Vastu Tips For Main Door: वास्तु में प्रवेश द्वार को घर का “मुख” कहा गया है. जिस तरह शरीर का मुख सही हो तो भोजन और सांस ठीक से अंदर जाती है, उसी तरह सही दिशा में बना दरवाजा सकारात्मक ऊर्जा को भीतर आने देता है. अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि कोई एक दिशा हमेशा शुभ या हमेशा अशुभ होती है, लेकिन वास्तु शास्त्र इस धारणा को सही नहीं मानता. किसी भी दिशा में बना दरवाजा तब तक अच्छा माना जाता है, जब तक वह उस दिशा के सही पद या ग्रिड पर स्थित हो. गलत पद पर बना वही दरवाजा नकारात्मक प्रभाव देने लगता है.
दक्षिण दिशा का मुख्य द्वार
दक्षिण दिशा को लेकर लोगों में सबसे ज्यादा डर और भ्रम रहता है. आमतौर पर इसे अशुभ या मृत्यु से जोड़ दिया जाता है, लेकिन वास्तु के अनुसार यह सोच पूरी तरह गलत है. दक्षिण दिशा अपने आप में न तो पूरी तरह खराब है और न ही पूरी तरह शुभ. अगर इस दिशा में प्रवेश द्वार सही ग्रिड पर बनाया गया हो, तो यह घर में प्रतिष्ठा, धन और सफलता भी दिला सकता है. वहीं यदि यही द्वार गलत स्थान पर हो, तो समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. यही नियम पूर्व और उत्तर दिशा पर भी लागू होता है.
पूर्व दिशा का मुख्य द्वार
पूर्व दिशा को सूर्य की दिशा माना जाता है. इस दिशा में सही स्थान पर बना प्रवेश द्वार घर में नई ऊर्जा, अच्छे स्वास्थ्य और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है. ऐसे घरों में रहने वाले लोगों में आत्मविश्वास और मान-सम्मान बढ़ने की मान्यता है.
उत्तर दिशा का मुख्य द्वार
उत्तर दिशा कुबेर से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए इसे धन और अवसरों की दिशा कहा जाता है. अगर उत्तर दिशा में मुख्य द्वार सही पद पर स्थित हो, तो यह आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है, करियर में आगे बढ़ने के अवसर देता है और आय के नए स्रोत खोल सकता है.
मुख्य द्वार से जुड़े जरूरी वास्तु नियम
वास्तु शास्त्र के अनुसार प्रवेश द्वार मजबूत, साफ और देखने में सुंदर होना चाहिए. टूटा-फूटा या गंदा दरवाजा नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है. मुख्य द्वार का आकार घर के बाकी दरवाजों से थोड़ा बड़ा होना शुभ माना जाता है. इसके सामने कूड़ेदान, शौचालय, सीढ़ियां या कोई भारी खंभा नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे ऊर्जा का प्रवाह बाधित होता है. दरवाजे के आसपास पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए और वहां अंधेरा नहीं रहना चाहिए. शुभ प्रतीक, हरियाली या नाम-पट लगाना भी सकारात्मक वातावरण बनाने में मदद करता है.
सबसे ज्यादा नुकसानदायक प्रवेश द्वार कौन-सा माना जाता है?
वास्तु के अनुसार, दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम से लेकर दक्षिण-पश्चिम के बीच यदि मुख्य द्वार गलत पदों पर बना हो (S-6 से W-1 के बीच), तो इसे सबसे अधिक अशुभ माना जाता है. ऐसे द्वार का असर व्यक्ति की सोच, निर्णय क्षमता और आत्मविश्वास पर नकारात्मक पड़ सकता है. इसके कारण कर्ज बढ़ना, रिश्तों में तनाव, आर्थिक गिरावट और जीवन स्तर में कमी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. कुछ मामलों में अचानक बीमारी या दुर्घटना के योग भी बनते हैं. इस स्थिति में सामान्य वास्तु उपाय भी कई बार प्रभावी साबित नहीं होते.इसलिए घर बनवाते या खरीदते समय केवल दिशा ही नहीं, बल्कि प्रवेश द्वार का सही स्थान और ग्रिड भी जरूर जांचना चाहिए, ताकि जीवन में सकारात्मकता और संतुलन बना रहे.