Narsingh Dwadashi 2026: फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को नरसिंह द्वादशी मनाई जाती है. भगवान नरसिंह को समर्पित यह व्रत होली से करीब तीन दिन पहले रखा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत-पूजन से अज्ञात भय दूर होता है, घर के झगड़े शांत होते हैं और शत्रु परास्त होते हैं. आइए जानते हैं कि, आखिर साल 2026 में नरसिंह द्वादशी का व्रत कब रखा जाएगा? नरसिंह द्वादशी का व्रत करने से क्या लाभ मिलते हैं? इस व्रत का महत्व और पूजा विधि क्या है?
जानिए, साल 2026 में नरसिंह द्वादशी कब है? (Canva)
Narsingh Dwadashi 2026: सनातन धर्म में व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व है. नरसिंह द्वादशी ऐसे ही व्रतों में से एक है. फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को नरसिंह द्वादशी के रूप में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है. भगवान नरसिंह (नृसिंह) को समर्पित यह व्रत होली से करीब तीन दिन पहले रखा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत-पूजन से अज्ञात भय दूर होता है, घर के झगड़े शांत होते हैं और शत्रु परास्त होते हैं. ऐसे में जो लोग डर, तनाव या विरोधियों से परेशान हैं, उन्हें यह व्रत जरूर करना चाहिए. अब सवाल है कि आखिर साल 2026 में नरसिंह द्वादशी का व्रत कब रखा जाएगा? नरसिंह द्वादशी का व्रत करने से क्या लाभ मिलते हैं? इस व्रत का महत्व और पूजा विधि क्या है? इस बारे में India News को बता रहे हैं नोएडा के ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी-
पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि की शुरुआत 27 फरवरी को 10 बजकर 32 मिनट के लगभग पर हो रही है. वहीं इसका समापन 28 फरवरी को रात में 8 बजकर 43 मिनट के लगभग पर होगा. इसके चलते नरसिंह द्वादशी 28 फरवरी को मनाई जाएगी और व्रत भी इसी दिन रखा जाएगा.
ज्योतिषाचार्य के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को नरसिंह द्वादशी के रूप में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है. यह पर्व भगवान विष्णु के चौथे अवतार, भगवान नरसिंह से हुआ है. धार्मिक कथाओं के अनुसार, भगवान नरसिंह ने अपने परम भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए असुर राजा हिरण्यकश्यप का संहार किया था.
मान्यता है कि नरसिंह द्वादशी का व्रत रखने से साधक पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनी रहती है. इस व्रत से पापों का क्षय होता है और मन से भय दूर होता है. माना जाता है कि सच्चे मन से व्रत करने वाले भक्त की रक्षा स्वयं भगवान नरसिंह करते हैं, जैसे उन्होंने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी. उनकी पूजा से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, शत्रुओं का प्रभाव कम होता है और व्यक्ति को अंततः मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग मिलता है.
नरसिंह द्वादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र धारण कर लें. घर के पूजा स्थल को साफ कर लें और भगवान नरसिंह की प्रतिमा या चित्र को स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा शुरू करें. पूजा में भगवान को फूल, फल, मिष्ठान और पंचामृत आदि अर्पित करें. फिर पूर्व या उत्तर दिशा में अपना मुख पूजा करें और भगवान के प्रति पूरी श्रद्धा रखें. इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम, नरसिंह स्तोत्र के साथ ही भगवान विष्णु की आरती कर पूजा को पूरा करें. भगवान को अर्पित किए भोग को परिवार में बांटें.
1. नरसिंह सुरक्षा मंत्र
ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्.
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युं मृत्युं नमाम्यहम्॥
2. नरसिंह गायत्री मंत्र
ॐ वज्र-नखाय विद्महे, तीक्ष्ण-द्रंष्टाय धीमहि.
तन्नो नारसिंह: प्रचोदयात्..
3. नृसिंह स्तुति
नमस्ते नरसिंहाय प्रह्लादाह्लाद-दायिने.
हिरण्यकशिपोर्वक्षः-शिला-टङ्क-नखालये..
इतो नृसिंहः परतो नृसिंहो यतो यतो यामि ततो नृसिंहः.
बहिरनृसिंहो हृदये नृसिंहो नृसिंहमादि शरणं प्रपद्ये॥
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