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Home > धर्म > नवरात्रि  में उगे जौ के अंकुरों में छिपा है भाग्य का संकेत! कहीं ये आपके जीवन में बड़े बदलाव का इशारा तो नहीं

नवरात्रि  में उगे जौ के अंकुरों में छिपा है भाग्य का संकेत! कहीं ये आपके जीवन में बड़े बदलाव का इशारा तो नहीं

Navratri 2026:चैत्र नवरात्रि का पर्व शुरू होते ही घर-घर में मां दुर्गा की पूजा का माहौल बन जाता है. इस पावन समय में घटस्थापना का विशेष महत्व माना गया है.लेकिन क्या आप जानते हैं, घटस्थापना में बोए गए जौ के अंकुरों का रंग आपका भविष्य बता सकता है.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: March 18, 2026 16:57:02 IST

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Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पर्व शुरू होते ही घर-घर में मां दुर्गा की पूजा का माहौल बन जाता है. इस पावन समय में घटस्थापना का विशेष महत्व माना गया है. परंपरा के अनुसार, कलश स्थापना के दौरान मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं. यह सिर्फ एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी मान्यताएं और संकेत भी जुड़े होते हैं. कहा जाता है कि नवरात्र में उगने वाले जौ के अंकुर आने वाले समय के शुभ-अशुभ संकेत देते हैं.

सनातन परंपरा में शकुन-अपशकुन का विशेष स्थान है. मान्यता है कि घटस्थापना के समय बोए गए जौ तीसरे दिन से अंकुरित होने लगते हैं और उनका रंग, आकार और स्थिति जीवन के अलग-अलग पहलुओं के बारे में संकेत देती है. यह भी माना जाता है कि जौ की स्थिति से पूरे साल के उतार-चढ़ाव का अंदाजा लगाया जा सकता है. इसलिए नवरात्रि में जौ बोने और उनकी देखभाल को बहुत ही सावधानी से किया जाता है.

अंकुरों के रंग क्या बताते हैं?

  • जौ के अंकुरों का रंग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. अगर अंकुर दूधिया सफेद दिखाई दें, तो इसे सबसे शुभ संकेत माना जाता है. इसका मतलब है कि आपकी पूजा सफल रही और आने वाला समय सुख-समृद्धि से भरा हो सकता है.
  • अगर अंकुर गहरे हरे रंग के हों, तो यह भी अच्छा संकेत है. यह घर में खुशहाली, स्थिरता और धन-धान्य की वृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसे मां दुर्गा की विशेष कृपा का संकेत भी माना जाता है.
  • वहीं अगर जौ का रंग काला पड़ने लगे, तो इसे अशुभ माना जाता है. यह आर्थिक परेशानियों या धन की कमी का इशारा कर सकता है. ऐसे में दान-पुण्य करने की सलाह दी जाती है.
  • अगर अंकुर मटमैले या धुएं जैसे रंग के दिखें, तो यह घर में तनाव, कलह या मानसिक अशांति का संकेत हो सकता है. वहीं लाल रंग के अंकुर किसी बीमारी, शत्रु बाधा या मुश्किल समय का संकेत माने जाते हैं.

अंकुरों की स्थिति और बनावट 

  • सिर्फ रंग ही नहीं, बल्कि जौ के अंकुरों की बनावट और उनकी स्थिति भी कई बातें बताती है. अगर जौ बिल्कुल भी अंकुरित नहीं होते, तो इसे अच्छा संकेत नहीं माना जाता. यह जीवन में रुकावट या किसी अनहोनी की ओर इशारा कर सकता है.
  • अगर अंकुर आधे हरे और आधे पीले दिखाई दें, तो इसका मतलब है कि साल की शुरुआत चुनौतियों से भरी हो सकती है, लेकिन बाद में स्थितियां बेहतर हो जाएंगी.
  • यदि जौ के अंकुर बहुत छोटे रह जाएं, तिरछे उगें या गिरने लगें, तो यह अस्थिरता, परेशानी या बाहरी बाधाओं का संकेत माना जाता है. ऐसे संकेत मिलने पर सतर्क रहने की सलाह दी जाती है.

नवरात्र में जौ से जुड़े उपाय

  • नवरात्र के अंत में जौ का विसर्जन करते समय कुछ विशेष उपाय भी किए जाते हैं, जिन्हें काफी प्रभावी माना जाता है. अगर आप आर्थिक स्थिति मजबूत करना चाहते हैं, तो कुछ हरे और अच्छे अंकुरों को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने की परंपरा है. इससे घर में धन और अन्न की कमी नहीं होती, ऐसी मान्यता है.
  • घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए जौ के अंकुरों को पूरे घर में घुमाकर बाद में जल में प्रवाहित करने का उपाय किया जाता है. इससे घर का वातावरण सकारात्मक बना रहता है.
  • अगर घर में कोई बीमार है, तो नवरात्र की नवमी को जौ के अंकुर उसके सिरहाने रखकर अगले दिन उन्हें गाय को खिलाना या बहते पानी में प्रवाहित करना शुभ माना जाता है. इससे स्वास्थ्य लाभ मिलने की मान्यता है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Last Updated: March 18, 2026 16:57:02 IST

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Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पर्व शुरू होते ही घर-घर में मां दुर्गा की पूजा का माहौल बन जाता है. इस पावन समय में घटस्थापना का विशेष महत्व माना गया है. परंपरा के अनुसार, कलश स्थापना के दौरान मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं. यह सिर्फ एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी मान्यताएं और संकेत भी जुड़े होते हैं. कहा जाता है कि नवरात्र में उगने वाले जौ के अंकुर आने वाले समय के शुभ-अशुभ संकेत देते हैं.

सनातन परंपरा में शकुन-अपशकुन का विशेष स्थान है. मान्यता है कि घटस्थापना के समय बोए गए जौ तीसरे दिन से अंकुरित होने लगते हैं और उनका रंग, आकार और स्थिति जीवन के अलग-अलग पहलुओं के बारे में संकेत देती है. यह भी माना जाता है कि जौ की स्थिति से पूरे साल के उतार-चढ़ाव का अंदाजा लगाया जा सकता है. इसलिए नवरात्रि में जौ बोने और उनकी देखभाल को बहुत ही सावधानी से किया जाता है.

अंकुरों के रंग क्या बताते हैं?

  • जौ के अंकुरों का रंग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. अगर अंकुर दूधिया सफेद दिखाई दें, तो इसे सबसे शुभ संकेत माना जाता है. इसका मतलब है कि आपकी पूजा सफल रही और आने वाला समय सुख-समृद्धि से भरा हो सकता है.
  • अगर अंकुर गहरे हरे रंग के हों, तो यह भी अच्छा संकेत है. यह घर में खुशहाली, स्थिरता और धन-धान्य की वृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसे मां दुर्गा की विशेष कृपा का संकेत भी माना जाता है.
  • वहीं अगर जौ का रंग काला पड़ने लगे, तो इसे अशुभ माना जाता है. यह आर्थिक परेशानियों या धन की कमी का इशारा कर सकता है. ऐसे में दान-पुण्य करने की सलाह दी जाती है.
  • अगर अंकुर मटमैले या धुएं जैसे रंग के दिखें, तो यह घर में तनाव, कलह या मानसिक अशांति का संकेत हो सकता है. वहीं लाल रंग के अंकुर किसी बीमारी, शत्रु बाधा या मुश्किल समय का संकेत माने जाते हैं.

अंकुरों की स्थिति और बनावट 

  • सिर्फ रंग ही नहीं, बल्कि जौ के अंकुरों की बनावट और उनकी स्थिति भी कई बातें बताती है. अगर जौ बिल्कुल भी अंकुरित नहीं होते, तो इसे अच्छा संकेत नहीं माना जाता. यह जीवन में रुकावट या किसी अनहोनी की ओर इशारा कर सकता है.
  • अगर अंकुर आधे हरे और आधे पीले दिखाई दें, तो इसका मतलब है कि साल की शुरुआत चुनौतियों से भरी हो सकती है, लेकिन बाद में स्थितियां बेहतर हो जाएंगी.
  • यदि जौ के अंकुर बहुत छोटे रह जाएं, तिरछे उगें या गिरने लगें, तो यह अस्थिरता, परेशानी या बाहरी बाधाओं का संकेत माना जाता है. ऐसे संकेत मिलने पर सतर्क रहने की सलाह दी जाती है.

नवरात्र में जौ से जुड़े उपाय

  • नवरात्र के अंत में जौ का विसर्जन करते समय कुछ विशेष उपाय भी किए जाते हैं, जिन्हें काफी प्रभावी माना जाता है. अगर आप आर्थिक स्थिति मजबूत करना चाहते हैं, तो कुछ हरे और अच्छे अंकुरों को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने की परंपरा है. इससे घर में धन और अन्न की कमी नहीं होती, ऐसी मान्यता है.
  • घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए जौ के अंकुरों को पूरे घर में घुमाकर बाद में जल में प्रवाहित करने का उपाय किया जाता है. इससे घर का वातावरण सकारात्मक बना रहता है.
  • अगर घर में कोई बीमार है, तो नवरात्र की नवमी को जौ के अंकुर उसके सिरहाने रखकर अगले दिन उन्हें गाय को खिलाना या बहते पानी में प्रवाहित करना शुभ माना जाता है. इससे स्वास्थ्य लाभ मिलने की मान्यता है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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