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Mangalsutra Religious Significance: क्या है स्त्रियों के मंगलसूत्र का पहनने का महत्व, डिजाइन और फायदे, शास्त्रों में उल्लेख?

Mangalsutra Religious Significance: मंगलसूत्र दो शब्द मंगल और सूत्र से मिलकर बना है. मंगल का अर्थ शुभ और सूत्र का मतलब धागा है. इसका मतलब एक ऐसा धागा जो शुभ का सूचक माना जाता है.

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: January 3, 2026 15:29:35 IST

Mangalsutra Religious Significance:  भारत एक धार्मिक देश है और यहां पर कई तरह की विविधताएं देखने को मिलती है. तभी तो पूरी दुनिया में भारत की तरफ लोगों का एक अलग ही नजरिया होता है. साथ ही यहां पर शादियों का क्रेज भी काफी ज्यादा देखा जाता है. भारत में पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक शादियों का रिवाज अलग-अलग होत है. लेकिन इन सबमें एक बात कॉमन होती है, वह है मंगलसूत्र.

यह धागा पति अपनी पत्नी के गले में पहनाता है और उसकी जीवन भर की जिम्मेदारी लेता है. बता दें कि भारत में कई तरह की संस्कृतियां पाई जाती हैं. यहां पर हर 10 किमी पर आपको एक अलग तरह की मान्यता और संस्कृति देखने को मिल जाती है. मंगलसूत्र भारत में प्रेम, विवाह और परंपरा का प्रतिनिधित्व करता रहा है. यह काले मोतियों और सोने या प्लास्टिक की पतली डोरी से बना हुआ रहता है, जिसके बीच में सोने का पेडल लगा रहता है. मंगलसूत्र के तौर पर पहचाने जाने वाला यह पवित्र धागा हिंदू विवाहों में काफी महत्व रखता है.

कई डिजाइन में और सांस्कृतिक महत्व

मंगलसूत्र दो शब्द मंगल और सूत्र से मिलकर बना है. मंगल का अर्थ शुभ और सूत्र का मतलब धागा है. इसका मतलब एक ऐसा धागा जो शुभ का सूचक माना जाता है. भारत की महिलाएं इसे अपने सुहाग से जोड़कर बताती हैं. भारत में कई तरह के डिजाइन वाले मंगलसूत्र पाए जाते हैं.तमिल से लेकर बंगाल तक के मंगलसूत्र में एक अलग ही तरह की झलक मिलती है. आइए जानते हैं कि किस क्षेत्र में किस तरह का मंगलसूत्र यूज होता है.

उत्तर भारत में मंगलसूत्र

देश में कई तरह के रीति रिवाजों को चलते अलग-अलग तरह के मंगलसूत्रों के बारे में जानकारी मिलती है. उत्तर भारत की बात की जाए तो यहां पर मंगलसूत्र पर काले और सोने के मोतियों का यूज किया जाता है. काले मोतियों को नेगेटिविटी से सुरक्षा के तौर पर लगाया जाता है. सोने के पेंडेट डिजाइनों में एक आकर्षकता को बढ़ाता है.

कश्मीर के कई इलाकों में मूल रूप से कान की सजावट, अब इसे शिव और शक्ति के विवाह का प्रतिनिधित्व करने वाले मंगलसूत्र के रूप में पहना जाता है. बिहार के तागपाग से जुड़े इलाकों में मंगलसूत्र डिजाइन अपने चाप के आकार के पेंडेंट और काले मनके वाली चेन के लिए जाना जाता है.

पश्चिमी भारत

अगर बात महाराष्ट्र और गुजरात की हो तो यहां पर लोकप्रिय वटी मंगलसूत्र में छोटे सोने के कप के आकार के पेंडेंट देखने को मिलते हैं. इन्हें वटी कहते हैं. ये पेंडेंट पुरुष और स्त्री तत्वों के विलय को दर्शाते हैं. इन्हें शिव और पार्वती द्वारा दर्शाया जाता है. यह डिजाइन आकर्षक, भव्य और अहम है. इसमें सोने की वटी साथ काले और सोने के मोतियों की दो लड़ियां स्वर्गीय एकता का प्रतिनिधित्व करती है.

दक्षित भारत

दक्षिण भारत में मंगलसूत्र को कई नामों के जानते हैं. इसमें थाली, मिन्नू और मंगलसूत्रमू शामिल हैं. इन पैटर्न में आमतौर पर धार्मिक रूपांकन शामिल होते हैं और ये सोने से बने होते हैं, जो समृध्दि और सुरक्षा का प्रतिनिधित्व करते हैं. पीले धागे का यूज कई जगहों पर होता है क्योंकि ये आभूषणों को अलग ही रूप देते हैं और पीला शुभ का प्रतीक भी माना जाता है. थाली को तमिलनाडु के लोग पारिवारिक देवता, देवी मीनाक्षी और भगवान शिव का प्रतीक मानते हैं. वहीं मिन्नू केरल में मंगलसूत्र के नाम से जानते हैं. सीरियाई ईसाई दिल के आकार के पदक पर क्रॉस पहनते हैं. 

पूर्वी भारत के रिवाज

अगर बात की जाए बंगाल की तो यहां दुल्हन मंगलसूत्र के स्थान पर शंक और मूंगा से बने शाखा पौला कंगन का यूज करती हैं. ये चूड़ियां वैवाहिक स्थिति का प्रतीक हैं और बंगाली परंपराओं का एक अभिन्न अंग हैं. ये चूड़ियां अपनी सादगी और शान के लिए जानी जाती हैं. मंगलसूत्र को पति के जीवन रक्षा और दोनों जोड़ों की समृध्दि का प्रतीक माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि सोना धन और शक्ति का प्रतीक है वहीं, काला मोती बुरी आत्मा को दूर करता है. 

क्या हैं मंगलसूत्र पहनने के फायदे

विवाह के टाइम पर सभी की नजरें दोनों दूल्हे और दुल्हन पर रहती है. ऐसे में यह बुरी नजर से सुरक्षा प्रदान करता है. साथ ही यह सोने का स्वामी बृहस्पति ग्रह माना जाता है. क्योंकि यह सुख और समृध्दि को दर्शाता है.वहीं काले रंग को शनि से जोड़कर देखा जाता है. इसलिए यह हर तरह से प्रभवकारी है. मंगलसूत्र वफादारी को दर्शाता है. इसके अलावा शास्त्रों के मुताबिक, सोना पहनना शरीर की शुध्दि होती है. यह जीवनसाथी के लिए प्रेम का प्रतीक माना जाता है.   

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Mangalsutra Religious Significance: क्या है स्त्रियों के मंगलसूत्र का पहनने का महत्व, डिजाइन और फायदे, शास्त्रों में उल्लेख?

Mangalsutra Religious Significance: मंगलसूत्र दो शब्द मंगल और सूत्र से मिलकर बना है. मंगल का अर्थ शुभ और सूत्र का मतलब धागा है. इसका मतलब एक ऐसा धागा जो शुभ का सूचक माना जाता है.

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: January 3, 2026 15:29:35 IST

Mangalsutra Religious Significance:  भारत एक धार्मिक देश है और यहां पर कई तरह की विविधताएं देखने को मिलती है. तभी तो पूरी दुनिया में भारत की तरफ लोगों का एक अलग ही नजरिया होता है. साथ ही यहां पर शादियों का क्रेज भी काफी ज्यादा देखा जाता है. भारत में पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक शादियों का रिवाज अलग-अलग होत है. लेकिन इन सबमें एक बात कॉमन होती है, वह है मंगलसूत्र.

यह धागा पति अपनी पत्नी के गले में पहनाता है और उसकी जीवन भर की जिम्मेदारी लेता है. बता दें कि भारत में कई तरह की संस्कृतियां पाई जाती हैं. यहां पर हर 10 किमी पर आपको एक अलग तरह की मान्यता और संस्कृति देखने को मिल जाती है. मंगलसूत्र भारत में प्रेम, विवाह और परंपरा का प्रतिनिधित्व करता रहा है. यह काले मोतियों और सोने या प्लास्टिक की पतली डोरी से बना हुआ रहता है, जिसके बीच में सोने का पेडल लगा रहता है. मंगलसूत्र के तौर पर पहचाने जाने वाला यह पवित्र धागा हिंदू विवाहों में काफी महत्व रखता है.

कई डिजाइन में और सांस्कृतिक महत्व

मंगलसूत्र दो शब्द मंगल और सूत्र से मिलकर बना है. मंगल का अर्थ शुभ और सूत्र का मतलब धागा है. इसका मतलब एक ऐसा धागा जो शुभ का सूचक माना जाता है. भारत की महिलाएं इसे अपने सुहाग से जोड़कर बताती हैं. भारत में कई तरह के डिजाइन वाले मंगलसूत्र पाए जाते हैं.तमिल से लेकर बंगाल तक के मंगलसूत्र में एक अलग ही तरह की झलक मिलती है. आइए जानते हैं कि किस क्षेत्र में किस तरह का मंगलसूत्र यूज होता है.

उत्तर भारत में मंगलसूत्र

देश में कई तरह के रीति रिवाजों को चलते अलग-अलग तरह के मंगलसूत्रों के बारे में जानकारी मिलती है. उत्तर भारत की बात की जाए तो यहां पर मंगलसूत्र पर काले और सोने के मोतियों का यूज किया जाता है. काले मोतियों को नेगेटिविटी से सुरक्षा के तौर पर लगाया जाता है. सोने के पेंडेट डिजाइनों में एक आकर्षकता को बढ़ाता है.

कश्मीर के कई इलाकों में मूल रूप से कान की सजावट, अब इसे शिव और शक्ति के विवाह का प्रतिनिधित्व करने वाले मंगलसूत्र के रूप में पहना जाता है. बिहार के तागपाग से जुड़े इलाकों में मंगलसूत्र डिजाइन अपने चाप के आकार के पेंडेंट और काले मनके वाली चेन के लिए जाना जाता है.

पश्चिमी भारत

अगर बात महाराष्ट्र और गुजरात की हो तो यहां पर लोकप्रिय वटी मंगलसूत्र में छोटे सोने के कप के आकार के पेंडेंट देखने को मिलते हैं. इन्हें वटी कहते हैं. ये पेंडेंट पुरुष और स्त्री तत्वों के विलय को दर्शाते हैं. इन्हें शिव और पार्वती द्वारा दर्शाया जाता है. यह डिजाइन आकर्षक, भव्य और अहम है. इसमें सोने की वटी साथ काले और सोने के मोतियों की दो लड़ियां स्वर्गीय एकता का प्रतिनिधित्व करती है.

दक्षित भारत

दक्षिण भारत में मंगलसूत्र को कई नामों के जानते हैं. इसमें थाली, मिन्नू और मंगलसूत्रमू शामिल हैं. इन पैटर्न में आमतौर पर धार्मिक रूपांकन शामिल होते हैं और ये सोने से बने होते हैं, जो समृध्दि और सुरक्षा का प्रतिनिधित्व करते हैं. पीले धागे का यूज कई जगहों पर होता है क्योंकि ये आभूषणों को अलग ही रूप देते हैं और पीला शुभ का प्रतीक भी माना जाता है. थाली को तमिलनाडु के लोग पारिवारिक देवता, देवी मीनाक्षी और भगवान शिव का प्रतीक मानते हैं. वहीं मिन्नू केरल में मंगलसूत्र के नाम से जानते हैं. सीरियाई ईसाई दिल के आकार के पदक पर क्रॉस पहनते हैं. 

पूर्वी भारत के रिवाज

अगर बात की जाए बंगाल की तो यहां दुल्हन मंगलसूत्र के स्थान पर शंक और मूंगा से बने शाखा पौला कंगन का यूज करती हैं. ये चूड़ियां वैवाहिक स्थिति का प्रतीक हैं और बंगाली परंपराओं का एक अभिन्न अंग हैं. ये चूड़ियां अपनी सादगी और शान के लिए जानी जाती हैं. मंगलसूत्र को पति के जीवन रक्षा और दोनों जोड़ों की समृध्दि का प्रतीक माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि सोना धन और शक्ति का प्रतीक है वहीं, काला मोती बुरी आत्मा को दूर करता है. 

क्या हैं मंगलसूत्र पहनने के फायदे

विवाह के टाइम पर सभी की नजरें दोनों दूल्हे और दुल्हन पर रहती है. ऐसे में यह बुरी नजर से सुरक्षा प्रदान करता है. साथ ही यह सोने का स्वामी बृहस्पति ग्रह माना जाता है. क्योंकि यह सुख और समृध्दि को दर्शाता है.वहीं काले रंग को शनि से जोड़कर देखा जाता है. इसलिए यह हर तरह से प्रभवकारी है. मंगलसूत्र वफादारी को दर्शाता है. इसके अलावा शास्त्रों के मुताबिक, सोना पहनना शरीर की शुध्दि होती है. यह जीवनसाथी के लिए प्रेम का प्रतीक माना जाता है.   

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