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Makar Sankranti: मकर संक्रांति का ‘महादान’… खिचड़ी पर क्यों किया जाता काले तिल का दान? जानिए एक काम के अनेक लाभ

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति यानी खिचड़ी पर्व का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. यह हर साल 14-15 जनवरी को मनाई जाती है. धर्म शास्त्रों के अनुसार, इस दिन सूर्य देव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. इस दिन लोग प​वित्र नदियों में स्नान कर सूर्य देव की पूजा करते हैं. इस त्योहार पर तिल दान महादान माना गया है. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर तिल का दान किया क्यों जाता है? इस बारे में बता रहे हैं ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी-

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: January 12, 2026 18:11:08 IST

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति यानी खिचड़ी पर्व का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. यह हर साल 14-15 जनवरी को मनाई जाती है. धर्म शास्त्रों के अनुसार, इस दिन सूर्य देव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. इसके कारण इसे मकर संक्रांति कहा जाता है. इस दिन लोग प​वित्र नदियों में स्नान करते हैं, फिर सूर्य देव की पूजा करते हैं. खिचड़ी पर दान-पुण्य और तिल का बहुत महत्व है. इस त्योहार पर तिल न सिर्फ खाई जाती है, बल्कि इससे स्नान भी किया जाता है. यही वजह है कि इसे तिल संक्रांति भी कहा जाता है. इस त्योहार पर तिल दान महादान माना गया है. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर तिल का दान किया क्यों जाता है? तिल का दान करने से क्या होता है? मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का महत्व क्या है? इस बारे में India News को बता रहे हैं गाजियाबाद के ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी-

मकर संक्रांति पर काले तिल दान का महत्व

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, मकर संक्रांति पर तिल का दान सबसे प्रमुख माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, शनि देव ने अपने पिता सूर्य की पूजा काले तिल से ही की थी, जिससे खुश होकर सूर्य देव ने उन्हें मकर राशि का स्वामि बना दिया था. माना जाता है कि काले तिल का दान करने से शनि की दशा से मिलने वाले कष्टों से मुक्ति मिलती है.

मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ दान के लाभ

काले तिल का संबंध श​निदेव से है. जो लोग मकर संक्रांति पर काला तिल दान करते हैं, उन पर शनि और सूर्य दोनों की कृपा प्राप्त होती है. इससे शनि की साढ़ेसाती में लाभ मिलता है. उससे जुड़े कष्ट मिटते हैं. ऐसे ही जिन लोगों को पर ढैय्या का प्रभाव है, उनको भी लाभ मिलता है. काले तिल का दान करने से कुंडली का शनि दोष दूर होता है. इसके अलावा, गुड़ का संबंध सूर्य से है. जब आप मकर संक्रांति पर गुड़ का दान करते हैं तो कुंडली का सूर्य मजबूत होता है. सूर्य से जुड़े दोष दूर होते हैं. वहीं, मकर संक्रांति पर तिल दान करने से घर धन और धान्य से भर जाता है. जीवन में सुख और समृद्धि आती है. दरिद्रता दूर होती है.

काले तिल दान की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्य देव की दो पत्नियां थीं, जिनका नाम छाया और संज्ञा था. कहा जाता है कि शनि देव छाया के पुत्र थे और संज्ञा के पुत्र यमराज थे. एक बार छाया संज्ञा के पुत्र यमराज के साथ भेदभाव कर रही थीं, जिसे सूर्य देव ने देख लिया. यह देख सूर्य देव अत्यंत क्रोधित हुए और छाया एवं शनि को खुद से अलग कर दिया. घटना के बाद छाया और शनि देव सूर्य देव से नाराज़ हो गए और उन्होंने सूर्य देव को कुष्ठ रोग होने का श्राप दे दिया. जैसे ही यमराज ने देखा कि उनके पिता कष्ट में हैं तो उन्होंने कठोर तपस्या की और पिता सूर्य देव को कुष्ठ रोग से मुक्त कराया. 

वहीं, सूर्य देव ने गुस्से में शनि देव का घर ‘कुंभ’ (शनि देव की राशि) जला दिया. जिसके कारण शनि देव और उनकी माता को कष्ट हुआ. इसके बाद यमराज ने सूर्य देव से आग्रह किया. यमराज की बात सुनने के बाद सूर्य देव, शनि देव और छाया से मिलने के लिए उनके घर पहुंचे. वहां सब कुछ जल चुका था, लेकिन काला तिल ज्यों का त्यों था. सूर्य देव के घर आगमन पर शनि देव ने उनकी पूजा काले तिल से की, जिससे सूर्य देव प्रसन्न हुए और शनि देव को आशीर्वाद में दूसरा घर ‘मकर’ दिया. तभी से मान्यता है कि जो भी व्यक्ति मकर संक्रांति के दिन काले तिल से सूर्य देव की पूजा करेगा या काले तिल का दान करेगा, उसके सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाएंगे.

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Makar Sankranti: मकर संक्रांति का ‘महादान’… खिचड़ी पर क्यों किया जाता काले तिल का दान? जानिए एक काम के अनेक लाभ

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति यानी खिचड़ी पर्व का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. यह हर साल 14-15 जनवरी को मनाई जाती है. धर्म शास्त्रों के अनुसार, इस दिन सूर्य देव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. इस दिन लोग प​वित्र नदियों में स्नान कर सूर्य देव की पूजा करते हैं. इस त्योहार पर तिल दान महादान माना गया है. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर तिल का दान किया क्यों जाता है? इस बारे में बता रहे हैं ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी-

Written By: Lalit Kumar
Last Updated: January 12, 2026 18:11:08 IST

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति यानी खिचड़ी पर्व का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. यह हर साल 14-15 जनवरी को मनाई जाती है. धर्म शास्त्रों के अनुसार, इस दिन सूर्य देव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. इसके कारण इसे मकर संक्रांति कहा जाता है. इस दिन लोग प​वित्र नदियों में स्नान करते हैं, फिर सूर्य देव की पूजा करते हैं. खिचड़ी पर दान-पुण्य और तिल का बहुत महत्व है. इस त्योहार पर तिल न सिर्फ खाई जाती है, बल्कि इससे स्नान भी किया जाता है. यही वजह है कि इसे तिल संक्रांति भी कहा जाता है. इस त्योहार पर तिल दान महादान माना गया है. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर तिल का दान किया क्यों जाता है? तिल का दान करने से क्या होता है? मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का महत्व क्या है? इस बारे में India News को बता रहे हैं गाजियाबाद के ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी-

मकर संक्रांति पर काले तिल दान का महत्व

ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, मकर संक्रांति पर तिल का दान सबसे प्रमुख माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, शनि देव ने अपने पिता सूर्य की पूजा काले तिल से ही की थी, जिससे खुश होकर सूर्य देव ने उन्हें मकर राशि का स्वामि बना दिया था. माना जाता है कि काले तिल का दान करने से शनि की दशा से मिलने वाले कष्टों से मुक्ति मिलती है.

मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ दान के लाभ

काले तिल का संबंध श​निदेव से है. जो लोग मकर संक्रांति पर काला तिल दान करते हैं, उन पर शनि और सूर्य दोनों की कृपा प्राप्त होती है. इससे शनि की साढ़ेसाती में लाभ मिलता है. उससे जुड़े कष्ट मिटते हैं. ऐसे ही जिन लोगों को पर ढैय्या का प्रभाव है, उनको भी लाभ मिलता है. काले तिल का दान करने से कुंडली का शनि दोष दूर होता है. इसके अलावा, गुड़ का संबंध सूर्य से है. जब आप मकर संक्रांति पर गुड़ का दान करते हैं तो कुंडली का सूर्य मजबूत होता है. सूर्य से जुड़े दोष दूर होते हैं. वहीं, मकर संक्रांति पर तिल दान करने से घर धन और धान्य से भर जाता है. जीवन में सुख और समृद्धि आती है. दरिद्रता दूर होती है.

काले तिल दान की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्य देव की दो पत्नियां थीं, जिनका नाम छाया और संज्ञा था. कहा जाता है कि शनि देव छाया के पुत्र थे और संज्ञा के पुत्र यमराज थे. एक बार छाया संज्ञा के पुत्र यमराज के साथ भेदभाव कर रही थीं, जिसे सूर्य देव ने देख लिया. यह देख सूर्य देव अत्यंत क्रोधित हुए और छाया एवं शनि को खुद से अलग कर दिया. घटना के बाद छाया और शनि देव सूर्य देव से नाराज़ हो गए और उन्होंने सूर्य देव को कुष्ठ रोग होने का श्राप दे दिया. जैसे ही यमराज ने देखा कि उनके पिता कष्ट में हैं तो उन्होंने कठोर तपस्या की और पिता सूर्य देव को कुष्ठ रोग से मुक्त कराया. 

वहीं, सूर्य देव ने गुस्से में शनि देव का घर ‘कुंभ’ (शनि देव की राशि) जला दिया. जिसके कारण शनि देव और उनकी माता को कष्ट हुआ. इसके बाद यमराज ने सूर्य देव से आग्रह किया. यमराज की बात सुनने के बाद सूर्य देव, शनि देव और छाया से मिलने के लिए उनके घर पहुंचे. वहां सब कुछ जल चुका था, लेकिन काला तिल ज्यों का त्यों था. सूर्य देव के घर आगमन पर शनि देव ने उनकी पूजा काले तिल से की, जिससे सूर्य देव प्रसन्न हुए और शनि देव को आशीर्वाद में दूसरा घर ‘मकर’ दिया. तभी से मान्यता है कि जो भी व्यक्ति मकर संक्रांति के दिन काले तिल से सूर्य देव की पूजा करेगा या काले तिल का दान करेगा, उसके सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाएंगे.

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