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Makar Sankranti 2026: चंद्र नहीं, सौर पंचांग पर अनुसरण करती मकर संक्रांति, सभी हिंदू त्योहारों से है अलग

Makar Sankranti: मकर संक्रांति का त्योहार हर साल एक ही तारीख पर आता है, क्योंकि यह सूरज की चाल को देखकर मनाया जाता है. यह कोई योग नहीं, बल्कि एक गहरी खगोलीय और आध्यात्मिक घटना से जुड़ा है. आइये जानते हैं यहां मकर संक्रांति का त्योहार सभीं हिंदू त्योहारों से क्यों अलग है और क्यों है ये खास

Written By: Chhaya Sharma
Last Updated: 2026-01-14 15:26:21

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Why Is Makar Sankranti Different From Other Hindu Festivals? आज मकर संक्रांति का त्योहार पूरे भारत में बेहद धूमधाम से मनाया जा रहा हैं, यह साल का पहला बड़ा हिंदू फेस्टिवल होता है, जो बेहद खास होता है. मकर संक्रांति का त्योहार सभी त्योहारों से अलग माना जाता है, क्योंकि जहां ज्यादातर त्योहार चाँद की चाल से तय होते हैं, वहीं मकर संक्रांति का त्योहार सूरज की चाल को देखकर मनाया जाता है, इसी वजह से यह त्योहार हर साल एक ही तारीख पर आता है 14 जनवरी (कभी-कभी 15 जनवरी). मकर संक्रांति का एक ही डेट पर आना कोई योग नहीं, बल्कि एक गहरी खगोलीय और आध्यात्मिक घटना से जुड़ा है.

मकर संक्रांति का पर्व सभी त्योहारो से अलग

जब सूर्य ग्रह धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं, इसे ही मकर संक्रांति कहते हैं, मकर का मतलब होता है मगरमच्छ और संक्रांति का मतलब होता है परिवर्तन. मकर संक्रांति के दिन सूर्य का यह परिवर्तन का असर केवल आसमान में नहीं, बल्कि धरती और मनुष्य के जीवन पर भी होता है. इस दिन से सूर्य उत्तरायण की शुरूआत होता है यानी दिन लंबे होने लगते हैं और रातें धीरे-धीरे छोटी हो जाती है. प्रकृति की भाषा में कहें तो, यह अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का समय होता है और नए आरंभ होता है. इसी वजह से  मकर संक्रांति का पर्व सभी त्योहारो से अलग माना जाता है.  

चंद्र पंचांग पर नहीं सौर पंचांग पर अनुसरण करती मकर संक्रांति

जहां सभी हिंदू त्योहार चंद्र पंचांग पर आधारित होते हैं, वहां मकर संक्रांति सौर पंचांग का अनुसरण करती है. इसलिए इस त्योहार का खेती और मौसम से गहरा रिश्ता होता है.यह वो खास समय होता है जब खेतों से फसल कट चुकी होती है, किसानों के अन्न घर आ चुका होता है और मन में संतोष होता है. इसलिए मकर संक्रांति का यह त्योहार केवल पूजा पाठ का नहीं, बल्कि कृतज्ञता का भी उत्सव है. गावो के सभी लोग मेजी जलती है, तिल और चावल से बने पकवान खाते हैं. वैसे तो भारत के अलग-अलग हिस्से में अलग-अलग रूप दिखता है, कहीं लोग इस दिन तिल और गुड़ से मिठाइयां बनते हैं, वहीं कही जगह मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने का रिवाज है कई जगहों पर इस पर्व पर पतंगें भी आसमान में उड़ाते हैं, लेकिन मकर संक्रांति के त्योहार का भाव सभी के लिए एक-सा है. 

मकर संक्रांति के दिन होती है सूर्य की पूजा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य की उपासना की जाती है, कहा जाता है कि इस दिन सूर्य की किरणें शक्तिशाली और अमृततुल्य मानी जाती हैं, मकर संक्रांति के दिन पृथ्वी पर सूर्य की ऊर्जा सकारात्मक प्रभाव देती है, जो शरीर और मन को शुद्ध करती है और स्वास्थ्य, आत्मबल, ज्ञान एवं समृद्धि लाता है. इस दिन सूर्य को अर्घ्य देना, सूर्य के मंत्रों का जाप करना. साथ ही दान करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है, जीवन की परेशानियां खत्म होती है, व्यक्ति रोग मुक्त होता हैस मानसिक तनाव खत्म होता है. साथ ही कुंडली में पितृ दोष से मुक्ति मिलती है. इसके अलावा मकर संक्रांति के दिन किया गया दानविशेष फल देता है. 

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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