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Mahashivratri 2026: शिवजी को पान क्यों चढ़ाते हैं? धर्मग्रंथों में क्या है इस पत्ते का स्थान, ज्योतिषाचार्य से जानें

Mahashivratri 2026 Shiva Puja: इसबार महाशिवरात्रि का पर्व 15 अगस्त 2026 दिन रविवार को मनाया जाएगा. इस दिन भक्त देवों के देव महादेव की पूजा में पान के पत्ते जरूर चढ़ाते हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि पूजा-पाठ में पान क्यों चढ़ाया जाता है? पूजा में पान का उपयोग इतना महत्वपूर्ण क्यों है? इस बारे में India News को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: February 13, 2026 15:20:09 IST

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Mahashivratri 2026 Shiva Puja: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पावन मिलन का प्रतीक माना गया है. यह पर्व फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. इसबार महाशिवरात्रि का पर्व 15 अगस्त 2026 दिन रविवार को मनाया जाएगा. इस दिन भक्त देवों के देव महादेव को मनाने के लिए तमाम उपाय और उनकी पसंदीदा चीजें अर्पित करते हैं. लेकिन, आपको बता दें कि, महादेव की पूजा पान के पत्तों के बिना अधूरी मानी जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को ये हरा पत्ता अर्पित करने से वे प्रसन्न होते हैं, और अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि पूजा-पाठ में पान क्यों चढ़ाया जाता है? पूजा में पान का उपयोग इतना महत्वपूर्ण क्यों है? इस बारे में India News को बता रहे हैं उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र शास्त्री-

धर्मग्रंथों में पान के पत्ते का क्या है स्थान

शिवजी की पूजा में पान (ताम्बूल) अर्पित करना अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है. मान्यता है कि पान का पत्ता सभी देवी-देवताओं का वास स्थल है और यह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है. इसे सुख, समृद्धि, और सौभाग्य की वृद्धि के लिए चढ़ाया जाता है. यह नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर मन की एकाग्रता बढ़ाता है.

शिवजी को पान अर्पित करने की विधि

शिवरात्रि पर भगवान शिव को पान के पत्ते (तांबूल) अर्पित करना सुख-समृद्धि के लिए उत्तम माना जाता है. ताजा, साबुत पान के पत्ते के चिकने भाग पर चंदन लगाकर, डंठल (पीछे का हिस्सा) और आगे की नोक को थोड़ा तोड़कर, बिना चूने वाला बीड़ा बना कर शिवलिंग पर ‘ॐ नमः शिवाय’ कहते हुए अर्पित करें.

शिव पूजा में पान चढ़ाने के प्रमुख कारण

  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पान के पत्ते में कई देवताओं का वास होता है. इसके ऊपरी भाग में इन्द्र और शुक्र, मध्य में सरस्वती, और निचले हिस्से में लक्ष्मी जी का वास माना जाता है, जबकि शिव का स्थान बाहरी हिस्से में है. एक अन्य कथा के अनुसार, जब देवताओं और दैत्यों ने समुद्र मंथन किया था. तब सर्वप्रथम समुद्र देव की पूजा में पान के पत्ते का उपयोग किया गया था. इसलिए तब से यह प्रथा लगातार चली आ रही है.
  • महाशिवरात्रि और सावन के सोमवार या किसी भी दिन शिवलिंग पर चंदन लगाकर पान का पत्ता चढ़ाने से जातक के कष्ट दूर होते हैं और भगवान शिव प्रसन्न होकर मनोकामनाएं पूरी करते हैं. वहीं, भोग के बाद पान चढ़ाना ‘मुख शुद्धि’ (मुंह की सफाई) के लिए एक शास्त्रीय प्रतीक है, जो भगवान से शक्ति प्राप्त करने का एक तरीका माना जाता है. इसके अलावा, पान का पत्ता नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर पूजा में आने वाली बाधाओं को हटाता है. पान के पत्ते से जुड़ी ऐसी मान्यता है.

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Last Updated: February 13, 2026 15:20:09 IST

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