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Home > धर्म > Makar Sankranti 2026 Rules: मकर संक्रांति पर इन नियमों को अनदेखा करना पड़ सकता है भारी, जान लें नहीं तो सालभर कृपा से होंगे वंचित!

Makar Sankranti 2026 Rules: मकर संक्रांति पर इन नियमों को अनदेखा करना पड़ सकता है भारी, जान लें नहीं तो सालभर कृपा से होंगे वंचित!

Makar Sankranti 2026 Rules: सनातन धर्म में मकर संक्रांति को भगवान सूर्य देव से संबंधित माना जाता है, जिन्हें स्वयं सूर्य नारायण भी कहा जाता है. इस दिन सूर्य भगवान का धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश होता है और दक्षिणायन से उत्तरायण का प्रारंभ होता है.

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: January 11, 2026 07:25:56 IST

Makar Sankranti 2026 Rules: मकर संक्रांति अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार साल का पहला त्योहार है. इसे हिंदू धर्म के सबसे पावन और खगोलीय दृष्टि से काफी अहम माना जाता है. सनातन धर्म में मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) को भगवान सूर्य देव से संबंधित माना जाता है, जिन्हें स्वयं सूर्य नारायण भी कहा जाता है. यह पावन पर्व सेहत को भी सूचित करता है. इस दिन सूर्य भगवान का धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश होता है और दक्षिणायन से उत्तरायण का प्रारंभ होता है.

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, उत्तरायण काल को देवताओं का दिन कहा जाता है और इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा का विशेष फल लोगों को प्राप्त होता है. उत्तरायण के साथ ही सभी शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं, जैसे शादी, अनुष्ठान बगैरह. हालांकि, इस दिन कुछ जरूरी नियमों को हमें फॉलो करना चाहिए. नहीं तो इसका उल्टा प्रभाव देखने को मिल सकता है. 

सूर्य का मकर राशि में जाना क्यों है खास?

मकर संक्रांति के दिन के बाद कई चीजों में बदलाव होता है. सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश करना ऊर्जा, अनुशासन और सकारात्मकता का प्रतीक कहा जाता है. इसी दिन से सूर्य की गति उत्तर दिशा की ओर हो जाती है, जिसे शुभ माना जाता है. यह एक खगोलीय घटना है, जिसका प्रभाव इंसान के ऊपर पड़ता है. (Makar Sankranti 2026 Rules)

धार्मिक मान्यताओं की माने तो मकर संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले उठकर शुध्द जल से स्नान करना शुभ माना जाता है. स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए. जल में लाल कुमकुम और लाल फूल डाल लेना चाहिए. इस दिन बिना नहाए भोजन नहीं करना चाहिए. अगर आपकी रूटीन भी गड़बड़ चल रही हो तो इस दिन से खुद को एक चेलेंज की तरह लें और रुटीन को सुधार लें.

भोजन से संबंधित बातें

वैसे तो सूर्यास्त के बाद भोजन करने को लेकर शास्त्रों में भी निषेध बताया है. इससे हमारा डाइजेशन बिगड़ जाता है. और यही बात मकर संक्रांति पर सूर्यास्त के बाद भोजन करने पर भी लागू होती है. इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करने की सलाह दी जाती है. तिल और गुड़ से बने व्यंजन से ही दिन की शुरूआत करनी चाहिए और दान करनी चाहिए इससे सूर्य देव प्रसन्न होते हैं. (Makar Sankranti 2026 Rules)

खासकर तिल और गुड़ के लड्डू का भोग लगाकर स्वयं ग्रहण करना चाहिए. इस त्योहार के दिन लहसुन, प्याज, मांस, शराब और अन्य तामसिक भोजन को नहीं लेना चाहिए. कई स्थानों पर तो इस दिन रोटी बनाने से भी परहेज करते हैं. इस दिन लोग खिचड़ी पुण्यदायी भोजन मानते हैं और उसे ही खाते हैं. इस दिन वृक्षों और फसलों की कटाई और छंटाई से भी बचना चाहिए. 

 
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इंडिया न्यूज एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है.)

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Makar Sankranti 2026 Rules: मकर संक्रांति पर इन नियमों को अनदेखा करना पड़ सकता है भारी, जान लें नहीं तो सालभर कृपा से होंगे वंचित!

Makar Sankranti 2026 Rules: सनातन धर्म में मकर संक्रांति को भगवान सूर्य देव से संबंधित माना जाता है, जिन्हें स्वयं सूर्य नारायण भी कहा जाता है. इस दिन सूर्य भगवान का धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश होता है और दक्षिणायन से उत्तरायण का प्रारंभ होता है.

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: January 11, 2026 07:25:56 IST

Makar Sankranti 2026 Rules: मकर संक्रांति अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार साल का पहला त्योहार है. इसे हिंदू धर्म के सबसे पावन और खगोलीय दृष्टि से काफी अहम माना जाता है. सनातन धर्म में मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) को भगवान सूर्य देव से संबंधित माना जाता है, जिन्हें स्वयं सूर्य नारायण भी कहा जाता है. यह पावन पर्व सेहत को भी सूचित करता है. इस दिन सूर्य भगवान का धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश होता है और दक्षिणायन से उत्तरायण का प्रारंभ होता है.

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, उत्तरायण काल को देवताओं का दिन कहा जाता है और इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा का विशेष फल लोगों को प्राप्त होता है. उत्तरायण के साथ ही सभी शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं, जैसे शादी, अनुष्ठान बगैरह. हालांकि, इस दिन कुछ जरूरी नियमों को हमें फॉलो करना चाहिए. नहीं तो इसका उल्टा प्रभाव देखने को मिल सकता है. 

सूर्य का मकर राशि में जाना क्यों है खास?

मकर संक्रांति के दिन के बाद कई चीजों में बदलाव होता है. सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश करना ऊर्जा, अनुशासन और सकारात्मकता का प्रतीक कहा जाता है. इसी दिन से सूर्य की गति उत्तर दिशा की ओर हो जाती है, जिसे शुभ माना जाता है. यह एक खगोलीय घटना है, जिसका प्रभाव इंसान के ऊपर पड़ता है. (Makar Sankranti 2026 Rules)

धार्मिक मान्यताओं की माने तो मकर संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले उठकर शुध्द जल से स्नान करना शुभ माना जाता है. स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए. जल में लाल कुमकुम और लाल फूल डाल लेना चाहिए. इस दिन बिना नहाए भोजन नहीं करना चाहिए. अगर आपकी रूटीन भी गड़बड़ चल रही हो तो इस दिन से खुद को एक चेलेंज की तरह लें और रुटीन को सुधार लें.

भोजन से संबंधित बातें

वैसे तो सूर्यास्त के बाद भोजन करने को लेकर शास्त्रों में भी निषेध बताया है. इससे हमारा डाइजेशन बिगड़ जाता है. और यही बात मकर संक्रांति पर सूर्यास्त के बाद भोजन करने पर भी लागू होती है. इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करने की सलाह दी जाती है. तिल और गुड़ से बने व्यंजन से ही दिन की शुरूआत करनी चाहिए और दान करनी चाहिए इससे सूर्य देव प्रसन्न होते हैं. (Makar Sankranti 2026 Rules)

खासकर तिल और गुड़ के लड्डू का भोग लगाकर स्वयं ग्रहण करना चाहिए. इस त्योहार के दिन लहसुन, प्याज, मांस, शराब और अन्य तामसिक भोजन को नहीं लेना चाहिए. कई स्थानों पर तो इस दिन रोटी बनाने से भी परहेज करते हैं. इस दिन लोग खिचड़ी पुण्यदायी भोजन मानते हैं और उसे ही खाते हैं. इस दिन वृक्षों और फसलों की कटाई और छंटाई से भी बचना चाहिए. 

 
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इंडिया न्यूज एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है.)

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