इस साल 14 जनवरी को सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे. इसलिए इस तारीख को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाएगा. इस साल की मकर संक्रांति बहुत खास होने वाली है. दरअसल, मकर संक्रांति और एकादशी का संयोग करीब 23 साल बाद बन रहा है. इसी दिन षटतिला एकादशी भी पड़ रही है. इससे पहले मकर संक्रांति और एकादशी का ऐसा संयोग 2003 में बना था. आइए जानते हैं इस मकर संक्रांति पर पूजा-पाठ की विधि, जो षटतिला एकादशी के साथ पड़ रही है.
मकर संक्रांति पर दो शुभ योग
जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तो वह उत्तरायण हो जाता है. इसका मतलब है कि इस दिन से सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ना शुरू कर देता है. इस बार मकर संक्रांति पर दो शुभ योग भी बन रहे हैं. इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है, जिससे दान, पुण्य और पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है.
मकर संक्रांति के शुभ मुहूर्त
- पुण्य काल (शुभ अवधि): 14 जनवरी, दोपहर 3:04 बजे से शाम 5:57 बजे तक
- महा पुण्य काल (अत्यंत शुभ अवधि): दोपहर 3:04 बजे से 3:28 बजे तक
- स्नान और दान का शुभ समय: सुबह 9:03 बजे से 10:48 बजे तक
मकर संक्रांति पूजा विधि
मकर संक्रांति के दिन ब्रह्म मुहूर्त में सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में या घर पर स्नान करें. अगर आप घर पर स्नान कर रहे हैं, तो नहाने के पानी में तिल डालना शुभ माना जाता है. स्नान के बाद तांबे के बर्तन से सूर्य देव को जल चढ़ाएं. जल में लाल फूल, तिल और चावल के दाने डालें. इस दौरान, “ओम सूर्याय नमः” या “ओम घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप ज़रूर करें. क्योंकि यह दिन एकादशी के साथ भी पड़ रहा है, इसलिए भगवान विष्णु की पूजा करना न भूलें. उन्हें तिल और फलों से बने पकवान चढ़ाएं. उसके बाद, अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों को दान करें.