरी को ही पड़ रही है, इसलिए माघ पूर्णिमा का व्रत, स्नान और दान 1 फरवरी को ही करना शास्त्रसम्मत माना गया है.

माघ पूर्णिमा 2026 स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पूर्णिमा के दिन स्नान और दान का सबसे उत्तम समय ब्रह्म मुहूर्त माना जाता है.

  • 1 फरवरी को ब्रह्म मुहूर्त का समय
  • सुबह 5:24 बजे से 6:17 बजे तक

इस अवधि में स्नान और दान करने से विशेष पुण्य, मानसिक शांति और इच्छाओं की पूर्ति का फल मिलता है.

 माघ पूर्णिमा पर कैसे करें पूजा?

माघ पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए. यदि किसी कारणवश नदी या संगम में स्नान संभव न हो, तो स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें.

इसके बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें.

  • पीले फूल
  • तुलसी दल
  • दीपक
  •  विष्णु सहस्रनाम का पाठ

इन सभी को पूजा में शामिल करना अत्यंत शुभ माना गया है. अंत में आरती कर प्रभु से अपने जाने-अनजाने दोषों के लिए क्षमा प्रार्थना करें.

 माघ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ पूर्णिमा के दिन देवताओं का पृथ्वी पर आगमन होता है और वे पवित्र नदियों में स्नान करते हैं. यही कारण है कि इस दिन गंगा, यमुना और संगम जैसे तीर्थस्थलों पर भारी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचते हैं.इसी दिन माघ मास में चलने वाले कल्पवास का भी समापन होता है. शास्त्रों में कहा गया है कि माघ पूर्णिमा के दिन श्रद्धा और नियम से किया गया स्नान-दान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होता है.

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