Chaitra Navratri 2026 Day 6: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही है या जिनकी कुंडली में मांगलिक दोष जैसी समस्याएं हैं, उनके लिए नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा और चालीसा का पाठ बेहद शुभ फल देने वाला होता है. श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई आराधना से विवाह से जुड़ी बाधाएं दूर होने लगती हैं और अच्छे संबंध बनने के योग भी प्रबल होते हैं.
पौराणिक कथाओं के अनुसार द्वापर युग में ब्रज की गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए यमुना तट पर मां कात्यायनी की उपासना की थी. इसी कारण अविवाहित कन्याओं के लिए नवरात्रि के छठे दिन की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है.मां कात्यायनी की चालीसा का पाठ करने से जीवन में सुख-समृद्धि के साथ-साथ मनोकामनाओं की पूर्ति होने की मान्यता है. देवी को संकटों को दूर करने वाली और भक्तों की हर इच्छा पूरी करने वाली माना जाता है. जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से मां की शरण में आता है, उसे मानसिक शांति और सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं.
मां कात्यायनी की चालीसा
दोहा
जय कात्यायनी माँ, जय महिषासुर मारिणी.
सुर नर मुनि आराधित, जय मंगल करिणी॥
चौपाई
जय जय अंबे जय कात्यायनी.
जय महिषासुर घातिनी दानी..
ब्रह्मा, विष्णु, शिव जी ध्यावैं.
शक्ति से ही जगत बनावैं॥
रक्तदंतिका और अन्नपूर्णा.
माँ कात्यायनी स्वरूप सम्पूर्णा॥
कात्यायन ऋषि के घर आईं.
भक्तों की हर पीड़ा हर लाई॥
भय संकट हरने वाली माता.
सब पर रखती स्नेहिल छाता॥
जो कोई तेरी शरण में आवे.
मनचाहा फल वही नर पावे॥
जो नारी तेरा ध्यान लगावे.
जीवन में सुख-शांति पावे॥
कुमारी कन्या जो व्रत धारे.
विवाह के योग शीघ्र ही सँवारे॥
हर युग में तू देती सहारा.
भक्तों का करती उद्धारा॥
सिंह पर सवार भवानी माता.
जय-जय-जय जगदम्बे दाता॥